'आधी रात को CEC की नियुक्ति करना अपमानजनक', नए मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर मचा सियासी घमासान
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि आधी रात को नए मुख्य चुनाव आयुक्त को नियुक्त करना अपमानजक है। नेता विपक्ष ने पैनल बैठक में दिए असहमति नोट को साझा करते हुए कहा कि सरकार को जवाबदेह ठहराना उनका कर्तव्य है। विपक्ष की दलील है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की बहुत बड़ी जिम्मेदारी चुनाव आयोग और सीईसी पर है।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सरकार और विपक्ष के बीच देश के नए मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर शुरू हुआ विवाद तीखा होता दिख रहा है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पैनल से जुड़े मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनाई से पहले ही नए सीईसी को नियुक्त करने के सरकार के कदम की आलोचना करते हुए इसे संविधान और कानून की मर्यादा के खिलाफ बताया है।
सीईसी नियुक्ति पैनल की बैठक में अपनी असहमति जताने के बाद राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट में चयन प्रक्रिया को दी गई चुनौती पर सुनवाई के मद्देनजर प्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री का आधी रात को नए मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का निर्णय अपमानजनक और अशिष्टतापूर्ण है।
विपक्ष ने सीईसी पर क्या दी दलील?
कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से जुड़े पैनल की वैधानिकता पर सुनवाई के बाद ही नए सीईसी की नियुक्ति किए जाने की मांग करती रही हैं। विपक्ष की दलील है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की बहुत बड़ी जिम्मेदारी चुनाव आयोग और सीईसी पर है।
बैठक में राहुल गांधी ने क्या उठाई बात?
ऐसे में सरकार के बहुमत वाले पैनल के जरिए सीईसी की निष्पक्ष नियुक्ति नहीं हो सकती। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सोमवार शाम सीईसी की नियुक्ति पैनल की हुई बैठक में नेता विपक्ष की हैसियत से शामिल हुए राहुल गांधी ने इसी बात को उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में 19 फरवरी को होने वाली सुनवाई के मद्देनजर ज्ञानेश कुमार को नया मुख्य चुनाव आयुक्त बनाने के प्रस्ताव को स्थगित करने का अनुरोध किया था।
बैठक के कुछ घंटों बाद ही नियुक्ति की अधिसूचना जारी
हालांकि बैठक के कुछ घंटों के बाद ही देर रात ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त तथा विवेक जोशी को चुनाव आयुक्त नियुक्त करने की अधिसूचना जारी कर दी गई। प्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री अमित शाह के अलावा नेता विपक्ष इस नियुक्ति पैनल के सदस्य होते हैं।
अनुरोध अस्वीकार किए जाने के बाद नेता विपक्ष ने बैठक में अपना असहमति नोट (डिसेंट नोट) दिया। राहुल गांधी ने एक्स पर मंगलवार को असमहति नोट साझा करते हुए कहा
'मैंने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से कहा कि कार्यकारी हस्तक्षेप से मुक्त एक स्वतंत्र चुनाव आयोग के लिए सबसे बुनियादी बात चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनने की प्रक्रिया है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन कर देश के मुख्य न्यायाधीश को नियुक्ति पैनल से हटाकर मोदी सरकार ने हमारी चुनावी प्रक्रिया की अखंडता पर करोड़ों मतदाताओं की चिंताएं बढ़ाई है।'
राहुल ने आंबेडकर के भाषण का किया उल्लेख
स्वतंत्र चुनाव आयोग की स्थापना के संदर्भ में आंबेडकर के जून 1949 में संविधान सभा दिए भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि बाबा साहब ने तब भारत के लोकतंत्र और चुनाव आयोग के मामलों में कार्यपालिका के हस्तक्षेप को लेकर चेतावनी दी थी।
राहुल गांधी ने सरकार के कदम को बताया अनुचित
सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश की तीन सदस्यीय समिति द्वारा की जाने का फैसला दिया था। सरकार ने इसके बाद कानून में संशोधन करते हुए मुख्य न्यायाधीश की जगह गृहमंत्री को पैनल का सदस्य बनाने का निर्णय लिया। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार का यह कदम सुप्रीम कोर्ट के फैसले और भावना का घोर उल्लंघन है।
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