विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 05, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

CM जगन मोहन रेड्डी ने वापस लिया फैसला, APJ अब्दुल कलाम प्रतीभा के नाम से ही मिलेंगे पुरस्कार

By Pooja SinghEdited By:
Published: Tue, 05 Nov 2019 01:11 PM (IST)Updated: Tue, 05 Nov 2019 01:56 PM (IST)

आंध्र प्रदेश में एपीजे अब्दुल कलाम प्रतिभा पुरस्कार के नाम से ही दिए जाएंगे। इसकी पुष्टि खुद मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने की है।

CM जगन मोहन रेड्डी ने वापस लिया फैसला, APJ अब्दुल कलाम प्रतीभा के नाम से ही मिलेंगे पुरस्कार
CM जगन मोहन रेड्डी ने वापस लिया फैसला, APJ अब्दुल कलाम प्रतीभा के नाम से ही मिलेंगे पुरस्कार

हैदराबाद, एएनआइ। देशभर में 11 नवंबर को शिक्षा दिवस मनाया जाता है। इस खास मौके पर आंध्र प्रदेश में मौलाना अबुल कलाम की आजाद जयंती के अवसर पर पुरस्कार वितरित किए जाते हैं। ये पुरस्कार इस बार राज्य में एपीजे अब्दुल कलाम प्रतिभा पुरस्कार के नाम से ही दिए जाएंगे। इसकी पुष्टि खुद मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने की है। बता दें कि इससे पहले उन्होंने इस पुरस्कार का नाम बदल कर वाईएसआर विद्या पुरस्कार कर दिया गया था। इसके बाद दोबारा से उन्होंने यह घोषणा की है। 

सोशल मीडिया पर जमकर हुआ विरोध

मिली जानकारी के मुताबिक, जैसे ही मुख्यमंत्री ने इस पुरस्कार का नाम बदलने का फैसला किया तो वह जनता के निशाने पर आ गए। भारत के मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के नाम को बदलने पर उन्हें जनता का काफी रोष भी झेलना पड़ा। भारी दवाब के बाद उन्होंने पुरस्कार का नाम बदलने को लेकर जारी आदेश को रद करते हुए पुरस्कार के पुराने नाम को बहाल करने के आदेश दिए। 

भाजपा ने भी जताया था विरोध

भाजपा ने भी मौजूदा सरकार के खिलाफ विरोध जताया था। उन्होंने अपन रोष प्रकट करते हुए कहा था कि दुख की बात है कि आंध्र प्रदेश सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर दिए जाने वाले आवर्ड का नाम बदलने काम काम किया। उन्होंने कहा कि ये गैर कानूनी है और ऐसा करके उन्होंने अब्दुल कलाम का अपमान किया है। 

कई योजनाओं के बदल चुके हैं नाम 

बता दें कि इससे पहले मुख्यमंत्री ने अन्ना कैंटीन का नाम बदलकर राजन्ना कैंटीन कर दिया था। इसके अलावा दोपहर के भोजना योजना का नाम को वाईएसआर अक्षय पात्र रखा था। मुख्यमंत्री ने इसके अलावा सचिवालय भवन की दीवार से तिरंगा हटाकर अपनी पार्टी के रंग का पार्टी पेंट करवा दिया था। जिसके लिए उन्हें काफी विरोध भी झेलना पड़ा था।