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    'बेहतर नौकरी की तलाश बुनियादी अधिकार', कलकत्ता HC की कंपनी को फटकार

    Updated: Sun, 31 Aug 2025 02:00 AM (IST)

    कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा है कि बेहतर नौकरी खोजना व्यक्ति का अधिकार है भले ही वह प्रतिद्वंद्वी कंपनी में हो। कोर्ट ने एक कंपनी द्वारा कर्मचारी को बकाया राशि का भुगतान न करने को न्याय के खिलाफ बताया। जस्टिस शंपा दत्त पाल ने एक इंसुलेटर फिल्म निर्माता कंपनी के आदेश को रद्द करते हुए कर्मचारी को 1.37 लाख रुपये ग्रेच्युटी देने का निर्देश दिया।

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    कलकत्ता HC की कंपनी को फटकार (फाइल फोटो)

    राज्य ब्यूरो, जागरण, कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा है कि बेहतर सुविधाओं वाली दूसरी नौकरी ढूंढना व्यक्ति का एक बुनियादी अधिकार है और भले ही वह प्रतिद्वंद्वी कंपनी में ही क्यों न ज्वाइन करे, इसे नैतिक पतन नहीं माना जा सकता।

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    कोर्ट ने कहा कि किसी कंपनी द्वारा इस आधार पर कर्मचारी को बकाया राशि का भुगतान न करना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।एक इंसुलेटर फिल्म निर्माता कंपनी के अनुशासनात्मक आदेश और दंड को रद करते हुए हाई कोर्ट की जस्टिस शंपा दत्त पाल ने कर्मचारी को आठ प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से साधारण ब्याज सहित 1.37 लाख रुपये की ग्रेच्युटी राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया।

    नहीं पेश हुआ कोई गवाह

    जस्टिस दत्त ने कहा कि याचिकाकर्ता कंपनी अपने इस आरोप को पुष्ट करने के लिए न तो कोई गवाह पेश कर सकी और न ही कोई कॉल रिकार्ड दिखा सकी कि प्रतिवादी एक प्रतिद्वंद्वी कंपनी के संपर्क में था।

    अदालत ने कंपनी को लगाई फटकार

    अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता कंपनी यह भी साबित नहीं कर सकी कि उसें कोई नुकसान हुआ। कोर्ट में यह याचिका अपीलीय प्राधिकारी द्वारा पारित आदेशों के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें कंपनी में तकनीशियन के रूप में कार्यरत सुदीप सामंत को ग्रेच्युटी देय राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। जांच अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर 2012 में कंपनी में शामिल हुए तकनीशियन को 11 अक्टूबर, 2022 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।

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