विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 26, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

85 की उम्र में मारी बॉलीवुड में एंट्री, मिला पहला ब्रेक और सबकी चहेती बन गईं 'अम्माजी'

By Sanjay PokhriyalEdited By:
Published: Mon, 26 Mar 2018 01:01 PM (IST)Updated: Mon, 26 Mar 2018 03:57 PM (IST)

85 साल की उम्र में फिल्म 'रेड' से बॉलीवुड में एंट्री करने वाली पुष्पा जोशी 'अम्माजी' अपने शानदार काम से सबकी चहेती बन गई हैं।

85 की उम्र में मारी बॉलीवुड में एंट्री, मिला पहला ब्रेक और सबकी चहेती बन गईं 'अम्माजी'
85 की उम्र में मारी बॉलीवुड में एंट्री, मिला पहला ब्रेक और सबकी चहेती बन गईं 'अम्माजी'

जबलपुर (जेएनएन)। 85 साल की उम्र में फिल्म 'रेड' से बॉलीवुड में एंट्री करने वाली पुष्पा जोशी 'अम्माजी' अपने शानदार काम से सबकी चहेती बन गई हैं। 'रेड' में उनके काम को देखकर काजोल सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं और उन्हें अपने घर ले जाने की इच्छा जताई।

अपनी जवानी के दिनों में कभी थियेटर में काम करने वाली पुष्पा जोशी को हमेशा से एक्टिंग का शौक रहा है, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते इन्होंने कभी अपने इस हुनर को वक्त नहीं दिया। जब बच्चे बड़े हुए तो एक बार फिर अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जीने का मौका मिला।

बेटे ने शॉर्ट फिल्म जायजा बनाई जिसमें पुष्पा ने एक बुजुर्ग का रोल किया। यूट्यूब पर अपलोड इस शॉर्ट फिल्म के लिंक इतना वायरल हुआ कि पुष्पा को इस उम्र में जिंदगी का पहला और सबसे बड़ा ब्रेक मिल गया। फिल्म रेड में अभिनेता अजय देवगन के साथ काम कर रहीं हैं। फिल्म में इन्होंने दादी का रोल किया है। पुष्पा जोशी इन दिनों शूटिंग कर रही हैं।

हुई बातचीत के दौरान इन्होंने बताया कि पहले मैं इस रोल के लिए तैयार नहीं थी। 81 साल की उम्र में काम करना थोड़ा मुश्किल होता है। तब बच्चों ने कहा कि आप यदि इस उम्र में काम करोगे तो अन्य लोगों के लिए प्रेरणा बनोगे। बच्चों ने मनोबल बढ़ाया और फिर इस रोल के लिए हां कर दिया।

एक्टिंग का हुनर इस तरह से खुद में रच बस गया है कि एम मिनट में ही हर एक शॉर्ट को एक बार में पूरा कर लेती हैं। कई बार शूटिंग के दौरान साथ के लोग तारीफ और जज्बे को देखकर तालियों से उत्साह वर्द्धन करते हैं।

काजोल की तारीफ पर पुष्पा जोशी हंसते हुए बोलीं, मैं काजोल के घर जरूर जाना चाहती हूं। आप कह सकते हैं कि मैं देरी से खिला हुआ फूल हूं। मैं जानती हूं कि मेरी जैसी उम्र वालों के लिए बहुत ज्यादा रोल नहीं हैं, पर आजकल कुछ स्क्रिप्ट वृद्धों की जिंदगी को ध्यान रखकर भी लिखी जा रही है। थिएटर और संगीत पुष्पा जोशी के परिवार का स्वाभाविक हिस्सा रहा है।