नई दिल्ली, संदीप राजवाड़े। कोविड के बढ़ते मामलों से चीन, अमेरिका, फ्रांस, ब्राजील, जापान, स्पेन, कनाडा समेत कई देश इन दिनों परेशान हैं। लेकिन सबसे बुरी स्थिति चीन की है। वहां जीरो कोविड पॉलिसी कोरोना को नियंत्रित नहीं कर पाने का सबसे बड़ा कारण है। चीन में ओमिक्रॉन के सब वेरिएंट BA.5, BA.7 और XBB ने कहर बरपा रखा है। इनके संक्रमण से मौतें भी बढ़ी हैं। भारत में भी इनके केस मिले हैं, लेकिन यहां ये वेरिएंट उतने मारक नहीं हैं। दरअसल, कोविड के बाद विकसित हुई 98 फीसदी नेचुरल (हर्ड) इम्युनिटी भारतीयों के लिए कवच बन गई है। दूसरी ओर, चीन के 14 फीसदी लोगों में ही नेचुरल इम्युनिटी विकसित हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार वहां लंबे समय तक कोविड की स्थिति गंभीर बनी रह सकती है।

आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल ने 32 देशों के कोविड मामलों का आकलन किया है। उनके साथ आईसीएमआर और एम्स के डॉक्टरों का भी मानना है कि चीन में बढ़ रहे कोरोना से भारत को फिलहाल खतरा नहीं है। 2020 में जब कोरोना पहली बार फैला तब स्थिति अलग थी, लेकिन आज भारत में कोरोना के खिलाफ सिस्टम बहुत मजबूत हो गया है। हालांकि सभी विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में बजुर्गों और गंभीर बीमारी से ग्रस्त लोगों को सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। वायरस का हमला होने पर उनके लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

जहां इम्युनिटी कम वहां स्थिति गंभीर

कोविड के आंकड़ों का गणितीय सूत्रों से विश्लेषण करने वाले आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल ने बताया कि किसी भी व्यक्ति में इम्युनिटी सिस्टम दो तरह से विकसित होता है- नेचुरल इम्युनिटी और वैक्सीनेटेड इम्युनिटी। भारत में कोरोना फैलने के बाद लगभग 98 फीसदी लोगों में नेचुरल इम्युनिटी विकसित हो गई, जो अब उन्हें बचा रही है।

प्रो. अग्रवाल ने दुनिया की 50 फीसदी से ज्यादा आबादी वाले 32 देशों पर रिसर्च किया, जहां कोविड संक्रमण और मौत के मामले बढ़ रहे हैं। इन देशों में कोविड के मामले, वैक्सीनेशन और प्रतिरक्षा सिस्टम के आकलन में पाया गया कि जिन देशों में कोविड बढ़ा है, उनमें से अधिकतर देशों में नेचुरल इम्युनिटी 90 फीसदी से कम थी। चीन में तो यह 20 फीसदी से भी कम है। कुछ देशों में नेचुरल इम्युनिटी 90 फीसदी से ऊपर होने के बावजूद संक्रमण के मामले बढ़े हैं, लेकिन वहां मरीजों की स्थिति गंभीर नहीं हो रही है।

चीन की स्थिति सबसे कमजोर

प्रोफेसर अग्रवाल ने बताया कि सबसे कम हर्ड इम्युनिटी चीन की है। यह सिर्फ 14% है। यह चिली में 71%, फ्रांस में 77%, आस्ट्रेलिया में 78%, ग्रीस व इंडोनेशिया में 84%, जापान में 73%, केन्या में 73%, इटली में 76%, नीदरलैंड में 81%, कनाडा में 92%, ब्राजील 94%, अर्जेंटीना में 99%, बांग्लादेश में 99%, इक्वाडोर में 92%, इजिप्ट में 95%, एथिसिया में 97%, ईरान में 96%, मैक्सिको में 92%, नाइजीरिया में 95% और भारत में 98% है।

