नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। UPSC NDA: रक्षा सेनाओं में सरकारी नौकरी पाने की चाह लगभग सभी युवाओं में होती है। रक्षा मंत्रालय के अधीन भारतीय थल सेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय वायु सेना में काम करना सम्मान एवं प्रतिष्ठा, बेहतरीन जीवनशैली के साथ-साथ सर्वश्रेष्ठ कैरियर विकल्पों में से एक माना जाता है। इन तीनों ही सशस्त्र सेनाओं में अलग-अलग भर्ती प्रक्रियाएं अलग-अलग रैंक के लिए आयोजित की जाती हैं। वहीं, कई ऐसे मौके भी हैं जिनके जरिए उम्मीदवार तीनों ही सेनाओं की भर्ती प्रक्रिया में एकसाथ शामिल हो सकते हैं। इन्हीं में से एक है संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली एनडीए परीक्षा, जो कि 12वीं पास उम्मीदवारों को थल सेना में लेफ्टीनेंट, नौसेना में सब-लेफ्टीनेंट और वायु सेना में फ्लाइंग ऑफिसर के तौर पर सीधे अफसर बनने का मौका देती है।

यूपीएससी एनडीए परीक्षा

संघ लोक सेवा आयोग द्वारा राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के आर्मी, नेवी और एयर फोर्स विंग और नौसेना अकादमी में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय रक्षा अकादमी परीक्षा का आयोजन हर वर्ष दो बार किया जाता है। हालांकि, वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के चलते एनडीए 1 परीक्षा को एनडीए 2 परीक्षा के साथ ही आयोजित किया गया था। एनडीए परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए उम्मीदवारों को किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं (इंटरमीडिएट या सीनियर सेकेंड्री या हायर सेकेंड्री – 10+2) परीक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक होता है। हालांकि, वायु सेना एवं नौसेना के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथमेटिक्स विषयों के साथ 12वीं पास होना जरूरी होती है। हालांकि, 12वीं की बोर्ड परीक्षा में सम्मिलित होने जा रहे उम्मीदवार भी आवेदन के पात्र होते हैं, लेकिन इन उम्मीदवारों को निर्धारित तिथि तक उत्तीर्ण प्रमाण-पत्र जमा करना होता है। इसके अतिरिक्त उम्मीदवारों की आयु 16.5 वर्ष से कम और 19.5 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।

यूपीएससी एनडीए: चयन प्रक्रिया

यूपीएससी एनडीए की चयन प्रक्रिया में दो चरण होते हैं - लिखित परीक्षा और सेवा चयन बोर्ड (एसएसबी) टेस्ट और साक्षात्कार। एनडीए लिखित परीक्षा में 2.5 घंटे के दो पेपर होते हैं। ये प्रश्न पत्र गणित और सामान्य योग्यता परीक्षण विषयों के होते हैं। इन पेपरों के प्रश्न वस्तुपरक बहुविकल्पीय प्रकृति के अंग्रेजी एवं हिंदी दोनो ही भाषाओं में होते हैं। लिखित परीक्षा के पहले चरण में उत्तीर्ण घोषित उम्मीदवारों को चयन केन्रोंा  / वायु सेना चयन बोर्ड / नौसेना चयन बोर्ड द्वारा आयोजित होने वाले टेस्ट और साक्षात्कार के दूसरे चरण में सम्मिलित होना होता है। एसएसबी केंद्र पर उम्मीदवारों का शारीरिक मानक परीक्षण किया जाता है। दोनो चरणों और शारीरिक परीक्षण में योग्य पाए गये एसएसबी से अनुशंसित उम्मीदवारों की जांच सेना चिकित्सा अफसर बोर्ड द्वारा की जाती है।

प्रशिक्षण

एनडीए चयन प्रक्रिया और अन्य परीक्षणों में सफल घोषित उम्मीदवारों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के आर्मी, नेवी और एयर फोर्स विंग और नौसेना अकादमी में प्रशिक्षण के लिए प्रवेश दिया जाता है। प्रशिक्षण की अवधि तीन वर्ष होती है, जिसमें पहले ढाई वर्षों के दौरान एकेडेमिक तीनों ही सेनाओं के लिए एकसमान होती है, जिसे पूरा करने पर कैडेट्स को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की डिग्री (विंग के अनुसार बीए/बीएससी/बीएससी कंप्यूटर/बीटेक) दी जाती है। वहीं, नौसेना अकादमी के चयनित उम्मीदवारों को भारतीय नौसेना अकादमी, इझीमाला 4 वर्ष का शैक्षणिक एवं शारीरिक प्रशिक्षण दिया जाता है। इन कैडेट्स को बीटेक डिग्री दी जाती है। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी पास होने के बाद उम्मीदवारों को अलग-अलग सैन्य अकादमियों में प्रशिक्षण दिया जाता है।

नियुक्ति और वेतन

विभिन्न सैन्य अकादमियों में प्रशिक्षण के बाद कैडेट्स को सेना के विंग के अनुसार स्थायी कमीशन दिया जाता है। थल सेना में लेफ्टीनेंट, नौसेना में सब-लेफ्टीनेंट और वायु सेना में फ्लाइंग ऑफिसर के रैंक नियुक्ति दी जाती है। सेवा अकादमियों में प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को 7वें वेतन आयोग के पे-मैट्रिक्स लेवल 10 के अनुसार 56,100 रुपये प्रतिमाह का स्टाइपेंड दिया जाता है। इसके अतिरिक्त कई अन्य सुविधाएं एवं लाभ दिये जाते हैं। वहीं, लेफ्टीनेंट के तौर पर नियुक्ति होने पर लेवल 10 (रु. 56,100 – 1,77,500 रुपये) के अनुसार प्रतिमाह वेतन दिया जाता है। इसके अलावा सैन्य सेवा वेतन यानि एमएसपी (रु.15,500 प्रतिमाह) और कई प्रकार के भत्ते और राशन दिये जाते हैं।

थल सेना में लेफ्टीनेंट के तौर पर कमीशन प्राप्त करने बाद जनरल की रैंक तक प्रोन्नति दी जाती है। इसी प्रकार नौसेना में सब-लेप्टीनेंट के कमीशन के बाद एडमिरल तक और वायु सेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनने के बाद एअर चीफ मार्शल की रैंक तक प्रमोशन दिया जाता है।

Edited By: Rishi Sonwal