जबलपुर, राज्‍य ब्‍यूरो। मध्य प्रदेश के जबलपुर में पिछले छह साल से पिंजरे में बंद एक मादा तोते ने तीन अंडे दिए तो लोग आश्चर्य में पड़ गए। करन प्रजाति की मादा तोता इतने सालों से पिंजरे के बाहर भी नहीं निकली। हालांकि वन्य जीव विशेषज्ञ का कहना है कि यह कोई अजूबा नहीं है, ऐसा हजारों में एक मामला सामने आता है। जबलपुर के ब्राह्मण मोहल्ला पुरवा निवासी सतीश तिवारी उस समय आश्चर्य में पड़ गए जब उनके घर के पिंजरे में छह साल से बंद मादा करन तोते (एलेक्जेंड्री पैराकीट) ने एक के बाद एक तीन अंडे दिए। पहला अंडा 30 जनवरी को, जबकि दो अंडे दो दिन पहले दिए। पहले अंडे को करन ने फोड़ दिया है, जबकि दो अंडे अभी तक सुरक्षित हैं।

स्वाभाविक प्रक्रिया

विशेषज्ञ वन्य जीव विशेषज्ञ का मानना है कि मादा पक्षियों का अंडे देना स्वाभाविक प्रक्रिया है। जैसा कि पोल्ट्री फार्म की मुर्गियों में होता है। वे बिना निषेचन के अंडे देती हैं लेकिन उन अंडों से बच्चे पैदा नहीं होते। बच्चे देने के लिए पक्षियों में निषेचन प्रक्रिया जरूरी है। उन्होंने बताया कि मादा तोते ने जो अंडे दिए, वह भी ठीक ऐसा ही मामला है। भले ही मादा तोता इतने वर्षो से पिंजरे में है लेकिन उसमें ऐसे लक्षण स्वाभाविक रूप से बने। उसके अंडों से भी बच्चे तैयार नहीं होंगे।

निषेचन प्रक्रिया से गुजरना जरूरी नहीं

मध्‍य प्रदेश के जबलपुर में वन्य जीव विशेषज्ञ डॉ. एबी श्रीवास्तव ने कहा कि हजारों पक्षियों में किसी एक के साथ ऐसा होता है। फीमेल का काम ही अंडे देना है, इसके लिए निषेचन प्रक्रिया से गुजरना जरूरी नहीं है।

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