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    खजाना बढ़ाने में जुटे विपक्ष शासित राज्यों पर केंद्र की वाह-वाह, वित्तीय प्रबंधन का मुरीद हुआ वित्त मंत्रालय

    केरल आंध्र प्रदेश तेलंगाना के वित्तीय प्रबंधन का मुरीद हुआ वित्त मंत्रालय। उत्तरप्रदेश की आबकारी नीति से अधिक राजस्व जुटाने की खास तौर पर हुई तारीफ असम की भी प्रशंसा। वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में राज्यों के बढ़ते कर्ज को लेकर कुछ नहीं कहा गया है।

    By AgencyEdited By: Shashank MishraUpdated: Tue, 25 Apr 2023 10:31 PM (IST)
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    वित्त मंत्रालय की तरफ रिपोर्ट RBI की तरफ से राज्यों की माली हालात पर जारी रिपोर्ट के बाद आई है।

    नई दिल्ली, जयप्रकाश रंजन। पीएम नरेन्द्र मोदी पिछले दो दिनों से केरल में अपनी पार्टी की संभावनाओं को मजबूत बनाने में जुटे हैं तब वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी एक रिपोर्ट में केरल के आर्थिक प्रबंधन को लेकर राज्य सरकार की पीठ थपथपाई गई है।

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    वैसे कुछ दूसरे विपक्ष शासित राज्यों मसलन तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना ने भी हाल के दिनों में जिस तरह से राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए कदम उठाये हैं उसकी केंद्र सरकार ने भूरि-भूरि प्रशंसा की है लेकिन केरल का आर्थिक प्रबंधन ज्यादा पसंद किया गया है।

    विपक्षी दल शासित राज्यों का आर्थिक प्रबंधन ज्यादा बेहतर

    मंगलवार को वित्त मंत्रालय की मासिक रिपोर्ट में भाजपा शासित राज्यों के मुकाबले विपक्षी दल शासित राज्यों का आर्थिक प्रबंधन ज्यादा बेहतर नजर आ रहा है और तारीफ की असल वजह भी यहीं है। वैसे भाजपा शासित राज्यों मे केरल और नई आबकारी नीति से ज्यादा राजस्व वसूलने की यूपी सरकार की कोशिशों की भी प्रशंसा की गई है।

    वित्त मंत्रालय की तरफ यह रिपोर्ट आरबीआइ की तरफ से राज्यों की माली हालात व इन पर बढ़ते कर्ज पर जारी एक रिपोर्ट के बाद आई है। आरबीआइ की रिपोर्ट में बढ़ते कर्ज को एक बड़ी चुनौती के तौर पर पेश किया गया है। वैसे वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में राज्यों के बढ़ते कर्ज को लेकर कुछ नहीं कहा गया है। इसमें यह बताया गया है कि वर्ष 2022-23 में अधिकांश राज्यों की वित्तीय सेहत पहले से बेहतर हुई है।

    असम ने बकाये के भुगतान के लिए लिक्विडेशन स्कीम लांच किया

    राजस्व की स्थिति बेहतर होने से इनके राजकोषीय घाटे की स्थिति सुधर रही है। यह सुधार आगे भी जारी रहने की संभावना है। ज्यादातर राज्यों ने वर्ष 2023-24 में अपने राजकोषीय घाटे को 3 से 3.5 फीसद के बीच रखने का लक्ष्य रखा है जो इस साल के वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के आम बजट के मुताबिक ही हैं।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल, 2022 से फरवरी, 2023 के दौरान राज्यों का कुल राजस्व पूरे साल के लक्ष्य का 80.1 फीसद रहा है। इसके लिए बेहतर होता हुआ आर्थिक माहौल के साथ ही राज्यों की तरफ से राजस्व संग्रह के लिए उठाये गये कई सारे कदम भी जिम्मेदार हैं।

    असम ने बकाये के भुगतान के लिए लिक्विडेशन स्कीम लांच किया है, हरियाणा सरकार ने बकाया वैट भुगतान के लिए एकमुश्त भुगतान योजना लांच की है, केरल व असम ने ग्रीन टैक्स लगाया है, उत्तर प्रदेश ने बढ़ी हुई फीस के साथ नई आबकारी नीति लागू की है। रिपोर्ट ने उन राज्यों की खास तौर पर तारीफ की है जिन्होंने समय रहते वर्ष 2023 में बिजली की दरों को बढ़ाने का फैसला किया है।

    तमिलनाडु, तेलंगाना व केरल की खास तौर पर तारीफ की गई

    विपक्ष शासित तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल के साथ ही असम, कर्नाटक, मध्य प्रदेश व हरियाणा की तारीफ की गई है। बाद में रिपोर्ट में तमिलनाडु, तेलंगाना व केरल की खास तौर पर तारीफ की गई है जिन्होंने प्रोपर्टी टैक्स को बढ़ा कर अपनी खजाने की सेहत सुधारने की कोशिश की है।