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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 16, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

वायु सेना के लड़ाकू विमान 'अंगद' और 'उत्तम' से होंगे लैस, स्वदेशी रूप से किया जा रहा विकसित

By AgencyEdited By: Mohd Faisal
Published: Mon, 16 Oct 2023 05:30 AM (GMT+05:30)

सैन्य प्रणालियों के स्वदेशीकरण के लिए चल रहे प्रयासों के बीच एक महत्वपूर्ण कदम के तहत भारत में निर्मित हल्के ...और पढ़ें

वायु सेना के लड़ाकू विमान 'अंगद' और 'उत्तम' से होंगे लैस, स्वदेशी रूप से किया जा रहा विकसित (फाइल फोटो)
वायु सेना के लड़ाकू विमान 'अंगद' और 'उत्तम' से होंगे लैस, स्वदेशी रूप से किया जा रहा विकसित (फाइल फोटो)

HighLights

  1. मार्क-1ए में स्वदेशी रडार और वारफेयर लगाए जाएंगे।
  2. अब तक आयातित प्रणाली का किया जाता था उपयोग।

एएनआई, नई दिल्ली। सैन्य प्रणालियों के स्वदेशीकरण के लिए चल रहे प्रयासों के बीच एक महत्वपूर्ण कदम के तहत भारत में निर्मित हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) मार्क-1ए को उत्तम रडार और अंगद इलेक्ट्रानिक वायरफेयर सूट से लैस किया जाएगा। अब तक इसमें आयातित प्रणाली का उपयोग किया जाता था।

स्वदेशी रूप से किया जा रहा विकसित

रक्षा अधिकारियों ने बताया कि उत्तम एक्टिव इलेक्ट्रानिकली स्कैंड एरे (एईएसए) रडार और अंगद इलेक्ट्रानिक वारफेयर सूट को स्वदेशी रूप से विकसित किया जा रहा है। यह बहुत जल्द एलसीए मार्क-1ए विमान के साथ इंटीग्रेट होने के लिए तैयार हो जाएगा।

83 एलसीए मार्क-1ए लड़ाकू विमानों का ऑर्डर दे चुकी है वायु सेना

वायु सेना पहले ही 83 एलसीए मार्क-1ए लड़ाकू विमानों के लिए ऑर्डर दे चुकी है और निकट भविष्य में अन्य 97 विमानों के लिए ऑर्डर देने जा रही है। सूत्रों ने बताया कि 41वें विमान से लेकर 83 एलसीए मार्क-1ए विमानों के आर्डर तक इलेक्ट्रानिक वारफेयर सूट और एईएसए रडार भारत में बनाए जाएंगे। इससे इन विमानों में स्वदेशी उपकरण बढ़ेगा। इन्हें आयातित प्रणालियों की जगह लगाया जाएगा।

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रक्षा उद्योग में पैदा होंगे विकास के अवसर

परियोजनाओं को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन की विभिन्न प्रयोगशालाओं द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है। एलसीए को स्वदेशी हथियार प्रणालियों से लैस करने पर रक्षा उद्योग में विकास के अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी। सूत्रों ने बताया कि उत्तम रडार ने निर्माण के चरण में भी बहुत आशाजनक परिणाम दिखाए हैं। यहां तक कि उच्च-स्तरीय लड़ाकू विमानों को भी इससे लैस करने पर विचार किया जा रहा है।

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