नई दिल्ली, प्रेट्र। केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उच्च न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया के दौरान सरकार को भेजी गई सिफारिश को मंजूरी देने में उसे औसतन 127 दिन लगते हैं, जबकि शीर्ष अदालत कोलेजियम को इसके लिए 119 दिन लगते हैं।

कई हाई कोर्ट ने 199 जजों की नियुक्ति के लिए नाम तक नहीं भेजे

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ को बताया कि देशभर के हाई कोर्ट ने 396 रिक्तियों में से 199 के लिए न्यायाधीशों की नियुक्ति के वास्ते नामों की सिफारिश तक नहीं की है। वेणुगोपाल की दलीलों को ध्यान में रखते हुए, शीर्ष अदालत ने सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से रिक्तियों की आज तक की मौजूदा स्थिति और भविष्य में उत्पन्न होने वाली रिक्तियों के बारे में जानकारी मांगी है।

केंद्र ने कहा, कोलेजियम नामों को मंजूरी देने में लगाता है 119 दिन

वेणुगोपाल ने कहा, 'आइबी (खुफिया ब्यूरो) सूचनाएं प्राप्त करने के बाद सरकार द्वारा लिए गए दिनों की संख्या 127 है। कोलेजियम द्वारा लिए जाने वाले दिनों की संख्या 119 हैं।' जब पीठ ने आइबी की रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद सरकार द्वारा लिए गए दिनों की संख्या का उल्लेख किया, तो वेणुगोपाल ने कहा, 'मान लीजिए कि एक प्रतिकूल आइबी रिपोर्ट है, तो हमें इसे सत्यापित करना होगा। हम इसे आंख बंद करके आगे नहीं बढ़ा सकते हैं। सिफारिश किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम द्वारा लिए गए दिनों की संख्या देखें।'

न्यायाधीशों की नियुक्ति के पहलू पर दो सुझाव

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति के पहलू पर दो सुझाव हैं। पीठ ने कहा, 'पहला यह देखना है कि यह समय अवधि सभी चरणों में कैसे कम हो और दूसरा यह है कि यदि इसमें बहुत अधिक समय लग रहा है, तो छह महीने पहले नामों की सिफारिश करने के बजाय इसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।'

कानून के तहत हाथ बंधे हुए हैं

पीठ ने कहा, 'जब सुप्रीम कोर्ट का कोलेजियम किसी नाम को दोबारा भेजता है, तो आप इसे कैसे लंबित रख सकते हें? क्योंकि कानून के तहत आप इससे बंधे हुए हैं।'

कुछ उच्च न्यायालयों को जजों की रिक्तियों की जानकारी देने में पांच साल तक लग जाते हैं

वेणुगोपाल ने कहा कि बंबई, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे कुछ उच्च न्यायालय हैं जिन्हें रिक्तियों की जानकारी देने में लगभग पांच साल लगते हैं। उन्होंने कहा, 'सभी उच्च न्यायालयों को नोटिस जारी करें और उनसे पूछें कि यह देरी क्यों? तभी सभी चीजें व्यवस्थित होगी। इसमें सरकार के कुछ नहीं करने का सवाल ही कहां है?'

जज नियुक्ति की सिफारिश के बाद शिकायतें दायर होने लगती हैं, अगली सुनवाई 21 मार्च को

पीठ ने टिप्पणी की कि जब एक बार किसी व्यक्ति की न्यायाधीश के पद पर नियुक्ति की सिफारिश की जाती है तो उसके खिलाफ शिकायतें दायर होने लगती हैं। मामले पर अब अगली सुनवाई 21 मार्च को होगी।

Posted By: Bhupendra Singh

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