यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 01, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
'यह हमारी विरासत पर हमला', अजमेर दरगाह मामले में नजीब जंग समेत पूर्व नौकरशाहों ने PM मोदी को लिखा पत्र
अजमेर दरगाह मामले में आधा दर्जन से अधिक पूर्व नौकरशाहों और राजनयिकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। ...और पढ़ें

HighLights
- हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने दाखिल की याचिका।
- अजमेर की अदालत ने केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस।
- अब पूर्व नौकरशाहों ने इस चलन को रोकने की उठाई मांग।
पीटीआई, नई दिल्ली। अजमेर शरीफ दरगाह मामले में पूर्व नौकरशाहों और राजनयिकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने पीएम मोदी से इन गतिविधियों को रोकने और हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह भारत की सभ्यतागत विरासत पर वैचारिक हमला है।
यह एक समावेशी देश के विचार को विकृत करता है। पत्र में कहा गया है कि पीएम मोदी अकेले ही इसे रोक सकते हैं। पूर्व नौकरशाहों ने यह भी याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12वीं शताब्दी के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के वार्षिक उर्स के अवसर पर चादरें भेज चुके हैं।
इन्होंने लिखा पत्र
दिल्ली के पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग, यूनाइटेड किंगडम में भारत के पूर्व उच्चायुक्त शिव मुखर्जी, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी, पूर्व उप-सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल जमीरुद्दीन शाह और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व डिप्टी गवर्नर रवि वीर गुप्ता समेत लगभग आधा दर्जन पूर्व नौकरशाहों और राजनयिकों ने 29 नवंबर को प्रधानमंत्री को यह पत्र लिखा।
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'अदालतें दिखा रहीं तत्परता'
पत्र में लिखा कि पूजा स्थल अधिनियम के स्पष्ट प्रावधानों के बावजूद अदालतें भी ऐसी मांगों पर अनावश्यक तत्परता और जल्दबाजी से प्रतिक्रिया करती दिखती हैं। यह भी कहा कि यह अकल्पनीय लगता है कि एक स्थानीय अदालत 12वीं शताब्दी के सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर सर्वेक्षण का आदेश दे। यह दरगाह एशिया में न केवल मुसलमानों के लिए बल्कि उन सभी भारतीयों के लिए सबसे पवित्र सूफी स्थलों में से एक है, जिन्हें हमारी समन्वयकारी और बहुलवादी परंपराओं पर गर्व है।
यह हमारी विरासत पर हमला
पत्र में यह भी लिखा है कि यह सोचना ही हास्यास्पद है कि एक फकीर, जो भारतीय उपमहाद्वीप में अद्वितीय सूफी आंदोलन का अभिन्न अंग और करुणा, सहिष्णुता व सद्भाव का प्रतीक था, वह अपनी सत्ता कायम रखने के लिए किसी मंदिर को नष्ट कर सकता है।"
पीएम को संबोधित पत्र में आगे यह भी लिखा कि इस अद्वितीय समन्वयकारी स्थल पर वैचारिक हमला हमारी सभ्यतागत विरासत पर हमला है। यह समावेशी भारत के उस विचार को विकृत करता है जिसे आप स्वयं पुनर्जीवित करना चाहते हैं।" पूर्व नौकरशाहों ने कहा कि इस तरह से समाज न तो प्रगति कर सकता है और न ही विकसित भारत का आपका सपना साकार हो सकता है।
अदालत ने जारी किया नोटिस
बता दें कि 27 नवंबर को अजमेर की एक सिविल अदालत ने अजमेर दरगाह समिति, केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को नोटिस जारी किया। यह नोटिस हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की याचिका पर जारी किया गया। याचिका में दावा किया गया था कि दरगाह मूलरूप से एक शिव मंदिर था।
