नई दिल्ली, एजेंसी: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की बैठक में झपकी लेना बीएसएनएल के एक वरिष्ठ अधिकारी को भारी पड़ गया। उसे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने पर मजबूर होना पड़ा है। सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम के लिए 1.64 लाख करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी देने के बाद हुई वैष्णव की बैठक में अधिकारी ने झपकी ली थी। उन्होंने अगस्त के पहले सप्ताह में अखिल भारतीय मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) स्तर की बैठक में बीएसएनएल कर्मचारियों से बेहतरीन प्रदर्शन करने और दो साल में इसे आगे ले जाने या फिर वीआरएस का विकल्प चुनने को कहा था।

बताया गया है कि बैठक में मंत्री ने एक सीजीएम को झपकी लेते हुए पकड़ा और उन्हें तुरंत कमरे से निकलकर वीआरएस लेने को कहा था। बुधवार को उनके वीआरएस को मंजूरी दे दी गई। अधिकारी बेंगलुरु में सीजीएम के पद पर कार्यरत थे। इस संबंध में दूरसंचार मंत्रालय और बीएसएनएल ने कोई जवाब नहीं दिया है। बैठक में वैष्णव ने कहा था कि जो लोग काम नहीं कर सकते वे वीआरएस ले सकते हैं और घर पर आराम कर सकते हैं और अगर ऐसे अधिकारियों को वीआरएस लेने में कोई हिचकिचाहट है तो सरकार अनिवार्य सेवानिवृत्ति नियम लागू कर सकती है जैसा कि रेलवे में किया गया है।

मंत्री ने कहा था कि सरकार ने कंपनी के लिए 1.64 लाख करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी है और अब संगठन को बहुत मजबूत बनाने की जिम्मेदारी सभी पर है। 2019 में लगभग 69,000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज के बाद बीएसएनएल के लिए यह तीसरी बड़ी वित्तीय सहायता है। इसके बाद 4जी कैपेक्स के लिए वित्तीय सहायता दी गई। वित्तीय सहायता के अलावा, सरकार ने बीएसएनएल के साथ भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड का भी विलय कर दिया है, जो ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ रहा है।                                

Edited By: Amit Singh

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