जॉन ऑफ आर्क के 600 साल
झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की तरह ही फ्रांस की जॉन ऑफ आर्क ने बेजोड़ नेतृत्व क्षमता के दम पर अपने दे

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की तरह ही फ्रांस की जॉन ऑफ आर्क ने बेजोड़ नेतृत्व क्षमता के दम पर अपने देश को आजाद कराया था।
6 जनवरी, 1412 को फ्रांस के एक किसान परिवार में जन्मी जॉन ऑफ आर्क को फ्रंास की राष्ट्रीय नायिका माना जाता है। 12 साल की उम्र में जॉन ऑफ आर्क को अपने देश की आजादी की चिंता थी। जॉन हमेशा कहती थीं कि उन्हें ईश्वर का आदेश मिला है कि वे फ्रांस को अंग्रेजों से मुक्त कराएं। गौरतलब है कि सौ वर्षो के युद्ध के अंतिम वर्षो में इंग्लैंड ने फ्रांस के काफी भूभाग पर कब्जा कर लिया था। गुलाम फ्रांस के राजा चार्ल्स सप्तम को जब जॉन के बारे में पता चला, उन्होंने सेना का नेतृत्व उसे सौंपना सही समझा। उस समय चार्ल्स सप्तम का राज्याभिषेक नहीं हुआ था। आदेश मिलते ही जॉन ने अपने कमाल की नेतृत्व क्षमता से सेना में जोश भरना शुरू किया। जॉन के नेतृत्व में सेना सीधी लड़ाई में यकीन करने लगी। अंत में जॉन ऑफ आर्क के नेतृत्व में देश अंग्रेजों से मुक्त हुआ और चार्ल्स सप्तम का राज्याभिषेक भी हुआ। पर जॉन ऑफ आर्क को इस आजादी की कीमत अपने प्राण देकर चुकानी पड़ी। अंग्रेजों ने उन्हें जिंदा जला दिया था। तब वे केवल 19 साल की थीं। 24 साल बाद चार्ल्स सप्तम के अनुरोध पर पोप कैलिक्स्टस तृतीय ने जॉन को शहीद की उपाधि और 1920 में संत की उपाधि से सम्मानित किया गया।
जॉन ऑफ आर्क से प्रेरित होकर विलियम शेक्सपियर, वोल्टेयर, फ्रेडरिक शिलर, जिसेप वर्दी, प्योत्र ईलिच चाइकौव्स्की, मार्क ट्वेन, बर्तोल्त ब्रैख्त और जॉर्ज बर्नार्ड शॉ जैसे लेखकों ने कई पुस्तकों की रचना की है। कई फिल्में भी इस महान नेत्री पर बन चुकी हैं।
[फीचर डेस्क]
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