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    सिगरेट, पान मसाला और तंबाकू समेत क्या-क्या होगा महंगा? नया कानून बनाने जा रही सरकार

    By Rajeev KumarEdited By: Garima Singh
    Updated: Mon, 01 Dec 2025 11:21 PM (IST)

    सरकार सिगरेट, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाने के लिए नया कानून लाने जा रही है। सेंट्रल एक्साइज (संशोधन) 2025 और स्वास्थ्य सुरक्षा से राष् ...और पढ़ें

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    सिगरेट, पान मसाला और तंबाकू समेत क्या-क्या होंगे महंगे?

    राजीव कुमार, नई दिल्ली। स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिगरेट, पान मसाला व अन्य तंबाकू उत्पाद आने वाले समय में काफी महंगे हो सकते हैं। केंद्र सरकार इन वस्तुओं पर क्षतिपूर्ति टैक्स की जगह नए रूप में इन पर और अधिक टैक्स वसूलने के लिए सेंट्रल एक्साइज (संशोधन) 2025 तो स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा सेस के नाम से कानून बनाने जा रही है। सोमवार को इन दोनों बिल को संसद में पेश किया गया।

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    राजस्व पर भी फर्क पड़ेगा

    वर्तमान में तंबाकू, पान मसाला, सिगरेट जैसे हानिकारक आईटम पर सरकार 28 प्रतिशत जीएसटी के साथ क्षतिपूर्ति सेस भी वसूलती है। क्षतिपूर्ति सेस की अवधि अगले साल मार्च तक समाप्त हो जाएगी और उसके बाद कानूनी तौर पर सरकार किसी भी आईटम पर क्षतिपूर्ति सेस नहीं लगा सकेगी। क्षतिपूर्ति सेस समाप्त होने से सरकार के राजस्व पर भी फर्क पड़ेगा।

    मशीन व उपकरणों पर सेस लगाया जाएगा

    इन चीजों को ध्यान में रखते हुए सरकार एक्साइज संशोधन बिल और स्वास्थ्य से सुरक्षा सेस कानून ला रही है। ताकि इस प्रकार के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक आईटम की बिक्री से सरकार को भरपूर राजस्व भी मिले और लोग इसकी खपत के लिए हतोत्साहित भी हो। स्वास्थ्य से राष्ट्रीय सुरक्षा सेस के तहत सिगरेट, पान मसाला जैसे आईटम के उत्पादन में शामिल मशीन व उपकरणों पर सेस लगाया जाएगा।

    लोन की भरपाई कैसे?

    वर्ष 2017 में क्षतिपूर्ति सेस की शुरुआत की गई थी जिसे पांच साल तक जारी रखना था। ताकि राज्यों को वित्तीय मदद दी जा सके। कोरोना काल में क्षतिपूर्ति सेस का संग्रह काफी कम होने से राज्यों की वित्तीय मदद के लिए केंद्र ने लोन लिया। 2022 में क्षतिपूर्ति सेस की अवधि समाप्त होने के बावजूद लोन की वजह से इस सेस को जारी रखा गया ताकि लोन की भरपाई हो सके।

    क्षतिपूर्ति सेस वसूला जा रहा

    गत 22 सितंबर से जीएसटी का दूसरा वर्जन लागू किया गया जिसके तहत अब सिर्फ तंबाकू, पान मसाला जैसे हानिकारक आईटम पर ही क्षतिपूर्ति सेस वसूला जा रहा है। अगले साल मार्च तक लोन खत्म होने पर कानूनी रूप से इन आईटम पर भी क्षतिपूर्ति सेस नहीं लिया जा सकेगा। यह कानून सेंट्रल एक्साइज एक्ट 1944 की जगह लेगा। पुराने कानून में सिगार पर 12 प्रतिशत या प्रति 1000 पीस पर 4006 रुपए का टैक्स (जो भी अधिक हो) लगता है।

    7000 रुपए टैक्स लेने का प्रस्ताव

    अब यह 25 प्रतिशत या 5000 रुपए (जो भी अधिक हो) कर दिया जाएगा। 65 एमएम की सिगरेट पर अभी प्रति 1000 पीस पर 440 रुपए का टैक्स लगता है। अब इसे बढ़ाकर 3000 रुपए कर दिया जाएगा। 65 एमएम से बड़ी और 70 एमएम से छोटी फिल्टर सिगरेट पर प्रति 1000 पीस पर 440 रुपए की जगह 5200 रुपए तो 70 एमएम से बड़ी सिगरेट पर 545 रुपए प्रति 1000 की जगह 7000 रुपए टैक्स लेने का प्रस्ताव है।

    क्यों लाना चाह रही है सरकार एक्साइज संशोधन बिल?

    अभी तंबाकू, पान मसाला जैसे आइटम जीएसटी और एक्साइज दोनों टैक्स के दायरे में आते हैं। क्षतिपूर्ति सेस खत्म होने के बाद इन आइटम पर टैक्स कम हो जाएगा। इसकी पूर्ति के साथ इन आइटम पर और टैक्स बोझ डालने के लिए सरकार एक्साइज संशोधन व स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा सेस कानून ला रही है। सितंबर में जीएसटी की नई दरों के तहत 28 प्रतिशत के स्लैब को समाप्त कर दिया और उसकी जगह 40 प्रतिशत का स्लैब लाया गया।

    लेकिन तंबाकू, पान मसाला पर अभी 28 प्रतिशत जीएसटी ही लिया जा रहा है। इसे 40 प्रतिशत के स्लैब में कब डाला जाएगा, इस पर जीएसटी काउंसिल की चैयरमैन वित्त मंत्री फैसला लेंगी।

    दूसरा, स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत सेस अब मशीन की उत्पादन क्षमता पर लगेगी। अभी सेस उत्पादन पर लगता है, लेकिन अब मशीन की उत्पादन क्षमता अगर 100 यूनिट है और उत्पादन 50 यूनिट ही हो रहा है तो भी सेस 100 यूनिट पर ही लगेगा। एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी से राज्यों को भी फायदा होगा क्योंकि केंद्र के इस राजस्व में राज्य का भी हिस्सा होता है।