ED: फेमा उल्लंघन के मामलों में तेज होगी कार्रवाई, ईडी निदेशक ने दिया सख्त संदेश
ईडी निदेशक राहुल नवीन ने कहा है कि एजेंसी अब विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत कानून के उल्लंघन से जुड़े मामलों पर अपना विशेष ध्यान केंद्रित करेगी तथा इस बाबत और तेजी से कार्रवाई करेगी।एजेंसी के स्थापना दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इस वर्ष ईडी जिस क्षेत्र में ध्यान केंद्रित करने का इरादा रखता है वह फेमा उल्लंघन है।

एएनआई, नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक राहुल नवीन ने कहा है कि एजेंसी अब विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत कानून के उल्लंघन से जुड़े मामलों पर अपना विशेष ध्यान केंद्रित करेगी तथा इस बाबत और तेजी से कार्रवाई करेगी।
एजेंसी के स्थापना दिवस के अवसर पर बोले ईडी निदेशक
एजेंसी के स्थापना दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इस वर्ष ईडी जिस क्षेत्र में ध्यान केंद्रित करने का इरादा रखता है, वह फेमा उल्लंघन है।
उन्होंने कहा कि ईडी द्वारा जांचे गए 1700 से अधिक धन शोधन मामले वर्तमान में सुनवाई के चरण में हैं और अदालतों में देरी के लिए देश में न्याय प्रणाली में सामान्य देरी को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
फेमा को लागू करने का काम सौंपा गया
एजेंसी की भावी प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालते हुए निदेशक ने कहा कि ईडी को केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) द्वारा जारी किए गए विनियमों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए फेमा को लागू करने का काम सौंपा गया है। इनमें सीमा पार वित्तीय लेनदेन को विनियमित करने के उद्देश्य से नियम, निर्देश और परिपत्र शामिल हैं।
30,036 करोड़ रुपये मूल्य के 461 कुर्की आदेश जारी
निदेशक ने कहा, ''इसे पूरा करने के लिए ईडी आवश्यक जांच और निर्णय करेगा, और चूक के मामलों में जुर्माना लगाएगा।''राहुल नवीन ने कहा कि ईडी ने 2014 से 2024 के बीच धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कुल 5,113 नए मामले दर्ज किए हैं, जो औसतन प्रति वर्ष 500 से अधिक मामले हैं, और 30,036 करोड़ रुपये मूल्य के 461 कुर्की आदेश जारी किए हैं।
नशीली दवाओं से संबंधित अपराधों पर की गई कार्रवाई
उन्होंने कहा कि भारत में पीएमएलए 2003 में अधिनियमित किया गया था और एक जुलाई, 2005 को लागू हुआ था। लेकिन, शुरुआती वर्षों में यह काफी हद तक अप्रभावी था और प्रति वर्ष 200 से कम मामले दर्ज किए गए थे और वह भी ज्यादातर नशीली दवाओं से संबंधित अपराधों तक ही सीमित थे।
31 मार्च, 2025 तक कुर्क की गई संपत्तियों का कुल मूल्य 1,54,594 करोड़ रुपये था। अदालतों की मंजूरी से वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 30 मामलों में 15,261 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति की गई और अगले वर्ष इसमें तेजी आने की संभावना है।
ईडी को एएसजी ने दी नसीहत, 'जल्दबाजी में गिरफ्तारी न करें'
प्रेट्र के अनुसार, अतिरिक्त सालिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू ने ईडी अधिकारियों से कहा कि वे मनी-लॉन्ड्रिंग के मामलों में ''जल्दबाजी'' में गिरफ्तारी न करें क्योंकि इससे उन्हें अदालतों में अच्छे नतीजे नहीं मिलेंगे। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि ''हवाला'' डीलरों को रिपोर्टिंग इकाई के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए ताकि वे एजेंसी को अपने ग्राहकों के बारे में जानकारी दे सकें जो भारी मात्रा में नकदी ले जाते हैं।
उन्होंने कहा कि ये उपाय एजेंसी के लिए बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। आपको गिरफ्तारी करने के लिए अपनी शक्ति का उदारतापूर्वक नहीं, बल्कि संयम से उपयोग करना चाहिए और आपको इसे बहुत देर से करना चाहिए, न कि (जांच के) शुरुआती चरण में।'
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।