नई दिल्ली, [जागरण स्पेशल]। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तमिलनाडु और केरल समेत कुल 11 राज्यों में पीएफआई के ठिकानों पर छामेमारी की। इस छापेमारी में 100 ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन गिरफ्तार लोगों पर टेरर फंडिंग मामले समेत कई तरह के आरोप शामिल हैं। आज भी गिरफ्तारी हो रही है। असम पुलिस ने शुक्रवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के एक और नेता को गिरफ्तार किया है।

एनआईए, ईडी और राज्य पुलिस बलों ने गुरुवार को पूरे भारत में की गई छापेमारी के दोरान 106 पीएफआई नेताओं, कैडरों और अन्य को गिरफ्तार किया गया। एनआईए ने केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, असम, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा, पश्चिम बंगाल, बिहार और मणिपुर के 15 राज्यों में एक साथ 93 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया।

गिरफ्तार लोगों पर ये हैं आरोप

गिरफ्तार पीएफआई नेता और कैडर टेरर फंडिंग, ट्रेनिंग कैंप और लोगों को संगठन में शामिल करने के लिए उकसाने का आरोप है। ये लोग सशस्त्र ट्रेनिंग भी देते थे। असम पुलिस ने गिरफ्तार लोगों पर धार्मिक अल्पसंख्यक की भावनाओं को भड़काने का आरोप लगाय है।

शुक्रवार को अतिरिक्त असम पुलिस महानिदेशक के अनुसार गिरफ्तार किए गए इस पीएफआई नेता की पहचान डॉक्टर मीनारूल शेख ( Dr Minarul Seikh) के रूप में हुई है। यह पश्चिम बंगाल का रहने वाला था और उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है।

असम पुलिस के एडीजीपी (विशेष शाखा) हिरेन नाथ ने कहा कि पश्चिम बंगाल के रहने वाले व्यक्ति को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है।

इन धाराओं के तहत किया गया गिरफ्तार

पुलिस ने आगे बताया कि अब तक 11 पीएफआई नेताओं और कार्यकर्ताओं को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120 बी, 124 (ए), 153 (ए) और 353 के तहत गिरफ्तार किया जा चुका है।

इससे पहले गुरुवार को असम पुलिस ने 10 पीएफआई नेताओं को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान अमीनुल हक, अब्दुल रज्जाक, रोबिउल हुसैन, नजरूल इस्लाम भुयान, रफीकुल इस्लाम, अबू समा अहमद, फरहाद अली, खलीलुर रहमान, मुफ्ती रहमतुल्लाह और बज़लुल करीम के रूप में की गई थी। ये सब पूरे राज्य में सांप्रदायिक दंगे भड़काने की साजिश रच रहे थे।

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असम से गिरफ्तार लोगों पर ये हैं आरोप

असम पुलिस के अनुसार उपरोक्त 10 गिरफ्तार व्यक्ति सांप्रदायिक रंग के साथ सरकार की हर नीति की आलोचना करके सांप्रदायिक जुनून और धार्मिक अल्पसंख्यक की भावनाओं को भड़काने में लिप्त थे। इनमें नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), एनआरसी शामिल है।

PFI से जुड़े लोग साइबर स्पेस का कर रहे थे गलत उपयोग

सरकार की अवहेलना करने और समाज को धार्मिक आधार पर विभाजित करने और नीतियों के क्रियान्वयन में बाधा डालने के लिए लोगों को भड़काने के लिए पीएफआई नेता बड़े पैमाने पर साइबर स्पेस का उपयोग कर रहे थे। पुलिस ने कहा कि वे जनता के बीच अविश्वास फैलाने के उद्देश्य से लोगों को सरकार के खिलाफ भड़का रहे थे।

विशेष रूप से एनआईए ने बताया कि उन्होंने कई पीएफआई नेताओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 120 और 153 ए और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम 1967 की धारा 17, 18, 18 बी, 20, 22 बी, 38 और 39 के तहत मामला दर्ज किया है।

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(इनपुट: समाचार एजेंसी एएनआई)

Edited By: Dhyanendra Singh Chauhan