जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में बताया कि विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की 18,000 करोड़ की संपत्तियां जब्त की गईं हैं और यह रकम बैंकों को लौटाई गई है। मालूम हो कि तीनों कारोबारी बैंकों का हजारों करोड़ रुपये का कर्ज बिना चुकाए विदेश भाग गए हैं। उन्हें प्रत्यर्पित कर भारत लाने के लिए विदेशी अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही है। जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश महेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ के समक्ष केंद्र सरकार की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह जानकारी दी। पीठ प्रिवेंशन आफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के विभिन्न प्रविधानों की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। शीर्ष अदालत में ऐसी करीब 200 याचिकाएं लंबित हैं।

याचिकाओं में कानून के विभिन्न प्रविधानों को अस्पष्ट और कानून के तय सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए उनके दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। मामले में गुरुवार को भी बहस जारी रहेगी।बुधवार को मेहता ने दुरुपयोग के आरोप नकारते हुए पीएमएलए लागू होने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई जांचों और गिरफ्तारियों का ब्योरा कोर्ट में पेश किया। उन्होंने कहा कि 2002 में कानून आने के बाद से अभी तक ईडी ने कुल 4,700 मामलों की जांच की है, लेकिन गिरफ्तारी सिर्फ 313 की हुई हैं क्योंकि कानून में पर्याप्त विधायी सावधानियां (सेफगार्ड) हैं ताकि कानून का दुरुपयोग न हो सके। ऐसा नहीं है कि कानून बहुत कड़ा और नागरिकों की स्वतंत्रता का हनन करने वाला है।

अदालतों के संरक्षण के कारण लंबित हैं 67 हजार करोड़ की संपत्तियों के मामले

मेहता ने माल्या, नीरव और चोकसी की संपत्तियों की जब्ती का ब्योरा देते कहा कि अभी 67,000 करोड़ की संपत्तियों के मनी लांड्रिंग के केस अदालतों में लंबित हैं। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े बताते हैं कि कैसे अभी भी बड़ी रकम फंसी हुई है और अदालतों द्वारा प्रदान किए जा रहे संरक्षण की वजह से वसूली का चरण पार नहीं कर पा रही है। मेहता ने पीएमएलए के तहत पिछले पांच वर्षो (2016-17 से 2020-21 तक) में की गई जांचों का ब्योरा देते हुए बताया कि पुलिस और अन्य इंफोर्समेंट एजेंसियों द्वारा अधिसूचित अपराधों में करीब 33 लाख एफआइआर दर्ज की गईं, जबकि पीएमएलए के तहत उनमें से सिर्फ 2,186 मामलों की ही जांच की गई।

कई वरिष्ठ वकील पेश कर चुके हैं दलीलें

इस मामले में पिछले हफ्तों के दौरान कई वरिष्ठ वकील दलीलें पेश कर चुके हैं, इनमें कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और मुकुल रोहतगी शामिल हैं। उन्होंने अपनी दलीलों में पीएमएलए में हालिया संशोधनों के संभावित दुरुपयोग की ओर इशारा किया। इस कानून की कई मुद्दों पर आलोचना की गई है, मसलन- जमानत की कड़ी शर्ते, गिरफ्तारी का आधार नहीं बताना, ईसीआइआर (इंफोर्समेंट केस इंफारमेशन रिपोर्ट) दिए बिना व्यक्ति की गिरफ्तारी, मनी लांड्रिंग की परिभाषा का विस्तार और जांच के दौरान आरोपित द्वारा दिए गए बयान की मुकदमे के दौरान साक्ष्य के रूप में स्वीकार्यता।

अन्य देशों की तरह बनाना होता है अपना कानून

मेहता ने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर एंटी मनी लां¨ड्रग नेटवर्क और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संधियों का हिस्सा है जिसके तहत सदस्य देशों को अपने मनी लां¨ड्रग कानून को अन्य देशों की तरह ही लाना होता है। मनी लांड्रिंग इतना व्यापक अपराध है कि इससे कोई देश अकेले नहीं निपट सकता। इसमें वैश्विक स्तर पर मिलजुल कर चलना पड़ता है।

तभी भारत में जांच के मामले हैं कम

तुषार मेहता ने कहा कि विदेश के मुकाबले एक साल में भारत में पीएमएलए के तहत बहुत कम संख्या में मामलों की जांच की जा रही है। भारत में 2015-16 में 111 मामले और 2020-21 में 981 मामले सहित पांच साल में कुल 2,086 मामलों की जांच हुई। अन्य देशों के मुकाबले इनकी संख्या बहुत कम है।

Edited By: Amit Singh

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