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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 28, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Ban on PFI: केंद्र सरकार ने पूरी तैयारी के साथ कसा PFI पर शिकंजा, क्‍या हैं इस प्रतिबंध के मायने..?

By Krishna Bihari SinghEdited By:
Published: Wed, 28 Sep 2022 06:33 PM (IST)Updated: Wed, 28 Sep 2022 11:42 PM (IST)

केंद्र सरकार ने PFI एवं उससे संबद्ध कई अन्य संगठनों पर पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया है। PFI पर ...और पढ़ें

केंद्र सरकार ने PFI एवं उससे संबद्ध कई अन्य संगठनों पर पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया है।
केंद्र सरकार ने PFI एवं उससे संबद्ध कई अन्य संगठनों पर पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया है।

नई दिल्‍ली, आनलाइन डेस्‍क। केंद्र सरकार ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (Popular Front of India, PFI) एवं उससे संबद्ध कई अन्य संगठनों पर पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया है। PFI पर आतंकी गतिविधियों में लिप्‍त रहने और ISI जैसे आतंकी संगठनों से 'संबंध' होने जैसे गंभीर आरोपों के चलते सरकार ने उक्‍त कदम उठाए हैं। ऐसा नहीं है कि सरकार ने अचानक यह फैसला लिया है। केंद्रीय जांच एजेंसियां पीएफआइ की कथित देश विरोधी गतिविधियों को लेकर सरकार को बार-बार आगाह कर रही थीं। आइए इस रिपोर्ट में जानें सरकार के इस कदम के क्‍या है मायने...

ऐसे कसा शिकंजा

दरअसल, केंद्र सरकार को बार बार इस बात का खुफ‍िया इनपुट मिल रहा था कि पीएफआइ के कुछ सदस्‍य गंभीर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। इसके बाद सरकार ने PFI पर शिकंजा कसने के मसले पर मंथन किया। आखिरकार 22 सितंबर को केंद्रीय जांच एजेंसियों ने 15 राज्यों में एकसाथ पीएफआइ के खिलाफ छापेमारी अभियान चलाया। सूत्रों का कहना है कि इस आपरेशन में केंद्रीय एजेंसियों को पीएफआइ के खिलाफ ठोस सुबूत हाथ लगे थे। केंद्रीय एजेंसियों की शुरुआत जांच रिपोर्ट के बाद पीएफआइ के खिलाफ ठोस कार्रवाई का दबाव बढ़ने लगा था।

अमित शाह खुद कर रहे थे निगरानी

सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय एजेंसियों की ओर से चलाए गए देशव्‍यापी ऑपरेशन की निगरानी एनआइए, ईडी और आइबी के निदेशकों ने खुद की। सभी उच्‍चाधिकारी कंट्रोल रूप में बैठकर खुद आपरेशन की निगरानी करते रहे। इतना ही नहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मसले पर उच्च स्तरीय बैठक करके पूरे आपरेशन की समीक्षा की। बताया जाता है कि पूरी कार्रवाई में एनआइए के 300 अधिकारी शामिल थे। इस ऑपरेशन को एनआइए की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।

देश के सारे उच्‍चाधिकारियों की थी आपरेशन पर नजरें

सूत्रों का कहना है कि इस ऑपरेशन के दौरान NIA के कंट्रोल रूम से महानिदेशक दिनकर गुप्ता जबकि ईडी के कंट्रोल रूम से निदेशक संजय मिश्र और आइबी के कंट्रोल रूम से निदेशक तपन डेका पल-पल की जानकारी लेते रहे। बाद में राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल आइबी के कंट्रोल रूम से इस ऑपरेशन की मॉनीटरिंग में जुड़ गए। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला भी कार्रवाई पर नजर बनाए हुए थे। एजेंसियों को पूरे ऑपरेशन के दौरान PFI के खिलाफ हैरान करने वाले साक्ष्‍य मिले। इन्‍हीं साक्ष्‍यों ने ताबूत में कील का काम किया।

प्रतिबंध के मायने

आतंकवाद और आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ भारत का मुख्य कानून यूएपीए केंद्र सरकार को 'गैरकानूनी संघ' या 'आतंकी संगठन' घोषित करने की अनुमति देता है। इसे बोलचाल की भाषा में संगठनों पर 'प्रतिबंध' के रूप में वर्णित किया जाता है। किसी संगठन को आतंकी संगठन घोषित करने का मतलब है कि इसके सदस्यों को अपराधी ठहराया जा सकता है। यही नहीं संगठन की अवैध संपत्तियों को जब्‍त किया जा सकता है।

वैश्विक एक्‍शन के अनुरूप है कार्रवाई

सरकार की ओर से की गई मौजूदा कार्रवाई वैश्विक एक्‍शन के अनुरूप है। वर्ष 1997 के बाद से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के कई प्रस्तावों में आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई के तहत उनकी संपत्तियों एवं अन्य आर्थिक संसाधनों को फ्रीज करने का प्राविधान है। यही नहीं कार्रवाई के तहत आतंकियों के प्रवेश या उनकी यात्रा पर रोक लगाई जा सकती है।

क्‍या बदल जाएगा..?

यूएपीए की धारा-35 के तहत केंद्र सरकार उस संगठन पर प्रतिबंध लगा सकती है जो आतंकवाद में शामिल है। आतंकी घटनाओं में लिप्‍त समूह को आतंकी संगठन माना जाता है। आतंकी घटनाओं में आतंकवाद को बढ़ावा देना और लोगों को आतंकवाद के लिए तैयार करना शामिल है। आतंकी संगठन घोषित किए जाने के बाद समूह की फंडिंग पर रोक लग जाती है। यूएपीए की धारा-38 के तहत आतंकी गतिविधियों में लिप्‍त व्‍यक्ति को दस साल तक की कैद हो सकती है।

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