मशीनीकरण ने कैसे धान की कटाई, मड़ाई और भंडारण को आसान और सस्ता बना दिया? आइए जानते हैं

How did mechanization make harvesting threshing and storage
Publish Date:Fri, 12 Nov 2021 06:12 PM (IST)Author: Author: Nitesh

ब्रांड डेस्क। देश में हर साल बड़े पैमाने पर धान का उत्पादन होता है। लेकिन, कटाई से लेकर भंडारण तक लगभग 10 फीसदी धान ख़राब हो जाता है, जिसका नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है। इसकी सबसे बड़ी वजह है किसानों को धान कटाई, मड़ाई तथा भंडारण के सही तरीकों का अभाव होना। ऐसे में इस नुकसान को रोकने के लिए किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर ही धान की कटाई, मड़ाई और भंडारण के उचित इंतज़ाम करना चाहिए। ताकि किसानों की मेहनत बेकार न जाए।

गौरतलब हैं कि धान की विभिन्न किस्म 85 से 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। फसल के अच्छी तरह पक जाने के कटाई की जाती है। इसके बाद थ्रेसिंग और अंत में धान का भंडारण किया जाता है। कटाई से अनाज को घर लाने तक किसानों को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ता है। तो आइए जानते हैं आधुनिक मशीनीकरण ने कैसे धान की कटाई, मड़ाई और भंडारण को आसान और सस्ता बना दिया है-

सही समय पर करें धान की कटाई

पारंपरिक विधि से कटाई - आमतौर पर धान की कटाई पारंपरिक तरीके से की जाती है। जब धान की फसल अच्छी तरह पक जाए, तब मजदूरों की

मदद से फसल की मैन्युअली कटाई कराई जाती है। हंसिया या दराते की मदद से जमीन से 15 से 25 सेंटीमीटर ऊपर से धान की कटाई की जाती है। पारंपरिक तरीके से धान कटाई में समय, श्रम और खर्च अधिक लगता है। कटाई के समय मजदूरों के नहीं मिलने के कारण प्रति हेक्टेयर की कटाई में ही 25 से 30 दिनों को समय लग सकता है। वहीं फसल को इकट्ठा करने और ढोने में अतिरिक्त समय लगता है। कई बार मजदूरों के नहीं मिलने के कारण खड़ी फसल से दाना बिखरने लगता है, जिससे किसानों को फसल का नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे जब दाना पूरी तरह पक गया हो और पुआल जैसा पीला पड़ गया हो कटाई शुरू कर देना चाहिए।

कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई-

अब कई तरह की मशीनें आ गई है जिससे धान की कटाई आसानी से की जा सकती है। कंबाइन हार्वेस्टर भी ऐसी ही मशीन है। इससे धान की कटाई, गहाई, बीज तथा दाने की सफाई आसानी से की जा सकती है। जब धान के दाने में 20 से 25 प्रतिशत नमी बची हो तथा 80 फीसदी बालियां भूसे के रंग की हो गई हो तब कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई कराना चाहिए। ट्रैक्टर चलित कंबाइन हार्वेस्टर से धान की कटाई कराने से समय, श्रम और पैसों तीनों की बचत होती है। ट्रैक्टर कंबाइन हार्वेस्टिंग के लिए महिंद्रा अर्जुन नोवो या महिंद्रा 585 XP Plus ट्रैक्टर्स का उपयोग किया जा सकता है। महिंद्रा अर्जुन नोवो के 30 गियर्स धान की सटीक कटाई करने में मददगार है। इसी तरह महिंद्रा 585 XP Plus कम समय में, कम ईंधन खर्च में धान की सटीक कटाई करने में सक्षम है। वहीं इन दोनों ट्रैक्टर्स रखरखाव भी आसान है।

धान की मड़ाई या थ्रेसिंग-

अगर धान की कटाई पारंपरिक तरीके से या रीपर की मदद से की है तो बैलों या थ्रेसर की मदद से मड़ाई की जाती है। इसके लिए सबसे पहले फसल को ट्रैक्टर या अन्य वाहनों की मदद से खलियान में लाए। यहां फसल में कुछ दिनों अच्छी धूप लगने दें। इसके बाद थ्रेसर की मदद से अनाज और भूसे का अलग कर लें।

पारंपरिक कटाई की तुलना में कंबाइन हार्वेस्टर से धान की कटाई कैसे फायदेमंद हैं-

समय की बचत

पारंपरिक कटाई की तुलना में हार्वेस्टर से धान कटाई में समय की बचत होती है। धान किसानों का कहना हैं कि पारंपरिक कटाई के लिए मजदूर मुश्किल से मिल पाते हैं। वहीं इसमें समय भी अधिक लगता है। एक एकड़ धान की कटाई के लिए 10 से 12 मजदूरों की जरुरत पड़ती है। कई बार समय पर मजदूर मिल नहीं पाते हैं। इस वजह से फसल ख़राब होने का अंदेशा रहता है। वहीं हार्वेस्टर से आसानी से कुछ ही घंटों में कटाई हो जाती है।

