अमेरिका के साथ ट्रेड डील टलने से भारतीय निर्यातकों को कैसे होगा फायदा? पूरी डिटेल
अमेरिका से व्यापार समझौता टलने के बावजूद भारतीय निर्यातक खुश हैं क्योंकि 24 जुलाई से अतिरिक्त शुल्क हटने से अमेरिकी बाजार में भारतीय वस्तुएं सस्ती होंगी।

अमेरिका के साथ ट्रेड डील टलने से भारतीय निर्यातकों को कैसे होगा फायदा?

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राजीव कुमार, नई दिल्ली। अमेरिका से व्यापार समझौता टलने से फिलहाल निर्यातक उदास नहीं बल्कि खुश है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक अभी सभी देशों के माल पर जो 10 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लग रहा है, उसकी अवधि 24 जुलाई को समाप्त हो रही है। उसके बाद से अमेरिका जाने वाली वस्तुओं पर पिछले साल अप्रैल से पहले वाले शुल्क लगेंगे।
इससे भारतीय वस्तुएं अमेरिका के बाजार में सस्ती होंगी और हमारा निर्यात बढ़ेगा। हालांकि निर्यातक यह भी कह रहे हैं कि शुल्क को लेकर अमेरिका की सरकार का कोई भरोसा नहीं है।
24 जुलाई से अमेरिका का 10% अतिरिक्त शुल्क हटेगा
मंगलवार की रात को ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक नई घोषणा कर दी जिसके मुताबिक अमेरिका आने वाली जेनेरिक दवाई पर वर्ष 2028 से 100 प्रतिशत का शुल्क वसूला जाएगा।
तब तक के लिए जेनेरिक दवा पर पहले की तरह कोई शुल्क नहीं वसूला जाएगा। भारत का जेनेरिक दवा का करीब 40 प्रतिशत निर्यात अमेरिका में होता है और ट्रंप के इस फैसले से भारतीय जेनेरिक दवा को कोई नुकसान नहीं है।
भारतीय वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से पहले ही कहा जा चुका है कि भारत व अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर दस्तावेज तो तैयार हो गए हैं, लेकिन इस पर हस्ताक्षर की अवधि तय नहीं है।
अमेरिका वैसे भी भारत के खिलाफ जबरन श्रम कराकर और क्षमता से अधिक उत्पादन करने के मामले में अपने व्यापार कानून के सेक्शन 301 के तहत जांच कर रहा था जिसकी रिपोर्ट पर कार्रवाई होनी है।
अगर कार्रवाई होती है तो अमेरिका भारत पर 12.5 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगा सकता है। इस बीच विदेशी मीडिया से यह भी खबर आ रही है कि अमेरिका व भारत के बीच व्यापार समझौता होने में तीन-चार महीने लग सकते हैं।
व्यापार समझौता टला, पर निर्यातकों को फिलहाल राहत
अमेरिका में लेदर आइटम व फुटवियर का निर्यात करने वाले आर.के. जालान कहते हैं, ‘24 जुलाई के बाद से हम पिछले साल दो अप्रैल से पहले वाले शुल्क के मुताबिक अमेरिका अपने माल को भेजेंगे। इसी दर पर हम अपने खरीदार से आर्डर भी ले रहे हैं।
पिछले साल दो अप्रैल से पहले हमारे आइटम पर 8.5 प्रतिशत का शुल्क लगता था जिन पर अभी 10 प्रतिशत को मिलाकर 18.5 प्रतिशत का शुल्क देना पड़ रहा है।‘
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशंस (फियो) के सीईओ व महानिदेशक अजय सहाय कहते हैं, ‘अभी किसी को नहीं मालूम है कि 24 जुलाई के बाद क्या होगा। शुल्क को लेकर काफी अनिश्चितता है।
लेकिन सिर्फ पिछले साल अप्रैल से पहले की दरों पर माल भेजने पर हमारे निर्यात को फायदा होगा। अमेरिका अगर 12.5 प्रतिशत का भी शुल्क लगाता है तो भी भारतीय निर्यात पर बहुत फर्क नहीं पड़ेगा।‘
व्यापार समझौते को लेकर वाणिज्य मंत्रालय साफ कर चुका है कि भारत को अगर अमेरिका के बाजार में अपने प्रतिद्वंद्वी देशों पर बढ़त मिलती है तो भारत को किसी भी दर पर अमेरिका से व्यापार समझौता करने में गुरेज नहीं है।
दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर जो सहमति बनी थी, उसके मुताबिक अमेरिका भारत पर 18 प्रतिशत का शुल्क लगा रहा था। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, इसलिए भारत व्यापार समझौते को लेकर काफी सोच-समझ कर कदम उठा रहा है।
