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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 08, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

वोट मांगने पहुंचे भाजपा उम्मीदवार तो जनता ने जूतों की माला पहनाकर किया स्वागत

By Sanjeev TiwariEdited By:
Published: Mon, 08 Jan 2018 08:33 AM (IST)Updated: Mon, 08 Jan 2018 01:08 PM (IST)

कार्यकर्ताओं ने बाद में चप्पल-जूतों का हार निकालकर फेंक दिया। इस प्रकार के विरोध को शर्मा ने बड़ों का आशीर्वाद बताया।

वोट मांगने पहुंचे भाजपा उम्मीदवार तो जनता ने जूतों की माला पहनाकर किया स्वागत
वोट मांगने पहुंचे भाजपा उम्मीदवार तो जनता ने जूतों की माला पहनाकर किया स्वागत

धामनोद(जेएनएन)। मध्यप्रदेश के धार जिले के धामनोद  में निकाय चुनाव के लिए वोट मांगने निकले प्रत्याशी को लोगों ने जूतों की माला पहना दी।  भाजपा प्रत्याशी दिनेश शर्मा को जनसंपर्क के दौरान वार्ड क्रमांक 1 में विरोध का सामना करना पड़ा। गुलझरा के एक बुजुर्ग ने पिछली परिषद के दौरान बिगड़ी जल वितरण व्यवस्था व महिलाओं पर प्रकरण दर्ज कराने को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए शर्मा के गले में चप्पल-जूतों का हार पहना दिया। हालांकि उनके साथ चल रहे कार्यकर्ताओं ने बाद में चप्पल-जूतों का हार निकालकर फेंक दिया। इस प्रकार के विरोध को शर्मा ने बड़ों का आशीर्वाद बताया।

दरअसल, भाजपा के अध्यक्ष प्रत्याशी दिनेश शर्मा रविवार को कार्यकर्ताओं के साथ अलबेला हनुमान मंदिर से भ्रमण पर निकले थे। वे गुलझरा पहुंचे, जहां कुछ लोगों द्वारा उनका फूलों का हार पहनाकर स्वागत किया जा रहा था, तभी एक बुजुर्ग परसराम ने शर्मा को एकाएक जूते-चप्पल से बना हार पहना दिया। इससे सारे कार्यकर्ता आश्चर्यचकित रह गए। साथ चल रहे कार्यकर्ताओं ने बाद में जूते-चप्पल के हार को शर्मा के गले से उतारा।

 

महिलाओं पर प्रकरण दर्ज होने से नाराज थे

मामले में बुजुर्ग परसराम ने बताया कि पानी की समस्या को महिलाएं नगर परिषद की पूर्व अध्यक्ष के निवास गई थी। इस पर उनकी पत्नी सहित अन्य महिलाओं के खिलाफ प्रकरण दर्ज करवाया था। ऐसे में महिलाओं को रात 11 बजे धरमपुरी थाने जाना पड़ा था। इससे परसराम नाराज थे। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने शर्मा को जूते-चप्पल का हार पहनाया।

 विरोध नहीं, आशीर्वाद दिया

इस मामले में शर्मा ने उनके इस विरोध को भी आशीर्वाद बताया। शर्मा ने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं करना चहिए था, किंतु उनके मन की पीड़ा थी। आने वाले समय में इस प्रकार का विरोध नहीं होगा। ऐसे प्रयास किए जाएंगे।