भारतीय बाजार में दस्तक देने के लिए बेताब हो रहा चीन, सीमित निवेश के साथ मिल सकती है इजाजत
Tariffs News चीन की कंपनियां भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में निवेश करने को इच्छुक हैं। ट्रंप सरकार की शुल्क नीति से प्रभावित होकर चीन की कंपनियां भारत में संयुक्त निवेश के लिए तैयार हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स में चीन की कंपनियों को भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर काम करने का मौका मिल सकता है। लेकिन इसके लिए उन्हें टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करना होगा।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। ट्रंप सरकार की शुल्क नीति से प्रभावित चीन की कंपनियां इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में भारत में निवेश में दिलचस्पी दिखा रही है। सूत्रों के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स में चीन की कंपनियों को भारतीय कंपनियों के साथ संयुक्त निवेश करने का मौका दिया जा सकता है, लेकिन चीन की कंपनियों को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने के लिए भी राजी होना होगा।
सूत्रों के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स सेक्टर में भारतीय कंपनियों में अधिकतम 10 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी की इजाजत चीन की कंपनियों को मिल सकती है। हालांकि अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं किया गया है।
ट्रंप सरकार की शुल्क नीति के बाद चीन की कंपनियों को भारतीय बाजार और कारोबारी दोनों ही रास आने लगे हैं। चीन की कंपनियां भारत में अपनी मशीन बेचने के लिए भारतीय इंजीनियर को अपने यहां ट्रेनिंग तक देने के लिए राजी हो रही है।
नौ जुलाई तक अमेरिका ने टाला भारत के खिलाफ टैरिफ
ट्रंप सरकार ने चीन पर 145 प्रतिशत का शुल्क लगा दिया है जबकि भारत पर अभी सिर्फ 10 प्रतिशत का शुल्क है। अमेरिका ने भारत पर 26 प्रतिशत का पारस्परिक शुल्क लगाया है, लेकिन अभी आगानी नौ जुलाई तक इसे टाल दिया गया है और भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौता होने पर अमेरिका के बाजार में भारतीय वस्तुएं शुल्क मुक्त हो सकती है।
इस माहौल को देखते हुए चीन की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां भारतीय कंपनियों के साथ कारोबार शुरू करना चाहती है। सूत्रों का कहना है कि टाटा की वोल्टास कंपनी में चीन की कंपनी निवेश करना चाहती है। हाल ही में सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स के निर्माण के लिए स्कीम लाई है और चीन की कंपनियां इस स्कीम के तहत भी भारत में निवेश करने के लिए भारतीय कंपनियों से संपर्क कर रही हैं।
भारत के सहारे अमेरिका के इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में बने रहना चाहता चीन
जानकारों के मुताबिक चीन भारत के सहारे ही अमेरिका के इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में बने रहना चाहता है। क्योंकि अमेरिका हर साल 400 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक्स व इलेक्ट्रॉनिक्स मशीनरी का आयात करता है और इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी चीन की है। 145 प्रतिशत के शुल्क के बाद चीन से अमेरिका निर्यात होने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम काफी महंगे हो जाएंगे और वे अमेरिका के बाजार में टिक नहीं पाएंगे।
सूत्रों के मुताबिक चीन में निर्माण करने वाली अन्य देशों की कंपनियों को भारत में उत्पादन शुरू करने पर सरकार सभी प्रकार की मदद के लिए तैयार है। लेकिन इन कंपनियों में अगर चीन की कंपनियों की हिस्सेदारी होगी तो उन्हें भी भारत में निवेश करना आसान नहीं होगा।
वर्तमान वैश्विक कारोबारी माहौल में भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम का बड़ा निर्यातक बनने का मौका दिख रहा है और इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम से जुड़े सभी कंपोनेंट्स का भी भारत घरेलू स्तर पर निर्माण करना चाहता है ताकि कंपोनेंट्स के चीन से होने वाले आयात पर रोक लग सके।
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