Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    'सेंसरशिप की जरूरत नहीं, लेकिन...', हेट स्पीच को लेकर SC की अहम टिप्पणी; केंद्र-राज्यों को दिए ये निर्देश

    Updated: Mon, 14 Jul 2025 04:41 PM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर फैल रहे हेट स्पीच को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर कुछ भी जायज ठहराने की कोशिश हो रही है जो खतरनाक है। कोर्ट ने नफरती भाषणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही पर बोलने की आजादी को कुचलने से बचने की सलाह दी।

    Hero Image
    हेट स्पीच अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर खतरनाक।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए एक अहम टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने इन दिनों सोशल मीडिया पर फैल रहे हेट स्पीच को लेकर चिंता जाहिर की है। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि इन दिनों अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर सब कुछ जायज करने की कोशिश की जा रही है।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    कोर्ट ने चिंता जाहिर करते हुए इसको बेहद खतरनाक करार दिया। बता दें न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज फ्रांसिस विस्वनाथन की बेंच ने ये टिप्पणी की। वे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली के खिलाफ वजाहत नाम के शख्स द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनावई कर रहे थे।

    'किसी की बोलने की आजादी को न कुचला जाए'

    याचिका पर सुनवाई करते हुए बेंच ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि नफरती भाषणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि किसी की बोलने की आजादी को न कुचला जाए। वहीं, लोगों को आत्मसंयम का पाठ पढ़ाते हुए कोर्ट ने कहा कि लोगों को भी अभिव्यक्ति के अधिकार को समझना होगा। यह अधिकार बेशकीमती है।

    अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मूल्य को समझना होगा

    बेंच ने कहा कि लोगों को अभिव्यक्ति की आजादी का मूल्य समझना होगा। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में अगर राज्य को बीच में आकर कार्रवाई करनी पड़े तो ये स्थिति ठीक नहीं है। वहीं, हेट स्पीच कंटेंट पर कुछ नियंत्रण बेहद जरूरी है। देश के नागरिकों को भी इस प्रकार के कंटेंट को शेयर करने, प्रमोट करने से बचना होगा।

    जानिए पूरा मामला

    गौरतलब है कि शीर्ष कोर्ट वजाहत खान नामक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसके खिलाफ पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में एक हिंदू देवता के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करने के आरोप में एफआईआर दर्ज हैं। 23 जून को सुप्रीम कोर्ट ने उसे 14 जुलाई तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था।

    इसी बीच वजाहत खान ने एक अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली के खिलाफ एक वीडियो में कथित रूप से सांप्रदायिक टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। उनके वकील ने अदालत में कहा कि समान पोस्ट के जवाब में आपत्तिजनक टिप्पणियां नहीं की जानी चाहिए।

    पुलिस ने की थी गिरफ्तारी

    जानकारी दें कि वजाहत खान को कोलकाता पुलिस ने 9 जून को गिरफ्तार किया था। खान ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और आरोप लगाया कि उनके द्वारा किए गए कुछ पुराने ट्वीट्स के लिए असम, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और हरियाणा सहित कई राज्यों में उनके खिलाफ एफआईआर और शिकायतें दर्ज की गई हैं।

    वजाहत खान का तर्क था कि ये शिकायतें शर्मिष्ठा पनोली के खिलाफ उनके द्वारा दर्ज की गई शिकायत के प्रतिशोध में दर्ज की गई थीं, जिन्हें गिरफ्तार किया गया था और बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया था। (इनपुट- पीटीआई के साथ)

    यह भी पढ़ें- 'आधार, वोटर आईडी और राशन कार्ड पर करें विचार', मतदाता सूची रिवीजन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा?

    यह भी पढ़ें- SC: वकीलों को समन भेजने पर जांच एजेंसियों से नाराज सुप्रीम कोर्ट, मामले पर खुद लिया संज्ञान; होगी सुनवाई