नई दिल्ली, जेएनएन। Lunar Eclipse Timings in India साल का दूसरा चंद्र ग्रहण शनिवार रात को समाप्‍त हो गया। यह ग्रहण वास्तविक चंद्र ग्रहण न होकर एक उपछाया चंद्र ग्रहण था। उपछाया चंद्र ग्रहण को धार्मिक लिहाज से बहुत ज्यादा मान्यता नहीं दी जाती है। हालांकि, ग्रहण के दौरान थोड़ी बहुत सावधानियां रखनी चाहिए। चंद्र ग्रहण 11 बजकर 15 मिनट से शुरू हुआ जबकि रात में 2 बजकर 34 मिनट पर खत्म हो गया। यह ग्रहण रात 12:54 बजे अपने अधिकतम प्रभाव में रहा।  

इस चंद्रग्रहण में सूतक काल भी मान्य नहीं 

उपछाया चंद्र ग्रहण बहुत अधिक प्रभावशाली नहीं होता है, इस दौरान सूतक काल भी मान्य नहीं होता है। इसके कारण सामान्य चांद और ग्रहण में अंतर कर पाना मुश्किल होता है। ऐसे ग्रहण के समय चंद्रमा के आकार में कोई परिवर्तन नहीं नजर आता है। बल्कि इसकी छवि कुछ मलिन हो जाती है। ज्योतिष अनुसार उपच्छाया चंद्र ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होता क्योंकि इसे वास्तविक ग्रहण नहीं माना गया है। ज्योतिष में उसी ग्रहण को गंभीरता से लिया जाता है जिसे खुली आंखों से देखा जा सके। 10 जनवरी को भी ऐसा ही चंद्र ग्रहण लगा था। 

जानिए- क्या होता है उपछाया चंद्र ग्रहण

चंद्रग्रहण एक खगोलीय घटना है। जो तब घटित होती है जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया में आ जाता है। ऐसा तभी हो सकता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा इस क्रम में लगभग एक सीधी रेखा में स्थित रहें। तो वहीं उपच्छाया चंद्र ग्रहण तब लगता है जब पृथ्वी की परिक्रमा करने के दौरान चंद्रमा पेनुम्ब्रा से हो कर गुजरता है। ये पृथ्वी की छाया का बाहरी भाग होता है। इस दौरान, चंद्रमा सामान्य से थोड़ा गहरा दिखाई देता है।

ग्रहण काल में क्या करना चाहिए 

शास्त्रों में उपछाया चंद्र ग्रहण में ना तो सूतक काल और ना ही किसी तरह के धार्मिक कार्यों पर प्रतिबंध लगा है। इस ग्रहण काल में चिंता करने की कोई बात नहीं है। ग्रहण काल के दौरान रात में जगे रहने की भी जरूरत नहीं है। ग्रहण काल के दौरान भगवान शिव की चालीसा का पाठ करें और ऊं नम: शिवाय के मंत्रों का जाप करें। आप जितनी भगवान शिव की पूजा करेंगे, आपको उतना ही लाभ होगा। ग्रहणकाल के दौरान बुजुर्गों और छोटे बच्चों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। 

चंद्र ग्रहण के दौरान बरते जानी वाली सावधानियां...

सूतक काल के दौरान किसी भी तरह का शुभ कार्य शुरू नहीं किया जा सकता है। जब भी सूतक लगता है तो उस दौरान भगवान की मूर्तियों न तो छुआ जाता और न ही पूजा होती है। इस दौरान मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।- सूतक के समय भगवान का ध्यान और मंत्रों का जप करने से ग्रहण का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है।- सूतक काल में गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।

गर्भवती महिलाएं इन बातों का रखें ध्यान

धार्मिक मान्यताओं अनुसार सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दोनों ही अशुभ माने गये हैं। जिनका प्रभाव लंबे समय तक रहता है। 5 जून में ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। चंद्र ग्रहण के दौरान बहुत से कार्य वर्जित होते हैं। कहा जाता है कि इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव काफी ज्यादा रहता है। इसलिए कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत पड़ती है। खासकर गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के समय ज्यादा सतर्क रहना होता है। जिससे ग्रहण का बुरा प्रभाव गर्भ में पल रहे बच्चे पर न पड़ सके।

चंद्र ग्रहण को लेकर विदेशों में मान्यताएं

चंद्रग्रहण से जुड़ी कई मान्यताएं भी हैं। दुनिया भर के देशों में इससे जुड़ी कई दिलचस्प मान्यताएं हैं। जैसे अमेरिका स्थित इन्का साम्राज्य के लोगों का मानना है कि चंद्रग्रहण के दिन एक तेंदुआ चांद पर हमला करता है, और इसी कारण चंद्रग्रहण के दौरान चांद का रंग लाल हो जाता है। यहां के लोग ये भी मानते हैं कि यही तेंदुआ पृथ्वी पर भी आता है और इसे खाने की कोशिश करता है। इसलिए वे तेंदुए से बचने के लिए भालों का प्रयोग करते हैं और जोर जोर से आवाज निकालते हैं। इसके अलावा वहां के लोग अपने कुत्ते को भी पीटते हैं, ताकि उनकी आवाज सुनकर तेंदुआ भाग जाए।

क्या खुली आंखों से ग्रहण देख सकते हैं

एक्सपर्ट्स का मानना है कि चंद्र ग्रहण के दौरान या चंद्र ग्रहण को सीधे तौर पर देखना, आपकी आंखों को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाता। जबकि, सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से देखने पर यह आपकी आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है। हमेशा सूर्यग्रहण को खास सोलर फिल्टर वाले चश्मों से देखें। इन्हें सोलर-व्युइंग ग्लासेस, पर्सनल सोलर फिल्टर्स या आइक्लिप्स ग्लासेस कहा जाता है। आपके नॉर्मल चश्मे या गॉगल्स आंखों को यूवी रेज़ से सुरक्षित नहीं रख सकते।

अगले महीने फिर लगेगा चंद्रग्रहण

उपछाया चंद्र ग्रहण होने के कारण चंद्रमा के आकार में किसी भी तरह का कोई भी परिवर्तन देखने को नहीं मिला। इस साल दो और चंद्रग्रहण लगेंगे। ये चंद्रगहण 5 जुलाई और 30 नवंबर को होंगे। इससे पहले इसी साल 10 जनवरी को भी चंद्रग्रहण लगा था। उपछाया चंद्रग्रहण की इस घटना को नग्न आंखों के द्वारा देखा जा सकता है। यह ग्रहण बहुत अधिक प्रभावशाली नहीं होता है. इस दौरान सूतक काल भी मान्य नहीं होता है।

Posted By: Sanjeev Tiwari

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