₹48000 करोड़ के फ्रॉड में 8 प्रतिशत 'घर के भेदी': 400 से ज्यादा मामलों में बैंक कर्मचारियों की ही निकली मिलीभगत
पंजाब नेशनल बैंक की ग्रेटर नोएडा शाखा में 35 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जो बैंक कर्मचारियों द्वारा किए गए घोटालों का एक उदाहरण है।

पीएनबी ग्रेटर नोएडा में 35 करोड़ का बैंक फ्रॉड (AI जेनेरेटेड)

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जयप्रकाश रंजन, जागरण। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की एक शाखा के कर्मचारियों की तरफ से किये गये 35 करोड़ रुपये के फ्रॉड का मामला सामने आया है। बैंक ऑफ इंडिया (अहमदाबाद) में 127 खातों से 16.10 करोड़ रुपये निकालने के आरोप में स्टाफ आफिसर को ही ईडी ने गिरफ्तार किया गया है।
पिछले साल ग्रेटर चेन्नई पुलिस की बैंक फ्रॉड विंग ने 18 फ्रॉड के मामलों में 49 बैंक कर्मचारियों को एक साथ गिरफ्तार किया। इनके निशाने पर एनआरआई ग्राहक थे। कोटा में एक बडे़ निजी बैंक के रिलेशनशिप प्रबंधक ने 41 ग्राहकों के 110 खातों से 4.58 करोड़ रुपये निकाल लिये।
पीएनबी ग्रेटर नोएडा में 35 करोड़ का बैंक फ्रॉड
कानपुर स्थित एक सरकारी बैंक में भी पुलिस ने इसी तरह के फ्रॉड का खुलासा किया है। दिल्ली में सीएसबी बैंक में शाखा प्रबंधक के साथ ही अन्य स्टाफ को गिरफ्तार किया गया है कि वो दिहाड़ी मजदूरों के दस्तावेज से तैयार म्यूल एकाउंट बना कर उसके जरिए पैसे का अवैध लेन-देन कर रहे थे।
बैंकों में उनके ही कर्मचारियों की तरफ से हर साल किये जाने वाले सैकड़ों फ्रॉड में ये सिर्फ गिने-चुने मामलों हैं जो हाल के दिनों में सुर्खियां में आये हैं। आरबीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय बैंकों ने कुल 48,021 करोड़ रुपये के फ्रॉड को रिपोर्ट किया था। इसमें हर तरह के फ्रॉड हैं।
अब तक कुल कितने का फ्रॉड?
अप्रैल, 2026 में राज्यसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा दिए गए जवाब (आरबीआई के डेटा पर आधारित) के अनुसार, कर्मचारियों की मिली-भगत से किये गये फ्रॉड वाले मामलों की संख्या घट रही है लेकिन अभी भी यह कुल फ्रॉड में आठ फीसद तक हिस्सा रखते हैं। समस्या खत्म नहीं हुई है।
'वित्त वर्ष 2020-21 में ऐसे 2,624 मामले दर्ज हुए थे, जो वित्त वर्ष 2024-25 में घटकर 1,935 रह गए। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (सितंबर 2025 तक) में यह संख्या 400 थी। कुल फ्रॉड मामलों की तुलना में यह लगभग आठ फीसद के आसपास है, लेकिन राशि के हिसाब से इनका प्रभाव कहीं ज्यादा हो सकता है।'
यह तब है जब बैंकों की तरफ से इस तरह के कई मामलों को दबाने का भी प्रयास किया जाता है क्योंकि इससे साख पर असर पड़ता है। बैंकों में फ्रॉड का बड़ा खतरा बाहर से नहीं अंदर से आता है।
आंतरिक धोखाधड़ी बैंकिंग सिस्टम की समस्या
ग्रेटर नोएडा शाखा में सामने आई गड़बड़ी पर पीएनबी बैंक प्रबंधन ने कहा है कि, 'कुछ ग्राहकों के सावधि जमा (एफडी) और बचत बैंक (एसबी) खातों से संबंधित कथित वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतों का गंभीरता से संज्ञान लिया है।
इस मामले की प्राथमिकता के आधार पर जांच की जा रही है तथा बैंक संबंधित अधिकारियों को पूर्ण सहयोग प्रदान कर रहा है और तथ्यों की पुष्टि करने, रिपोर्ट की गई विसंगतियों की सीमा का आकलन करने और प्रभावित ग्राहकों की चिंताओं का समाधान करने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।
इसके अतिरिक्त, कल तक 43 लाख रुपये की राशि से संबंधित तीन दावों का निपटान किया जा चुका है। बैंक अपने ग्राहकों को आश्वस्त करता है कि सभी वास्तविक एवं वैध दावों का भुगतान किया जाएगा।
अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा फ्रॉड
दोषियों के खिलाफ नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार कठोर कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया गया है। असलियत में भारतीय बैंकिंग सिस्टम में कर्मचारियों की मिलीभगत से होने वाले फ्रॉड एक पुरानी और गंभीर समस्या है, जिस पर अक्सर उतना ध्यान नहीं दिया जाता जितना डिजिटल फ्रॉड पर दिया जाता है।
आईआईएम (बेंगलुरू) के एक प्रोफेसर के एक अध्ययन में आरबीआई डेटा का हवाला देते हुए कहा गया है कि बैंकिंग सेक्टर में लगभग 34 प्रतिशत फ्रॉड आंतरिक होते हैं।
उक्त अध्ययन रिपोर्ट 2018 का नीरव मोदी-मेहुल चौकसी घोटाले की खुलासे के बाद आया था। उक्त दोनों रत्न व आभूषण उद्योगपतियों ने करीब 14000 करोड़ रुपये का घोटाला बैंक के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से की थी।
उसके बाद आरबीआई ने स्टाफ को ट्रांसफर करने, एक अंतराल के बाद छुट्टी पर जाने, खतरे को पहले पहचनाने की व्यवस्था लागू करने और स्टाफ एकाउंटेबिलिटी को मजबूत करने के निर्देश जारी किए हैं, लेकिन ग्रेटर नोएडा जैसा मामला दिखाता है कि जमीनी स्तर पर नियंत्रण अभी
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