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    शहरों में आर्थिक विकास परिषद के गठन के लिए केंद्र सरकार गंभीर, समिति के प्रमुख से फिर से मिलेंगी वित्त मंत्री

    शहरी सुधार से संबंधित केंद्र सरकार की उच्च समिति की अंतिम रिपोर्ट मिल जाने के बाद वित्त मंत्रालय ने उस पर अमल की तैयारी शुरू कर दी है। खासकर सभी शहरों में आर्थिक विकास परिषद के गठन के सुझाव को लेकर वित्त मंत्रालय ने गंभीरता दिखाई है। यह बैठक अगले माह हो सकती है। समिति में शहरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिटी इकोनमिक डेवलपमेंट काउंसिल का सुझाव दिया गया।

    By manish tiwari Edited By: Prince Gourh Updated: Sun, 27 Apr 2025 08:36 PM (IST)
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    केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (फाइल फोटो)

    मनीष तिवारी, नई दिल्ली। शहरी सुधार से संबंधित केंद्र सरकार की उच्च समिति की अंतिम रिपोर्ट मिल जाने के बाद वित्त मंत्रालय ने उस पर अमल की तैयारी शुरू कर दी है। खासकर सभी शहरों में आर्थिक विकास परिषद के गठन के सुझाव को लेकर वित्त मंत्रालय ने गंभीरता दिखाई है।

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    इस सिलसिले में और अधिक स्पष्टता तथा चर्चा के लिए समिति के साथ एक और बैठक बुलाई है। गौरतलब है कि समिति के अध्यक्ष केशव वर्मा ने पिछले सप्ताह पिछले सप्ताह अपनी रिपोर्ट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंप दी।

    अगले माह हो सकती है बैठक

    यह बैठक अगले माह हो सकती है। सूत्रों के अनुसार इस समिति में शहरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनमें सिटी इकोनमिक डेवलपमेंट काउंसिल का सुझाव दिया गया है। यह काउंसिल शहर के आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास की रूपरेखा तय करेगी।

    इसमें प्रशासकों के अतिरिक्त शहर के प्रमुख व्यवसायी, तकनीकी और पर्यावरण विशेषज्ञों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है। इस काउंसिल से यह अपेक्षा की गई है कि वह शहर की जरूरतों और स्थितियों को देखते हुए समाधान की अपनी रूपरेखा प्रस्तुत करे।

    समिति ने शहरों के ब्राउनफील्ड डेवलपमेंट को सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण माना है यानी शहर दशकों की अनदेखी और अनियोजित विकास के कारण जिस तरह अपने मूल स्वरूप में बिगड़ चुके हैं, उसमें विकास कार्यों की गुंजाइश बहुत कम रह गई है।

    'घर से ऑफिस और ऑफिस से घर आने में लगे सिर्फ 15 मिनट'

    समिति ने शहरों को इससे निपटने के लिए अधिक प्रोत्साहन राशि देने का सुझाव दिया है। उसका कहना है कि अधिकांश शहरों में कारोबारी गतिविधियां शहरों के मध्य भाग में केंद्रित हैं, लेकिन आबादी का विस्तार बाहरी इलाकों में होता जा रहा है।

    इसके चलते लोगों को काम के सिलसिले में आने-जाने के लिए लंबा समय गुजारना पड़ता है। अगर कार्यस्थल के आसपास के आवासीय ढांचे को दुरुस्त किया जा सके तो शहरों की भीड़भाड़ को कम किया जा सकता है। इसके लिए 15 मिनट के कांसेप्ट का सुझाव दिया गया है। यानी लोगों को कार्यस्थल और घर तक आने-जाने के लिए केवल 15 मिनट का समय लगे।