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    बॉर्डर पर तैनात होने जा रहा पाकिस्तान का काल 'भैरव', ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने बदली रणनीति

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 10:56 PM (IST)

    भारतीय सेना पूर्वी और पश्चिमी सीमाओं पर चीन और पाकिस्तान की चुनौतियों से निपटने के लिए भैरव कमांडो की विशेष बटालियनों का गठन तेजी से कर रही है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के अनुसार अगले दो-तीन महीनों में ये कमांडो अग्रिम मोर्चे पर तैनात हो जाएंगे। प्रत्येक बटालियन में 250 सैनिक होंगे जिन्हें विशेष प्रशिक्षण और आधुनिक हथियार मिलेंगे। सेना का लक्ष्य नवंबर तक पांच बटालियन बनाने का है।

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    पाकिस्तान और चीन की सीमा पर तैनात होंगे भैरव कमांडो।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। देश की पूर्वी और पश्चिमी सीमाओं पर चीन तथा पाकिस्तान की दोहरी सामरिक चुनौतियों का प्रभावी मुकाबला करने के लिए भैरव कमांडो के कुछ विशेष बटालियनों के गठन की गति भारतीय सेना ने तेज कर दी है।

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    सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की घोषणा के अनुरूप अगले दो-तीन महीने के भीतर इन दोनों सीमाओं के संवेदनशील अग्रिम मोर्चे पर भैरव कमांडो दुश्मन की गतिविधियों को भांपते हुए जवाबी जमीनी एक्शन के लिए पूरी तरह मुस्तैद रहेंगे।

    बटालियन में रहेंगे 250 सैनिक

    भैरव कमांडो भारतीय सेना के सबसे एलिट विशेष कमांडो बटालियन के बाद दूसरा विशेष दस्ता होगा। वस्तुत: सेना के सामान्य दस्ते और स्पेशल पारा कमांडो दस्ते के बीच भैरव कमांडो रणनीतिक सेतु की भूमिका निभाएंगे। सेना के नवगठित हो रहे प्रत्येक भैरव कमांडो बटालियन में 250 सैनिक रहेंगे।

    सूत्रों ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि विशेष पारा कमांडों फोर्स की तर्ज पर ही भैरव कमांडो के लिए चुने गए सैनिकों का विशेष प्रशिक्षण शुरू हो चुका है। इन सैनिकों को विशेष प्रशिक्षण के बाद आधुनिक उपकरण और हथियार दिए जाएंगे।

    क्या है भारतीय सेना का टारगेट?

    साझा की गई जानकारी के अनुसार, फिलहाल सेना पांच भैरव कमांडो बटालियन का गठन करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। सेना का लक्ष्य नवंबर के प्रारंभ तक इन भैरव कमांडो बटालियन का गठन कर देने की है। सेना प्रमुख ने करीब दो महीने पहले सीमा पर उभरी नई चुनौतियों के मद्देनजर खास निगरानी और जवाबी रणनीति को मजबूत करने के लिए कई घोषणाएं की थी। इसमें रुद्र, भैरव, शक्तिबान, दिव्यास्त्र जैसी नई संरचनाओं को शामिल करने का सेना प्रमुख ने एलान किया था। मोर्चे पर तैनाती बढ़ाने और इसके लिए दस्ते के गठन की सेना की रणनीति के तहत यह पहल की जा रही है।

    किन जगहों पर होगी भैरव कमांडो की तैनाती?

    सूत्रों के अनुसार, भैरव कमांडो के तीन बटालियन की उत्तरी सीमा पर तैनात की जाएगी। जबकि, बाकी दो पूर्वोत्तर और पश्चिमी सीमाओं पर तैनात होंगी। साफ है कि सेना पूर्वी लद्दाख में सीमा पर चीन के साथ बीते वर्षों में हुए सैन्य टकराव और अतिक्रमण के उसके प्रयासों के अनुभव को देखते हुए चौकसी ही नहीं जवाबी कार्रवाई क्षमता में कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती।

    दी जा रही है स्पेशल ट्रेनिंग

    भैरव कमांडो का चयन सेना के वर्तमान सामान्य सैनिकों में से ही किया गया है। चयन के बाद शुरुआत में इन्हें दो-तीन महीने तक उनके रेजिमेंटल सेंटर्स पर विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा। इसके बाद संबंधित थिएटर की स्पेशल फोर्सेज के साथ एक माह के एडवांस्ड ट्रेनिंग के लिए उन्हें भेजा जाएगा।

    भैरव कमांडो की होगी खास जिम्मेदारियां

    भैरव कमांडो की मुख्य जिम्मेदारी होगी दुश्मन की हलचल की गहन जांच (रेकी) करना, विरोधी सेनाओं के इरादों को बाधित करना, सीमा पार कार्रवाई को अंजाम देना। भैरव कमांडों के इन जिम्मदारियों के निभाने के बाद सेना को अपने पारा-स्पेशल कमांडो बटालियनों को उच्च प्राथमिकता वाले मिशनों पर खास ध्यान देने में मदद मिलेगी।

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने बदली रणनीति 

    फिलहाल भारतीय सेना के पास 10 पारा-स्पेशल फोर्सेज और पांच पारा (एयरबोर्न) बटालियन हैं। भैरव कमांडो इन्हीं का पूरक बनेंगे और इनकी क्षमता को और मजबूती देंगे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ड्रोन की लड़ाई में बढ़ी भूमिका को देखते हुए सेना ड्रोन युद्ध क्षेत्र की तैयारी में भी जुट गई है। अब हर पैदल सेना बटालियन में ड्रोन प्लाटून शामिल किए जा रहे हैं। वहीं, सेना की एयर डिफेंस प्रणाली को स्वदेशी मिसाइल प्रणाली से लैस किया जा रहा है।

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