भारत में सामान्य फ्लू की तरह ही असर

भोपाल एम्स के निदेशक डॉ. अजय सिंह का कहना है कि हमें कोरोना को लेकर अब डरने की जरूरत नहीं है। चीन में जैसे हालात बने हैं, वैसे हमारे अब नहीं होंगे। इसकी सबसे बड़ी वजह वैक्सीनेशन और नेचुरल इम्युनिटी विकसित होना है। अधिकतर लोगों ने वैक्सीन की पूरी डोज लगाई है, जिससे इम्युनिटी बनी है। इसलिए ओमिक्रॉन के सब वैरिएंट का असर हमारे ऊपर पहले की तरह प्रभावी नहीं रहा। यहां छोटे-मोटे फ्लू के इंफेक्शन होते रहे हैं। आगे भी जो कोरोना से प्रभावित होंगे उन पर प्रभाव सामान्य फ्लू की तरह ही होगा।

आईसीएमआर की नजर, वेरिएंट का असर यहां सामान्य

आईसीएमआर के संचार व योजना इंचार्ज डॉ. रजनीकांत ने बताया कि चीन और कुछ अन्य देशों में कोविड के मामले बढ़े हैं, उन पर हमारी नजर है। लेकिन भारत में अभी चिंता करने की जरूरत नहीं है। जब पहली बार कोरोना आया था तो हमारी कोई तैयारी नहीं थी, लेकिन अब पूरा सिस्टम है। 3000 लैब के समेत हर चीज का सेटअप है। चीन में ओमिक्रॉन के सब वेरिएंट का असर गंभीर है, लेकिन इससे भारत में डरने की जरूरत नहीं है। पिछले महीने देश के कुछ राज्यों में इस वेरिएंट के मरीज मिले लेकिन वे जल्दी ही स्वस्थ हो गए। हमारे यहां बड़ी संख्या में वैक्सीनेशन होना और लोगों में स्ट्रांग इम्युनिटी डेवलप होना मुख्य फैक्टर हैं। अन्य देशों में कोविड के मामले क्यों बढ़ रहे हैं, इस पर निगरानी रखी जा रही है।

भारत में पिछले कुछ महीनों के दौरान ओमिक्रॉन सब वेरिएंट एक्सबीबी के मरीज 9 राज्यों में मिले थे। वे तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, ओडिशा व महाराष्ट्र में ज्यादा थे। गुजरात में ओमिक्रॉन के सब वेरिएंट BA.5 के मरीज मिले। इससे प्रभावित होने पर बदन दर्द, खरास व खांसी जैसे लक्षण होते हैं। इसी वेरिएंट से चीन, बेल्जियम, जर्मनी और फ्रांस में केस बढ़े थे। BA.7 वेरिएंट का असर भी चीन में बड़े स्तर पर दिखाई दिया। भारत में इन वरिएंट से पीड़ित लोग 3-4 दिन में ठीक हो जाते हैं।

रायपुर एम्स के डायरेक्टर डॉ. नितिन एम नागरकर का कहना है कि भारतीयों में मजबूत इम्युनिटी विकसित होने की बात कई रिसर्च में सामने आ चुकी है। यह जरूर है कि कोरोना गया नहीं है, न ही डब्ल्यूएचओ ने इसके खत्म होने की कोई सूचना दी है। यह बना रहेगा, लेकिन इसका असर जरूर उतना प्रभावी नहीं रहेगा। फिर भी हमें नियमित सावधानियों का ध्यान रखना होगा। रायपुर एम्स में पिछले हफ्ते तक कोविड के 3-4 मरीज आ रहे थे लेकिन उनमें गंभीर लक्षण नहीं थे। चीन में सरकार की पॉलिसी से हालात बिगड़े हैं।

सख्त लॉकडाउन हल नहीं

प्रोफेसर अग्रवाल के अनुसार चीन में जो सख्त लॉकडाउन लगाया गया, वह हल नहीं है। उसी से स्थिति बिगड़ी है। नेचुरल इम्युनिटी संक्रमित होने के बाद ही विकसित होती है। कोरोना से बचने का यही सबसे कारगर उपाय है। चीन में लंबे समय तक लोगों को घरों में बंद रखा जा रहा है, जिससे उनमें नेचुरल इन्युनिटी नहीं बन रही है। इसलिए जब वे बाहर निकलते हैं तो हवा में मौजूद कोरोना वायरस की चपेट में आ जाते हैं। चीन के अलावा फ्रांस, जापान, इटली जैसे देशों में भी नेचुरल इम्युनिटी कम है। वहां जीरो कोविड पॉलिसी जैसी सख्ती नहीं है, इसलिए वहां स्थिति जल्द ही सामान्य हो जाएगी। वहां इम्युनिटी स्तर 95-98 फीसदी तक पहुंचने पर कोरोना का असर घातक नहीं रहेगा।

