देहरादून, जेएनएन। सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमडी-एमएस के दाखिले की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद ने स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए काउंसिलिंग की अधिसूचना जारी कर दी है। जिसके तहत ऑल इंडिया काउंसिलिंग का प्रथम चक्र 12 से 24 मार्च के बीच आयोजित किया जाएगा। जबकि स्टेट काउंसिलिंग 25 मार्च से पांच अप्रैल के बीच होगी। 

बता दें, नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (एनबीई) ने छह जनवरी को नीट-पीजी का आयोजन किया था। इस परीक्षा का आयोजन एमडी-एमएस और मेडिकल के पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए किया जाता है। जनवरी अंत में परीक्षा का नतीजा घोषित किया गया था और तब से अभ्यर्थी काउंसिलिंग का इंतजार कर रहे थे। प्रदेश में दो राजकीय व दो निजी कॉलेजों में पीजी पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है। 

हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में 70, जबकि श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में पीजी की चार सीट हैं। इसके अलावा एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज में 95 व हिमालयन इंस्टीट्यूट, जौलीग्रांट में 80 सीटें हैं। इनमें 50 फीसद पर अखिल भारतीय व 50 फीसद पर राज्य कोटा के तहत दाखिले दिए जाते हैं। एचएनबी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. विजय जुयाल ने बताया कि काउंसिलिंग कार्यक्रम जारी होने के बाद विवि स्तर पर भी कार्रवाई की जा रही है।  अभ्यर्थी विवि की वेबसाइट देखते रहें। जल्द कार्यक्रम जारी किया जाएगा। 

ये है कार्यक्रम 

केंद्रीय काउंसिलिंग 

  • काउंसिलिंग का पहला चक्र-12 मार्च से 24 मार्च 
  • दाखिले की अंतिम तारीख-3 अप्रैल 
  • काउंसिलिंग का दूसरा चक्र-6 अप्रैल से 12 अप्रैल 
  • दाखिले की अंतिम तिथि-22 अप्रैल 

राज्य काउंसिलिंग 

  • काउंसिलिंग का पहला चक्र-25 मार्च से 5 अप्रैल 
  • दाखिले की अंतिम तारीख-12 अप्रैल 
  • काउंसिलिंग का दूसरा चक्र-15 अप्रैल से 26 अप्रैल 
  • दाखिले की अंतिम तिथि-3 मई 
  • मॉपअप राउंड-4 मई से आठ मई 
  • दाखिले की अंतिम तिथि-12 मई 
  • स्पॉट काउंसिलिंग-13 मई 
  • दाखिले की अंतिम तिथि-18 मई 

दाखिले की दस्तक, फीस तय नहीं

नीट-पीजी के दाखिले शुरू होने वाले हैं, पर निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस का मसला अब तक नहीं सुलझा है। नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के बाद फीस निर्धारण के लिए प्रवेश एवं शुल्क निर्धारण समिति का गठन किया गया था, पर यह कछुआ गति से काम कर रहा है। ऐसे में छात्र-छात्राओं को फिर दिक्कत उठानी पड़ सकती है। पिछले वर्षो में उच्च शिक्षा विभाग अपने स्तर से प्रवेश एवं शुल्क निर्धारण समिति गठित करता आया है। पिछले वर्ष समिति के अध्यक्षों के चयन पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई थी। 

हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस साल राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय नैनीताल से ही समितियों के लिए दो नाम मागे थे। हाईकोर्ट से नाम मिलने के बाद जस्टिस कुलदीप सिंह को प्रवेश एवं शुल्क निर्धारण समिति का अध्यक्ष व जस्टिस सुरेंद्र सिंह पाल को अपीलीय समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। पर नई समिति अभी तक फीस निर्धारित नहीं कर पाई है। बता दें, एमसीआइ का यह कड़ा नियम है कि काउंसलिंग से पहले ही सीट और शुल्क दोनों आवश्यक रूप से तय हो जाने चाहिए। 

वहीं, सुप्रीम कोर्ट भी राज्य सरकारों को इस बाबत निर्देश दे चुका है। गत वर्ष पीजी काउंसलिंग में शुल्क तय नहीं था, इसलिए सभी सीटों पर दाखिला लेने वाले छात्रों से शपथ पत्र लेकर दाखिला दे दिया गया। अब तक ये छात्र शपथ पत्र के आधार पर ही पढ़ाई कर रहे हैं। शपथपत्र में भी छात्रों ने यह लिखकर दिया है कि सरकार जो फीस निर्धारित करेगी, वह शुल्क अदा करेंगे। इस बार भी बिना शुल्क निर्धारण किए काउंसलिंग कराना मुश्किल भरा हो सकता है। बताया जा रहा है कि निजी मेडिकल कॉलेजों ने इस कारण स्टेट काउंसिलिंग से किनारा करने की तैयारी कर ली है। जिसका खामियाजा अभ्यर्थियों को उठाना पड़ सकता है।

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