रायपुर, हिमांशु। छत्तीसगढ में हरेली के त्योहार के दिन यानी 20 जुलाई से एक ऐसी योजना शुरू होने जा रही है जो अपने आप में अनूठी है। इस योजना के लागू होने से पहले ही पूरे देश में इसे लेकर चर्चा हो रही है। हम अपनी ग्रामीण संस्कृित में गोबर को एक मूल्यवान वस्तु मानते रहे हैं। एक ऐसी मूल्यवान वस्तु जिसका कोई मोल तो तय नहीं, लेकिन वह कीमती है। गाय का गोबर कई तरह के काम में आता है। इसके माध्यम से अच्छा इंधन तैयार होता है। इसे गांव के कच्चे घरों में लीपने के लिए उपयोग किया जाता है।

गाय के गोबर से सबसे अच्छी किस्म की जैविक खाद तैयार की जाती है। इतनी उपयोगिता के बावजूद गाय के गोबर की देश में कोई कीमत तय नहीं थी। गांधी जी के ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मॉडल को अपना कर आगे बढ रही छत्तीसगढ की कांग्रेस सरकार देश में पहली बार एक ऐसी योजना लागू करने जा रही है जिसके साथ गोबर की कीमत तय होगी। गोधन न्याय योजना नामकी इस योजना की शुरूआत हरेली त्योहार के दिन से राज्य में होगी।

गोधन न्याय योजना ग्रामोन्मुखी योजना है। यह योजना मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की दूरदर्शिता और गांवों में विकास की अवधारणा पर आधारित है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सबसे पहले नरवा, गरवा, घुरूवा और बारी योजना शुरू की। इन सभी योजनाओं का अस्तित्व किसी न किसी रूप में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकासवादी मॉडल पर आधारित था। अब इसी रास्ते पर एक कदम और आगे बढाते हुए गोधन न्याय योजना की परिकल्पना तैयार की गई है। अभी तक किसी ने इससे होने वाले फायदों के बारे नहीं सोचा था। वास्तव में यह योजना गांवों को आत्मनिर्भर बनाने वाली योजना है। गोधन न्याय योजना को छत्तीसगढ़ में हरेली त्यौहार से शुरू करने की योजना है।          

राज्य में गोठान के माध्यम से गोधन को एक़़त्र कर रखने का प्रयास सफल रहा है। इससे फसलों की सुरक्षा के साथ ही गांव वासियों रोजगार भी मिल रहा है। गावों की महिलाएं स्व-सहायता समूह बनाकर गोठानों में खाद बना रही हैं। खाद बेचकर आर्थिक लाभ कमा रही हैं। सरकार द्वारा गोबर खरीदने की निर्णय से ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। पढ़े-लिखे पशुपालक और पशुधन विकास विभाग से जुड़े अधिकारी तथा विशेषज्ञ अभी से ही इस योजना के फायदों को लेकर अपने-अपने तर्क और सुझाव लोगों के बीच साझा कर रहें हैं।

गोधन न्याय योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में पशु पालकों को गौ पालन की ओर प्रोत्साहित किया जा सकता है। पशुपालन के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ खेती-किसानी में जैविक खाद के उपयोग को बढ़ाने में भी यह योजना खासी महत्वपूर्ण होगी। जैविक खाद उत्पादन से ग्रामीणों को रोजगार और आजीविका का नया साधन इस योजना से मिलेगा। राज्य में फसलों का उत्पादन और बढे़गा।       

योजना  के यह लाभ

- ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

- इस योजना के लागू होने से सडकों पर मवेशियों की आवाजाही रोकने में मदद मिलेगी।

- खेती के काम में मवेशियों का अधिक से अधिक उपयोग हो सकेगा।

- गाय के गोबर से बनने वाली खाद का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग कृषि कार्यों में होगा जिससे भूमि की सेहत सुधरेगी।- - राज्य में जैविक खेती को बढावा मिलेगा।

- गोपालन को एक फायदेमंद व्यवसाय के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।

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