नई दिल्ली, जेएनएन। बच्चे की देखभाल करने के लिए क्रेच की अनुपलब्धता को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाली महिला सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल अनु डोगरा की क्रेच की मांग को सेना ने स्वीकार कर लिया है। नागपुर के निकट काम्पटी में तैनात महिला सैन्य अधिकारी के दो वर्ष के बच्चे के पालन पोषण के लिए सेना ने वहां से महज कुछ किलोमीटर पर एक क्रेच की व्यवस्था की है, जहां महिला अफसर अपने शिशु को रखकर अपने आधिकारिक कर्तव्यों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकती है। सेना ने कोर्ट को अवगत कराया कि महिला की पोस्टिंग से महज 15 मिनट की दूरी पर क्रेच की सुविधा दे दी गई है।

उच्चतम न्यायालय ने सेना को बुधवार को निर्देश दिया कि कोर्ट की शरण लेने वाली महिला सैन्य अधिकारी को किसी तरह से भी भविष्य में प्रताडि़त न किया जाए कि उन्हें कोर्ट आने को मज़बूर होना पड़े। 39 साल की महिला अफसर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उसको ऐसी जगह तबादला किया गया है, जहां उसके बच्चे के लिए क्रेच जैसी आम सी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल माधवी दीवान से कहा कि यह सुनिश्चित किया जाये कि अदालत का दरवाजा खटखटाने के कारण ले. कर्नल अन्नू डोगरा प्रताडि़त न हों। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, महिला अधिकारी ने केवल अपना अधिकार हासिल करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से कहा था कि सेना को ध्यान रखना चाहिए कि उसके महिला अधिकारियों को काम के लिए अनुकूल माहौल मिले।

वहीं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने शीर्ष अदालत को अवगत कराया कि अब क्रेच की उपलब्धता होने के कारण ले. कर्नल डोगरा के पति को जोधपुर से नागपुर तबादले की आवश्यकता नहीं है।

महिला सैन्य अधिकारी के पति जोधपुर में डिप्टी जज एडवोकेट जनरल के पद पर तैनात हैं। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ऐश्वर्य भाटी ने, हालांकि आशंका जतायी कि उनकी मुवक्किल को उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए निशाना बनाया जा सकता है। डोगरा की याचिका में उनकी अस्थाई पोस्टिंग पर सवाल उठाया गया था।

Posted By: Tanisk