Shubhanshu Shukla: Axiom-4 Mission की घोषणा से शुभांशु की वापसी तक... 18 दिन में क्या-क्या हुआ? जानिए पूरी डिटेल
एक्सिओम-4 मिशन के साथ भारत ने अंतरिक्ष में फिर से अपना दबदबा बनाया है। शुभांशु आईएसएस पर भारत का पहला अनुसंधान मिशन पूरा करके धरती पर लौट आए हैं। उन्होंने 18 दिनों के दौरान सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण संबंधी कई प्रयोग किए जिनमें टार्डिग्रेड्स और बीजों के अंकुरण पर प्रयोग शामिल थे। इस मिशन में कई बार देरी हुई।

पीटीआई, नई दिल्ली। एक्सिओम-4 मिशन के साथ भारत ने चार दशकों के बाद अंतरिक्ष में फिर परचम लहराया। आइएसएस पर भारत का पहले अनुसंधान मिशन को पूरा कर शुभांशु धरती पर लौट चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर जाने वाले पहले भारतीय शुभांशु ने 18- दिवसीय मिशन के दौरान सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण संबंधी कई प्रयोग किए।
आइए एक्सिओम मिशन की घोषणा से लेकर अंतरिक्षयात्रियों की वापसी तक के प्रमुख घटनाक्रम पर डालते हैं एक नजर।
- भारतीय अंतरिक्षयात्री शुभांशु शुक्ला की भागीदारी वाले एक्सिओम-4 मिशन की घोषणा 2024 के अंत में इसरो और नासा की ओर से समर्थित कमर्शियल अंतरिक्ष उड़ान के रूप में की गई थी।
- इस मिशन को 2025 के शुरू में लांच करना था, लेकिन कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र में तकनीकी जांच और प्रतिकूल मौसम के कारण कई बार स्थगित करना पड़ा।
- विभिन्न कारणों से कई बार टलने के बाद 25 जून को स्पेसएक्स के फाल्कन-9 राकेट ने एक्सिओम मिशन के चार अंतरिक्षयात्रियों को लेकर फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से आईएसएस के लिए उड़ान भरी।
- स्पेसएक्स का ड्रैगन अंतरिक्षयान 26 जून को आइएसएस पर पहुंचा। अंतरिक्षयात्रियों ने आईएसएस पर 18 दिन रहकर कई प्रयोग किए।
- इस दौरान शुभांशु ने भारत से संबंधित सात प्रयोग किए। इनमें टार्डिग्रेड्स के भारतीय स्ट्रेन, मेथी और मूंग के बीजों का अंकुरण, साइनोबैक्टीरिया, सूक्ष्म शैवाल, फसल के बीज के प्रयोग और वायेजर डिस्प्ले पर प्रयोग शामिल हैं। टार्डिग्रेड्स या वाटर बियर छोटे जीव होते हैं और चरम स्थितियों में जीवित रहने की अपनी क्षमता के लिए जाने जाते हैं।
- शुभांशु ने अंतरिक्ष में मांसपेशियों पर माइक्रोग्रैविटी के प्रभाव का भी अध्ययन किया। उन्होंने माइक्रोग्रैविटी या न के बराबर गुरुत्वाकर्षण में पानी पर प्रयोग कर अंतरिक्ष में पानी के अनोखे व्यवहार को उजागर किया गया।
- शुभांशु ने सतही तनाव या सरफेस टेंशन का उपयोग करते हुए तैरता हुआ पानी का बुलबुला बनाया। एक अन्य अंतरिक्षयात्री व्हिटसन ने इस बुलबुले में प्लास्टिक बैग को धीरे से दबाते हुए दिखाया कि माइक्रोग्रैविटी में सतही तनाव कैसे चुंबक की तरह व्यवहार करता है।
- शुभांशु ने रेडियो और वीडियो लिंक के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, छात्रों और इसरो विज्ञानियों के साथ बातचीत की।
- 13 जुलाई को 'एक्सपीडिशन 73' के चालक दल के सदस्यों के साथ विदाई समारोह आयोजित किया गया, जहां शुभांशु ने इसरो और अपने सहयोगियों को धन्यवाद दिया।
- ड्रैगन अंतरिक्षयान 14 जुलाई को आइएसएस से अलग होकर पृथ्वी के सफर पर रवाना हुआ और लगभग साढ़े 22 घंटे की यात्रा के बाद धरती पर पहुंचा। इसके साथ ही आइएसएस पर भारत का पहला अनुसंधान मिशन पूरा हो गया।
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