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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 03, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

CBI Searches In WB: पश्चिम बंगाल में CBI ने 8 स्थानों पर चलाया सर्च ऑपरेशन, जाली दस्तावेजों पर CAPF भर्ती से जुड़ा है मामला

Published: Sat, 03 Feb 2024 02:59 PM (IST)

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की भर्ती में सीमावर्ती क्षेत्र के निवासियों को लाभ लेने के लिए अधिवास दस्तावेजों के कथित ...और पढ़ें

CBI Searches In WB: पश्चिम बंगाल में CBI ने 8 स्थानों पर चलाया सर्च ऑपरेशन
CBI Searches In WB: पश्चिम बंगाल में CBI ने 8 स्थानों पर चलाया सर्च ऑपरेशन

पीटीआई, नई दिल्ली। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की भर्ती में सीमावर्ती क्षेत्र के निवासियों को लाभ लेने के लिए अधिवास दस्तावेजों के कथित जाली उपयोग को लेकर शनिवार को सीबीआई ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता और 24 उत्तरी परगना जिले में आठ स्थानों पर तलाशी ली। इसकी जानकारी अधिकारियों ने दी।

कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश पर पिछले अगस्त में सीबीआई ने इन आरोपों की जांच करने के लिए जांच अपने हाथ में ली थी कि कई उम्मीदवारों को जाली अधिवास प्रमाणपत्रों के माध्यम से सशस्त्र बलों और सीएपीएफ में अवैध रूप से भर्ती किया गया था, कथित तौर पर उन्हें सीमावर्ती क्षेत्रों से दिखाया गया था और इस प्रकार कम कट-ऑफ अंक पर प्रवेश किया गया था।

एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि कुछ पाकिस्तानी नागरिकों को भी फायदा हुआ था। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को छापेमारी रैकेट चलाने वालों के परिसरों पर की गई, जो कथित तौर पर जाली अधिवास प्रमाण पत्र बनाने में शामिल थे।

सीबीआई की प्रारंभिक जांच के निष्कर्षों से गुजरते हुए, न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता ने कहा था कि सशस्त्र बलों की भर्ती में कोई अनियमितता नहीं पाई गई, लेकिन केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में चार उदाहरण पाए गए।

न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता ने कहा, हालांकि, जहां तक केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में रोजगार का संबंध है, कुछ अनियमितताएं पहले ही पता चल चुकी हैं। प्रारंभिक जांच के दौरान, कम से कम चार ऐसे मामले सामने आए हैं।

उन्होंने कहा था कि सीमावर्ती राज्य होने के नाते पश्चिम बंगाल केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में रोजगार के लिए परीक्षाओं में कम कट-ऑफ अंक की अनुमति देता है।

न्यायमूर्ति सेनगुप्ता ने डिप्टी सॉलिसिटर जनरल की दलीलों का हवाला देते हुए कहा, ऐसा लगता है कि इसने अन्य राज्यों, विशेष रूप से देश के उत्तरी भाग के लोगों को यह दिखाने के लिए जाली दस्तावेज बनाने के लिए प्रेरित किया है कि वे पश्चिम बंगाल राज्य में रहते हैं।

उन्होंने कहा था, डोमिसाइल सर्टिफिकेट, मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट और जाति सर्टिफिकेट फर्जी बनाए गए हैं। यह अधिक गहन जांच का विषय होगा कि क्या विदेशी नागरिकों ने भी भारतीय बलों में नौकरियों के लिए आवेदन करने में इसी कार्यप्रणाली का सहारा लिया है।

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