नई दिल्ली, प्रेट्। सरकार ने भारती एयरटेल, टाटा कम्यूनिकेशंस, रेलटेल कार्प, रिलायंस कम्यूनिकेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्विसफोन इंडिया और सिफी टेक्नोलाजीज सहित 34 कंपनियों को इंटरनेट सेवा लाइसेंस मानदंडों के उल्लंघन का दोषी पाया है।

दूरसंचार राज्यमंत्री देवुसिंह चौहान ने गुरुवार को राज्यसभा को बताया कि उल्लंघनकर्ताओं की सूची में सी-डैक नोएडा, आइसनेट डाट नेट, कप्पा इंटरनेट सर्विसेज, नोएडा साफ्टवेयर टेक्नोलाजी पार्क और व‌र्ल्ड गेट नेटवर्क भी शामिल हैं। चौहान ने बताया कि कंपनियों को इंटरनेट सेवाएं प्रदान करने के लिए भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 की धारा-4 के तहत लाइसेंस प्रदान किया जाता है।

इन कंपनियों ने लाइसेंस शर्तो का उल्लंघन करते हुए सूचीबद्ध आइएसपी लाइसेंसधारियों को ब्राडबैंड सेवाएं प्रदान कीं। ऐसे लाइसेंसधारी पर उचित वित्तीय जुर्माना लगाया गया है। सरकार ने पाया कि भारती एयरटेल, सी-डैक नोएडा, रेलटेल कार्प ऑफ इंडिया, रिलायंस कम्यूनिकेशंस इन्फ्रास्ट्रक्चर, टाटा कम्यूनिकेशंस, प्राइमनेट ग्लोबल, माई-नेट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और कुछ अन्य सेवा प्रदाताओं की ओर से इंटरनेट सेवाओं की दोबारा बिक्री हो रही है। दो कंपनियों व‌र्ल्ड गेट नेटव‌र्क्स और ई-काम अपाच्र्युनिटीज के पास विदेशी उपग्रहों का उपयोग करते हुए अनधिकृत इंटरनेट गेटवे भी हैं।

चीन को 22 लाख गांठ कपास निर्यात

भारत ने मौजूदा कपास सत्र 2020-21 में कुल 54.83 लाख गांठ कपास का निर्यात किया। इसमें से 21.97 लाख गांठ का निर्यात चीन को किया गया है। कपड़ा राज्यमंत्री दर्शन जरदोश ने कहा कि कोरोना संकट के बीच भी भारत से चीन को कपास और धागे का निर्यात नहीं रुका। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के बाद चीन सबसे ज्यादा कपास भारत से ही खरीदता है।जरदोश के अनुसार वर्ष 2020-21 के दौरान कुल 98 करोड़ किलोग्राम सूती धागे निर्यात में से 27.5 करोड़ किलोग्राम सूती धागा चीन को गया। चीन सूती धागा सबसे अधिक भारत से ही आयात करता है।

Edited By: Pooja Singh