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    आंध्र प्रदेश: तिरुपति में भगवान वेंकटेश्वर के वार्षिक ब्रह्मोत्सव का हुआ समापन

    By Pooja SinghEdited By:
    Updated: Mon, 28 Sep 2020 07:55 AM (IST)

    आंध्र प्रदेश में आयोजित 9 दिनों का ब्रह्मोत्सव का समापन हो गया है। रविवार को आयोजित समापन समारोह में सुबह चक्र स्नानम (Chakra Snanam) की रस्म अदा की गई। चित्तूर जिले के तिरुपति में तिरुमाला में भगवान बालाजी के मंदिर में यह रस्म पूरी हुई।

    आंध्र प्रदेश में ब्रह्मोत्सव का हुआ समपान।

    हैदराबाद, एएनआइ। आंध्र प्रदेश में आयोजित 9 दिनों का ब्रह्मोत्सव (Brahmotsavams) का रविवार को समपान हो गया। भगवान वेंकटेश्वर का वार्षिक ब्रह्मोत्सव रविवार को चित्तूर जिले के तिरुपति में तिरुमाला में भगवान बालाजी के मंदिर में नौ दिनों के उत्सव के बाद संपन्न हुआ। समापन समारोह के साथ ही रविवार सुबह चक्र स्नानम (Chakra Snanam) का आयोजन हुआ। इस रस्म में सुबह स्नान किया गया। विशेष प्रार्थना करने के बाद भगवान वेंकटेश्वर की मूर्ति और उनके "सुदर्शन चक्र" को पवित्र स्नान कराया गया।

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    जगन मोहन रेड्डी ने पहुंचे थे भगवान बालाजी के दरबार

    गौरतलब है कि कुछ दिन पहले आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने ब्रह्मोत्सवम के अवसर पर भगवान बालाजी को पवित्र रेशमी वस्त्र भेंट करने के लिए तिरुमाला पहुंचे थे।मुख्यमंत्री, जो दिल्ली में थे, ने सीधे तिरुमाला की विशेष उड़ान में उड़ान भरी और बुधवार को लगभग 3:30 बजे रेनिगुन्टा हवाई अड्डे पर उतरे। सांसद पीवी मिथुन रेड्डी और वी प्रभाकर रेड्डी उनके साथ थे।

    मंत्री के नारायण स्वामी, अल्ला कालिकृष्ण श्रीनिवास, मेकापति गौतम रेड्डी, पेड्डरेड्डी रामचंद्र रेड्डी, श्रीनिवास गोपालकृष्ण; हवाई अड्डे पर टीटीडी के अध्यक्ष वाईवी सुब्बा रेड्डी, जिला विधायक, जिला संयुक्त कलेक्टर, पुलिस कर्मियों और अन्य लोगों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया था।

    विवाद में आए थे मुख्यमंत्री

    जगन मोहन रेड्डी ने मंदिर के कार्यक्रम में भाग लिया और भगवान को कपड़े अर्पित किया और गरुड़ सेवा में भाग लिया। परंपरा के अनुसार, रेड्डी ने अपने सिर पर एक चांदी की प्लेट में रखे कपड़े ले गए और इसे तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के पुजारियों और अधिकारियों को सौंप दिया।

    इसके साथ ही मुख्यमंत्री के भगवान बालाजी मंदिर जाने से भी विवाद खड़ा हो गया क्योंकि विपक्ष के टीडीपी नेता चंद्रबाबू नायडू ने मंदिर के कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर नहीं नहीं किए थे। इसके बाद से लगातार मुख्यमंत्री के इस्तीफे की भी मांग उठी थी।