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    Anti Defection Law: दल-बदल कानून को किया जाएगा मजबूत, ओम बिरला ने पीठासीन अधिकारियों के साथ की बैठक

    इस बैठक में राज्यसभा के उपसभापति और 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पीठासीन अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में दल बदल विरोधी कानून को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई और कानून में संशोधन पर सीपी जोशी कमेटी की रिपोर्ट पर विचार किया गया।

    By Piyush KumarEdited By: Updated: Fri, 15 Jul 2022 11:30 PM (IST)
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    दल बदल विरोधी कानून को मजबूत करने के लिए किया जाएगा विचार विमर्श किया जाएगा। (फाइल फोटो)

    जागरण ब्यूरो,नई दिल्ली। दल बदल विरोधी कानून को मजबूत करने के लिए पीठासीन अधिकारियों, संवैधानिक विशेषज्ञों और अन्य सभी हित धारकों के साथ विचार विमर्श किया जाएगा। दिल्ली में पीठासीन अधिकारियों की बैठक में शुक्रवार को यह निर्णय लिया गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को संसद भवन में आयोजित पीठासीन अधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में राज्यसभा के उपसभापति और 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पीठासीन अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में दल बदल विरोधी कानून को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई और कानून में संशोधन पर सीपी जोशी कमेटी की रिपोर्ट पर विचार किया गया।

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    किसी भी शब्द पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है: लोकसभा अध्यक्ष

    लोकसभा अध्यक्ष ने दल बदल विरोधी कानून को मजबूत करने के मुद्दे को महत्वपूर्ण बताते हुए उसे तय कर अंतिम रूप देने की बात कही। लेकिन बैठक में तय हुआ कि मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण है और इस पर जल्दबाजी में कुछ नहीं होना चाहिए अंतिम निर्णय से पहले सभी हित धारकों जैसे पीठासीन अधिकारियों, संवैधानिक विशेषज्ञों और कानूनी विद्वानों के साथ विचार विमर्श किया जाए। दल बदल विरोधी कानून के बावजूद दल बदल की समस्या बनी रहने पर लोकसभा अध्यक्ष ने पिछले वर्ष दल बदल विरोधी कानून को मजबूत करने के लिए सीपी जोशी कमेटी का गठन किया था। बैठक में अन्य मुद्दों जैसे असंसदीय शब्दों की सूची भी चर्चा हुई। बिरला ने पीठासीन अधिकारियों से आग्रह किया कि वे अपने यहां सदस्यों को समझाएं और सूचित करें कि यह एक प्रक्रिया है जो चलती रहती है। सदस्यों को बताएं कि किसी भी शब्द पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, लेकिन जो शब्द सभापीठ के निर्देशों के अनुसार कार्यवाही से हटा दिये गये हैं, उन्हें संकलित किया गया है।

    राष्ट्रपति और राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान व्यवधान नहीं होना चाहिए: बिरला
    बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों को सदन में सम्मानजनक आचरण के लिए सदस्यों का मार्गदर्शन करना चाहिए। राज्य विधानसभाओं की बैठक की संख्या बढ़ाने के प्रयास होने चाहिए। उन्होंने कहा कि विधायिकाओं में वाद-विवाद और चर्चा गरिमापूर्ण होनी चाहिए और प्रत्येक सदस्य को इस तरह आचरण करना चाहिए जिससे सदन की गरिमा और मर्यादा बढ़े। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्रपति और राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान व्यवधान नहीं होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि पीठासीन अधिकारी नियमित रूप से बैठक करें और इन मुद्दों पर चर्चा करें ताकि विधानसभाओं में सार्थक चर्चा हो सके।

    देश में विधानसभाओं के बारे में जानकारी के लिए एक मंच की आवश्यकता पर जोर देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि एक डिजिटल प्लेटफार्म तैयार किया जा रहा है और इस प्लेटफार्म पर देश की सभी विधानसभाओं की डिबेट्स उपलब्ध होगी। उन्होंने राज्य विधानसभाओं की बहसों को साझा करने के लिए पीठासीन अधिकारियों से सहयोग मांगा ताकि एक मजबूत डिजिटल प्लेटफार्म तैयार किया जा सके। नियमों और प्रक्रियाओं की एकरूपता पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पंचायतों सहित सभी लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित विधायी निकायों के लिए नियमों और प्रक्रियाओं की एकरूपता, जमीनी स्तर से लोकतंत्र को मजबूत करेगी।