जेएनएन, नई दिल्ली: रक्षा मंत्रालय ने नौसेना के अग्रिम मोर्चों के युद्धपोतों के लिए करीब 300 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की आपूर्ति के लिए गुरुवार को ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड (बीएपीएल) के साथ 1700 करोड़ रुपये के समझौते पर हस्ताक्षर किए। दोहरी भूमिका वाली इन मिसाइलों के आने से नौसेना की परिचालन क्षमता में और बढ़ोतरी होगी। साथ ही इस अनुबंध से हथियार प्रणाली और गोला-बारूद के स्वदेशी उत्पादन को और बढ़ावा मिलेगा।

रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड भारत और रूस के बीच एक संयुक्त उद्यम है जो नई पीढ़ी की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इन मिसाइलों में भूमि के साथ-साथ जहाज-रोधी हमलों के लिए उन्नत रेंज और दोहरी भूमिका निभाने की क्षमता है। रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर भारत अभियान को और प्रोत्साहन देते हुए रक्षा मंत्रालय ने बीएपीएल से यह अनुबंध किया है।

ब्रह्मोस ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेजी से उड़ान भरती है। यह बड़े (गैर-परमाणु) हथियार के रूप में उभरी है। रूस द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित ब्रह्मोस की सीमा को भी इसकी मूल रेज 290 किलोमीटर से बढ़ाकर अब करीब 400 किलोमीटर कर दिया गया है। यही नहीं, इसकी रेज 800 किलोमीटर करने पर भी तेजी से काम चल रहा है। चीन के साथ 28 महीने से चल रहे सैन्य टकराव के बीच ब्रह्मोस मिसाइल बैटरियों को सेना के टैंक, हावित्जर, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और अन्य हथियारों के साथ लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में तैनात किया गया है।

बता दें कि नौसेना ने बीते दिसंबर में अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह क्षेत्र में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के एंटी शिप वर्जन का परीक्षण किया था। ब्रह्मोस ने बंगाल की खाड़ी में निकोबार द्वीप समूह के पास अपने लक्ष्य जहाज को सफलतापूर्वक मार गिराया था।

Edited By: Amit Singh