जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। रेस्टोरेंट के व्यापार में भरोसा ही सबकुछ है। ग्राहक का एक बार भरोसा जीतने के बाद इसे कायम रखना बेहद जरूरी होता है। यही भरोसा अल्फा-1 सेक्टर स्थित कमर्शियल बेल्ट में ढाबा यूपी 16 के ग्राहकों को लॉकडाउन के बाद वापस लाया। अब हर महीने ग्राहकों की तादाद बढ़ रही है। दो भाई, योगेश और मनीष भाटी इस रेस्टोरेंट को चलाते हैं। काम शुरू हुए अभी बस डेढ़ साल ही हुए हैं। 

पिता के काम को आगे बढ़ाया

योगेश ने होटल मैनेजमेंट और मनीष ने मास कम्युनिकेशन कोर्स किया हुआ है। योगेश बताते हैं कि पिता महेश भाटी प्रोफेशनल शेफ हैं। वर्ष 1991 में नोएडा के भंगेल में तबक नाम से रेस्टोरेंट शुरू किया गया था। करीब तीन वर्ष संचालित करने के बाद वह दिल्ली स्थित फाइव स्टार होटल में नौकरी करने लगे। इसके बाद विभिन्न देशों के होटल व रेस्टोरेंट में काम करने चले गए। व्यस्तता से रेस्टोरेंट का सपना पूरा नहीं हो पा रहा था। दोनों भाइयों ने पिता का अधूरा सपना पूरा करने के लिए ढाबा यूपी 16 की शुरुआत की। पहले पिता संग मिलकर खुद काम किया। अच्छा खाना खिलाया, तो ग्राहक आने लगे। काम बढ़ा तो कुक और स्टाफ भी रख लिया। बगल की दुकान भी किराए पर ले ली। कोरोना काल से पहने रोजाना 200 से अधिक लोग खाना खाने आते थे। इस समय लगभग 20 स्टाफ काम कर रहे हैं। कोरोना ने निश्चित तौर पर कारोबार को लेकर दुश्वारियां खड़ी कीं। आइए, जानते हैं कि किन समाधानों से इन दुश्वारियों पर जीत हासिल की गई...

समाधान 1: कोविड प्रोटोकॉल का रखा पूरा ध्यान, ग्राहकों का भरोसा रहा बरकरार

अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हुई, तो काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। संक्रमण के डर से अधिकतर लोग बाहर खाने नहीं आ रहे थे। विश्वास था कि रेस्टोरेंट द्वारा कायम किए गए भरोसे के बदौलत लोग आएंगे। ऐसा हुआ भी। लोग धीरे-धीरे आने लगे। रेस्टोरेंट की तरफ से भी सरकार के कोविड दिशा-निर्देशों का पूरा पालन किया गया। सैनिटाइजिंग से लेकर स्टाफ द्वारा मास्क पहनना, शारीरिक दूरी, खाना बनाने और परोसने में स्वच्छता आदि का ध्यान रखा गया। लॉकडाउन के बाद शुरू दिन जहां एक भी कस्टमर नहीं था, आज 60 फीसद ग्रोथ रेट है। जनवरी-फरवरी तक करीब 20 फीसद ग्रोथ रेट और हासिल कर लेने का लक्ष्य है। 

(ढाबा यूपी 16 को योगेश और मनीष भाटी चलाते हैं)

समाधान 2: कर्मचारियों का दिया साथ, तो कारोबार में भी मिली मदद

करीब चार महीने तक लॉकडाउन का पीरियड रहा। इस दौरान किसी कर्मचारी को काम से नहीं निकाला। सबके लिए रहने की व्यवस्था की हुई थी। राशन आदि का भी प्रबंध कराया। इस दौरान सबको आधे महीने का वेतन देते रहे। इससे कर्मचारियों ने भी कारोबार का पूरा साथ दिया। 

समाधान 3: ग्राहकों के सुझाव व शिकायतों पर किया अमल

योगेश बताते हैं कि किसी ग्राहक द्वारा खाने में किसी तरह की शिकायत और सुझाव मिलने पर तुरंत संज्ञान लिया जाता है। खाने में उस कमी को पूरी कर ग्राहक को टेस्ट कराया जाता है। इसके किसी तरह के पैसे भी नहीं लिए जाते। खाने के स्वाद और क्वालिटी की बदौलत मार्केटिंग की जरूरत नहीं पड़ी। पिता के द्वारा ईजाद किए हुए कुछ व्यंजन रेस्टोरेंट की विशेषता हैं।

सामाजिक दायित्व का भी रखा ख्याल

लॉकडाउन में सबकुछ बंद था। गरीब तबके से आने वाले लोगों को खाने की दिक्कतें आने लगी थीं। रेस्टोरेंट भी बंद था। ऐसे में घर पर ही खाना बनाकर रोजाना बांटा गया। करीब डेढ़ महीने तक रोजाना लगभग 200 लोगों को मुफ्त भोजन बांटा गया। रेस्टोरेंट की तरफ से रोजाना गरीब बच्चों को मुफ्त खाना खिलाया जाता है। योगेश बताते हैं कि शायद इन बच्चों की दुआ का ही असर है कि ग्राहकों की तादाद रोजाना बढ़ ही रही है। 

अब लोग उठाएंगे लड्डू यूपी 16 का मजा

योगेश ने बताया कि अगले सप्ताह से लड्डू यूपी 16 नाम से नई दुकान की शुरुआत होने जा रही है। यह दुकान पूरी तरह से लड्डूओं को समर्पित होगी। लोगों को चार तरह के खास लड्डूओं का स्वाद चखने को मिलेगा। सभी को शुद्घ देशी घी में तैयार किया जाएगा।