वैक्सीनेशन में भारत, यूएस से बेहतर चीन, फिर भी बुरी स्थिति

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार चीन में कोविड वैक्सीनेशन का औसत भारत, अमेरिका, रूस से बेहतर है। यहां 100 लोगों की आबादी पर औसतन 235.4% डोज लगे हैं। भारत में यह 159.3%, अमेरिका में 192.9%, रूस में 124.0%, फ्रांस में 227.4%, ब्राजील में 229.8%, जर्मनी में 226.9%, यूके में 222.8%, स्पेन में 229.8% और कनाडा में 240.5% है। इसके बावजूद चीन की स्थिति सबसे गंभीर है। चीन से अच्छा वैक्सीनेसन औसत जापान (271.4%) और आस्ट्रेलिया (251.5%) का है।

2022 में चीन-अमेरिका में कोविड से मौत ज्यादा

चीन में 2022 के दौरान कोरोना के केस थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार इस साल के शुरूआत में 03 जनवरी को 1601 केस आए थे। इसके बाद 23 मई को एक ही दिन में सबसे ज्यादा 5,76,367 मरीज मिले। 3 अक्टूबर को 3,33,830 और 21 नवंबर को 1,05419 केस आए। यहां कोरोना मरीजों की मौत की संख्या भी बढ़ी है। 7 फरवरी को कोविड से 6 मौत हुई। इसके बाद 7 मार्च को इस साल सबसे ज्यादा 1955 मौत हुई। पिछले दो माह में 31 अक्टूबर को 539, 14 नवंबर को 476 और 21 नवंबर को 284 कोविड मरीजों की जान गई।

अमेरिका में भी 2022 के दौरान कोविड केस व मौत की संख्या लगातार बनी हुई है। इस साल तीन जनवरी को अमेरिका में 46,82897 मरीज आए। इसके बाद 23 मई को इस साल सबसे ज्यादा 7,40720 मामले मिले। पिछले दो-तीन माह के दौरान 17 अक्टूबर को 3,14006 और 14 नवंबर को 2,74067 केस सामने आए। इसके साथ 31 जनवरी को कोविड से 18,654 मौत हुई। जबकि हाल ही में 17 अक्टूबर को 3158 और 14 नवंबर को 2202 कोविड मरीजों की जान गई।

हार्ट, किडनी, कैंसर, लीवर के मरीज ज्यादा ध्यान दें

भारत में ओमिक्रॉन के नए सब वेरिएंट भले चीन जैसे मारक न हों, लेकिन उनसे सावधान रहने की जरूरत है। रायपुर एम्स के डॉ. नागरकर ने बताया कि हार्ट, किडनी, लीवर, कैंसर और एचआईवी पीड़ित मरीजों को विशेष ध्यान रखना चाहिए। उनमें इम्युनिटी कमजोर होती है, इससे वे प्रभावित हो सकते हैं।

एम्स भोपाल के निदेशक डॉ. सिंह ने भी बताया कि कुछ सावधानियों का हमें नियमित रूप से पालन करना होगा। भीड़ भाड़ वाले एरिया में मास्क पहनने के साथ हाथ धोना और इंफेक्शन होने पर उसकी जांच कराते रहना होगा। जिन्होंने दूसरी डोज या बूस्टर नहीं लगाई है, उन्हें लगा लेना चाहिए। अन्य बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को ज्यादा सतर्क रहना होगा।

आईसीएमआर के डॉ. रजनीकांत ने बताया कि उम्रदराज लोग जिन्हें कोई दूसरी बीमारी है, उन्हें एक्स्ट्रा केयर करने की जरूरत है। चीन में बढ़ते कोरोना के मामलों को लेकर अभी हमारी तरफ से कोई अलर्ट नहीं जारी किया जा रहा है। भारत में स्थिति सामान्य है। पूरे देश में हल्के लक्षण वाले कोविड के रोज 200-300 के आसपास ही मरीज आ रहे हैं।

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