नई दिल्ली, जेएनएन। Chandra Grahan 2020: साल के पहले चंद्रग्रहण की खास बात यह रही कि दुनिया के अन्‍य भागों के साथ भारत में भी दिखाई दिया। यह ग्रहण 10 जनवरी शुक्रवार रात 10 बजकर 36 मिनट से शुरू होकर 11 जनवरी के तड़के 02:44:04 बजे तक रहा। चंद्रग्रहण की अवधि 4 घंटे से ज्यादा की थी। यह भारत समेत यूरोप, आस्ट्रेलिया और अफ्रीका के कई हिस्सों में दिखाई दिया।

कहां-कहां देखा गया चंद्रग्रहण

इस ग्रहण को एशिया, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, अफ्रीका में देखा गया, लेकिन नॉर्थ अमेरिका में इस ग्रहण को नहीं देखा जा सका, लेकिन अलास्का, इस्टर्न माइन और उत्तर पूर्वी कनाडा में इसे देखा जा सका।

वैज्ञानिकों के लिए खगोलीय घटना, शास्त्रों में अशुभ घटना

एक खगोलीय घटना होने के कारण वैज्ञानिकों के लिए ग्रहण विशेष महत्‍व रखता है। वैज्ञानिक इस दौरान कई गणनाएं करते हैं। चंद्रग्रहण को नंगी आंखों से भी देखा जा सकता है। इसमें परेशानी नहीं है। जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के मध्य से होकर गुजरता है, तब सूर्य ग्रहण होता है। इसी तरह जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी छाया में आ जाता है तो चंद्रग्रहण होता है। धार्मिक मान्‍यता के अनुसार चंद्रग्रहण को नंगी आंखों से देखना शुभ नहीं माना जाता है।

क्या होता है उप-छाया ग्रहण

चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य जब एक सीध पर होते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है तो चंद्र ग्रहण माना जाता है। लेकिन इस बार चंद्रमा पृथ्वी की छाया के बाहरी किनारे (पृथ्वी की उपछाया) से होकर गुजरेगा। यानी चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में छिपेगा नहीं बल्कि हल्का मलिन होगा जिसकी मलिनता नंगी आंख से देख पाना मुश्किल है। इस प्रकार यह ग्रहण उप-छाया चंद्र ग्रहण है।

कहां-कहां नजर आएगा यह चंद्रग्रहण 

- भारत समेत एशिया के सभी देश 

- ऑस्ट्रेलिया 

- अफ्रीका

- यूरोप  

- नॉर्थ अमेरिका 

- भारतीय महासागर 

ग्रहण के समय क्‍या करें क्‍या ना करें

चंद्र ग्रहण के दौरान कई बातों का ख्‍याल रखना आवश्‍यक है। मान्यता है कि इस ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को घर के बाहर नहीं निकलना चाहिए। ग्रहण के दौरान कोई भी काम शुरु करने की मनाही होती है। इस दौरान खाना बनाने से भी बचना चाहिए। ग्रहण के दौरान नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव अधिक होता है, इसलिए हमेशा इस दौरान ईश्वर का ध्यान करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इसका सूतक 12 घंटे पहले यानि दस जनवरी की सुबह 10.30 बजे से लग जाएगा। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। 

इस ग्रहण में क्यों नहीं लगा सूतक काल

बाकी ग्रहण की तरह इस ग्रहण में सूतक नहीं लगा क्योंकि चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पूरी तरह से नहीं पड़ रही है। आमतौर पर देखा जाता है कि चंद्र या सूर्य ग्रहण होने के बारह घंटे पहले सूतक काल लगता है। सूतक काल में शुभ काम करना मना होता लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। ग्रहण काल के दौरान आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

2020 में लगेंगे कुल 4 चंद्र ग्रहण

इस साल 2020 में कुल 4 चंद्र ग्रहण लगने वाले हैं, जिसमें पहला चंद्र ग्रहण शुक्रवार को लगेगा। इसके अलावा इस वर्ष दो सूर्य ग्रहण लगेंगे।

साल 2020 में लगने वाले ग्रहण

- पहला ग्रहण: 10-11 जनवरी, चंद्र ग्रहण

- दूसरा ग्रहण: 5 जून, चंद्र ग्रहण

- तीसरा ग्रहण: 21 जून, सूर्य ग्रहण

- चौथा ग्रहण: 5 जुलाई, चंद्र ग्रहण

- पांचवा ग्रहण: 30 नवंबर, चंद्र ग्रहण

- छठा ग्रहण: 14 दिसंबर, सूर्य ग्रहण

कैसे लगता है चंद्र ग्रहण

जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है और अपने उपग्रह चंद्रमा को अपनी छाया से ढक लेती है तब चंद्र ग्रहण लगता है।

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