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    यहां उल्टा बहता है पानी, हवा में तैरती हैं बारिश की बूंदें... भारत का 'मिनी तिब्बत' कहलाती है ये जगह

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 08:39 PM (IST)

    मैनपाट जिसे ‘मिनी तिब्बत’ कहा जाता है अंबिकापुर से 55 किमी दूर एक सुंदर हिल स्टेशन है। यहां शांत वादियां घने जंगल और रहस्यमयी स्थल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। बरसात में रुई जैसे फाहों की वर्षा होती है। उल्टापानी नामक एक रहस्यमयी जगह है जहाँ पानी ढलान की ओर बहने के बजाय ऊपर की ओर जाता है।

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    अंबिकापुर से लगभग 55 किलोमीटर दूर स्थित है हिल स्टेशन (फोटो: जेएनएन)

    अनंगपाल दीक्षित, अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ का मैनपाट, जिसे ‘मिनी तिब्बत’ भी कहा जाता है, प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं। छत्तीसगढ़ के जिला मुख्यालय अंबिकापुर से लगभग 55 किलोमीटर दूर स्थित यह हिल स्टेशन अपनी शांत वादियों, घने जंगलों और रहस्यमयी स्थलों के कारण पर्यटकों के बीच लगातार लोकप्रिय हो रहा है।

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    यहां की हरियाली और ताजगी से भरी ठंडी हवाएं मानो थके हुए मन को नया जीवन दे देती हैं। वैसे तो मैनपाट ठंड के लिए चर्चित है पर अब पर्यटकों को बरसात का मौसम भाने लगा है। बरसात में यहां सर्वाधिक संख्या में पर्यटक आने लगे हैं। पर्यटकों के आने से यहां निजी होटल की संख्या भी बढ़ गई है। शासकीय मोटल और पर्यटन विभाग का रिसॉर्ट भी है।

    ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था के कारण लोग अब रातें भी बिता रहे हैं। यहां तिब्बतियों का सात अलग-अलग कैंप है, जहां तिब्बती संस्कृति लोगों को लुभाती है। तिब्बती होटल, रेस्टोरेंट भी हैं जो तिब्बती व्यंजनों से भरे होते हैं। आदिवासी जीवन शैली भी यहां देखने को मिलती है। यहां का प्राकृतिक उत्पाद जिसमें पुटु, खुखड़ी (मशरूम) की सब्जी, लकड़ा की चटनी (खट्टा स्वाद का पौधा) भी लोगों को व्यंजन के रूप में मिलता है।

    उल्टा पानी का रहस्य

    मैनपाट का नाम आते ही सबसे पहले चर्चा होती है ‘उल्टापानी’ की। यह रहस्यमयी स्थल अपने अनोखे आकर्षण के लिए जाना जाता है, जहां पानी ढलान की ओर बहने के बजाय ऊंचाई की ओर जाता हुआ प्रतीत होता है। यह अद्भुत दृश्य न केवल विज्ञान को चुनौती देता दिखता है बल्कि यहां आने वाले पर्यटकों को रोमांच और आश्चर्य से भर देता है। हर कोई अपने मोबाइल कैमरे में इस नजारे को कैद करना नहीं भूलता।

    बरसात में रुई जैसे फाहों की वर्षा

    बरसात के दिनों में मैनपाट का सौंदर्य अपने चरम पर होता है। यहां कोहरे में लिपटी घाटियां, झरनों की कलकल ध्वनि और वादियों में फैली ठंडी नमी मन मोह लेती है। खास बात यह है कि वर्षा की बारीक बूंदें रुई के फाहों की तरह तैरती नजर आती हैं, मानो धीरे-धीरे शरीर को छूकर गुजर रही हों। यह अनुभव इतना अद्भुत होता है कि इसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

    सुहाना मौसम, सालभर आकर्षण

    मैनपाट का मौसम पूरे वर्ष सुहाना रहता है। गर्मियों में यहां की ठंडी हवाएं राहत देती हैं, जबकि सर्दियों में कोहरा और ठंडी धुंध वादियों को रहस्यमयी बना देती है। नवंबर से मार्च तक यह स्थान सबसे अधिक गुलजार रहता है, लेकिन अब लोग बरसात में भी यहां की भीगी वादियों और ताजगी भरी हवा का आनंद लेने पहुंचने लगे हैं।

    दर्शनीय स्थल जो मन मोह ले

    मैनपाट में कई खूबसूरत स्थल हैं जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। पंचधारा की बहती जलधारा का संगीत मन को सुकून देता है। टाइगर प्वाइंट से नीचे झांकते हुए गहरी घाटियों का दृश्य रोमांच और शांति का अनोखा संगम प्रस्तुत करता है। परपटिया और जल-जली जैसे स्थानों की हरियाली और शांत वातावरण मन को पूरी तरह मोह लेते हैं। इन सभी स्थलों की दूरी मैनपाट ब्ल#क मुख्यालय से 10 से 20 किलोमीटर की दूरी पर है। स्थानीय स्तर पर यहां चार पहिया या दो पहिया वाहन से इन स्थलों का भ्रमण किया जा सकता है।

    प्राकृतिक सौंदर्य का खजाना

    मैनपाट की हरियाली, झरनों की आवाज और घाटियों में बहती ठंडी हवाएं यहां आने वाले हर व्यक्ति को एक अनोखी ताजगी का एहसास कराती हैं। यहां की वादियां मानो प्रकृति के साथ एक संवाद करने का अवसर देती हैं, जहां आप खुद को पूरी तरह से सुकून और शांति में डूबा हुआ महसूस करते हैं। मैनपाट केवल एक हिल स्टेशन नहीं, बल्कि यह प्रकृति का जादुई संसार है। उल्टापानी का रहस्य, रुई जैसे फाहों सी वर्षा, सुहाना मौसम और सुरम्य वादियों का संगम यहां आने वाले हर पर्यटन को अविस्मरणीय अनुभव देता है। यदि आप प्रकृति की गोद में सुकून तलाशना चाहते हैं तो मैनपाट निश्चित ही आपकी यात्रा के लिए अनुकूल है।

    ऐसे पहुंचें मैनपाट

    देश की राजधानी दिल्ली से सीधे अंबिकापुर के लिए ट्रेन सुविधा है जो सप्ताह में एक दिन चलती है। ट्रेन से अंबिकापुर आने के बाद टैक्सी की सुविधा से 40 किलोमीटर दूर मैनपाट पहुंचा जा सकता है।

    दिल्ली से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर तक हवाई सेवा के जरिए पहुंचा जा सकता है। रायपुर राजधानी से घरेलू हवाई सेवा के माध्यम से अंबिकापुर के दरिमा मां महामाया एयरपोर्ट पहुंचकर सीधे मैनपाट पहुंचा जा सकता है।

    उत्तर प्रदेश के पर्यटक वाराणसी से सीधे 400 किलोमीटर की यात्रा कर बस या चार पहिया के माध्यम से सीधे मैनपाट पहुंच सकते हैं। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सीधे यात्री बस के माध्यम से मैनपाट पहुंचा जा सकता है।

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