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    Coal Crisis: देश में कोयला आपूर्ति में हुआ सुधार लेकिन मानसून पर निर्भर करेंगे हालात

    पिछले साल मानसून के दौरान कोयला आपूर्ति प्रभावित होने से बिजली संकट पैदा हुआ था संभवत इस साल वैसी स्थिति नहीं आएगी। वजह यह है कि मानसून आने से पहले कोल इंडिया ने न सिर्फ कोयला उत्पादन बढ़ाया है बल्कि बाहर से कोयला आयात करने व्यवस्था भी कर ली है।

    By Arun Kumar SinghEdited By: Updated: Fri, 01 Jul 2022 06:23 PM (IST)
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    मानसून आने से पहले कोल इंडिया ने न सिर्फ कोयला उत्पादन बढ़ाया है

    जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। पिछले साल मानसून के दौरान कोयला आपूर्ति प्रभावित होने की वजह से देश के समक्ष जिस तरह का बिजली संकट पैदा हुआ था, संभवत: इस साल वैसी स्थिति नहीं आएगी। वजह यह है कि मानसून आने से पहले कोल इंडिया ने न सिर्फ कोयला उत्पादन बढ़ाया है बल्कि बाहर से कोयला आयात करने व्यवस्था भी कर ली है। इस कारण अभी कोयला पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। लेकिन मानसून अगर लंबा खिंचा और कोयला उत्पादन पिछले साल की तरह ही ज्यादा समय तक प्रभावित हुआ तब दिक्कत पैदा हो सकती है। अभी के आंकड़ों के मुताबिक ताप बिजली घरों के पास संयुक्त तौर पर 7.4 करोड़ टन कोयला उपलब्ध है या रास्ते में है जो 30 दिनों के लिए पर्याप्त है।

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    उधर, कोल इंडिया (सीआइएल) ने शुक्रवार को बताया है कि अप्रैल-जून के दौरान उसके कुल 15.98 करोड़ टन कोयला उत्पादन किया है जो अप्रैल-जून, 2021 के 12.4 करोड़ टन से 3.6 करोड़ टन ज्यादा है। मजेदार बात यह है कि वर्ष 2021-22 में सीआइएल का कुल उत्पादन वर्ष 2020-21 के मुकाबले 2.64 करोड़ टन ज्यादा रहा था, लेकिन चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ही 3.6 करोड़ टन ज्यादा उत्पादन हुआ है। सीआइएल के इतिहास में पहले ऐसा सिर्फ दो बार हुआ है।

    इससे यह उम्मीद भी बढी है कि कोल इंडिया इस वर्ष 70 करोड़ टन के अपने उत्पादन लक्ष्य को आसानी से हासिल कर लेगा क्योंकि वित्त वर्ष की शुरुआत में उसे उत्पादन में 12.4 फीसद की वृद्धि हासिल करनी थी लेकिन पहली तिमाही के बाद अब उत्पादन में सिर्फ 8.3 फीसद की वृद्धि करनी होगी।

    सीआइएल का कहना है कि जून माह के दौरान उसने ताप बिजली घरों को औसतन 17.13 लाख टन कोयले की आपूर्ति की है जबकि उनकी जरूरत 16 लाख टन की है। यानी रोजाना की जरूरत से सात फीसद ज्यादा। सरकार की कड़ाई के बाद ताप बिजली घरों की तरफ से ज्यादा कोयला उठाने की भी सूचना है। मसलन, जून महीने में इनकी तरफ से 27 फीसद ज्यादा कोयला 5.14 करोड़ टन लिया गया है।

    अगर कोयला उपलब्धता की स्थिति देखें तो बिजली संयंत्रों के पास तकरीबन 2.7 करोड़ टन की इंवेंट्री है। कोल इंडिया के पास 4.3 करोड़ टन का स्टाक है। कोल वाशरीज के पास भी 46 लाख टन कोयला है जिसका ट्रांसपोर्टेशन जल्द होगा। यानी बिजली संयंत्रों के पास कुल 7.4 करोड़ कोयला स्टाक उपलब्ध है या उन्हें कुछ दिनों के भीतर उपलब्ध कराया जा सकता है।

    देश में दो लाख मेगावाट बिजली मांग को पूरा करने के लिए रोजाना तकरीबन 22 लाख टन रोजाना कोयला की जरूरत होगी। इसके अलावा कोल इंडिया ने जुलाई से सितंबर के दौरान 24 लाख टन कोयला आयात करने का टेंडर जारी कर दिया है और 30-30 लाख टन कोयला देश के पूर्वी व पश्चिमी तट पर आपूर्ति करने की टेंडर जारी की हुई है।

    इस हिसाब से देखा जाए तो ताप बिजली संयंत्र एक महीने के लिए बगैर किसी परेशानी के बिजली पैदा कर सकते हैं। लेकिन बात सभी संयंत्रों के लिए नहीं कही जा सकती। बिजली मंत्रालय ने नवंबर, 2021 में घरेलू कोयला पर आधारित ताप बिजली घरों के लिए 17 दिनों से 26 दिनों तक का कोयला स्टाक रखना जरूरी है। इस मानक के हिसाब से तो दर्जनों प्लांटों के पास पर्याप्त कोयला नहीं है।

    कोयला खदानों के नजदीकी संयंत्रों के पास स्टाक की स्थिति बेहतर है लेकिन ब्लाक से दूर दराज बसे ताप बिजली संयंत्रों के पास औसतन 8-13 दिनों का स्टाक है। सरकार के बार-बार आग्रह के बावजूद अधिकांश संयंत्र उपरोक्त मानक के मुताबिक कोयला नहीं रखते हैं और इसकी वजह जगह की कमी और ज्यादा लागत को बताते हैं। ऐसे में बहुत कुछ मानसून की स्थिति पर निर्भर होगा।

    मानसून की वजह से ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश के कई कोयला खदानों में उत्पादन प्रभावित हुआ था। रेल और कोयला मंत्रालय ने सामंजस्य के साथ इसकी तैयारी कर ली है कि समय से कोयला बिजली संयंत्र तक पहुंच जाए। कोयला बहुल राज्य ओडिशा से आने वाले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान ने इसके लिए दोनों मंत्रालयों को धन्यवाद भी दिया है।