अधिक खर्च-

धान की पारंपरिक कटाई में खर्च भी अधिक आता है। एक एकड़ की कटाई में 2500 रुपए तथा मड़ाई में 2000 रुपये खर्च करना पड़ते हैं। वहीं हार्वेस्टर मशीन से महज 2000 रुपए में धान की कटाई और मड़ाई हो जाती है। धान की कटाई और मड़ाई के लिए Mahindra Arjun Novo 605 Combine Harvester बेहद उपयोगी है। दरअसल, यह किसानों के बजट में बिल्कुल फिट बैठती है। इसके हार्वेस्टर की कटर बार की चौड़ाई 11.81 फीट होती है। यह 57 एचपी और 3532 सीसी इंजन क्षमता के साथ आता है। इसमें 4 सिलेंडर वाला वाटर कूल्ड इंजन भी दिया गया है। इसमें 15 फॉरवर्ड + 3 रिवर्स गियर्स दिए गए हैं।

मजदूरों की समस्या –

पिछले कुछ समय से देश में श्रम संसाधन काफी घट गए हैं। वहीं फसलों की कटाई के लिए मजदूर आसानी से नहीं मिल पाते हैं। ऐसे आधुनिक कृषि उपकरणों का उपयोग खेती के लिए फायदेमंद होता जा रहा है।

धान को सुखाना-

थ्रेसिंग के बाद धान में 20-25 फीसदी नमी होती है। ऐसे में अनाज को सीधे भंडारित किये जाने पर नमी, घुन, दीमक, कवक, चूहें आदि नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में धान का उचित भंडारण करना बेहद आवश्यक है। इसके लिए सबसे पहले धान को धूप में अच्छी तरह सूखा लेना चाहिए। थ्रेसिंग के 24 के घंटे बाद ही अनाज को अच्छी तरह से सूखा लें। धान को पारंपरिक तरीके से सुखाने में किसी तरह का खर्च नहीं आता है। इसके लिए चटाई पर अनाज को अच्छी तरह फैलाकर अच्छी धूप लगने दें।

भंडारण से पहले अनाज को दो से तीन दिनों के लिए धूप में अच्छी तरह से सुखा लेना चाहिए। यदि अनाज को केवल एक सप्ताह के लिए स्टोरेज रखना है तो अनाज में 14 प्रतिशत से नमी होना चाहिए। वहीं धान को 8 से 12 महीनों के लिए स्टोरेज रखना है तो अनाज में 13 प्रतिशत नमी होना चाहिए। वहीं एक साल या अधिक समय तक स्टोरेज रखना है तो अनाज में केवल 9 प्रतिशत तक नमी हो।

अनाज की सफाई-

अनाज को भंडारण से पहले अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए। इसके लिए पंखे या हवा की मदद से अनाज से भूसे या अन्य कचरे को साफ किया जा सकता है। वहीं आजकल अनाज को साफ करने की कई तरह की मशीनें भी आती है। जिससे अनाज साफ करने में समय भी कम लगता है।

पैकेजिंग और भंडारण-

धान को विपरीत मौसम, घुन, दीमक, सूक्ष्म जीवों इत्यादि से बचाने के लिए सुरक्षित तरीके से भंडारित करना बेहद जरुरी है। इसके लिए सबसे पहले अनाज को जूट या प्लास्टिक से बने 40 से 80 किलोग्राम के बैग में भरें। इन बैगों को फार्म या स्टोरेज हाउस में भंडारित करें।

हर्मेटिक बैग्स - अनाज को भरने के लिए हर्मेटिक बैग्स का प्रयोग करें। यह अनाज को कीटों आदि से सुरक्षा देने में कारगर है। विपरीत परिस्थतियों में भी धान ख़राब नहीं होता है। इनमें पैकिंग करने पर धान को लंबे समय तक भंडारित किया जा सकता है।

सुपरबैग-अनाज को सुरक्षित रखने के लिए आईआरआरआई (अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान ) ने यह बैग तैयार किए है। इसमें अनाज को भरकर सुरक्षित भंडारण किया जा सकता है।

अनाज को अधिक दिनों तक भंडारित कैसे करेें-

1. भंडारित करते समय अनाज में 14 फीसदी या उससे कम नमी होना चाहिए। भण्डारण गृह के आसपास नमी नहीं होनी

चाहिए।

2. साथ ही चूहों, कवक अन्य सूक्ष्म जीवों से सुरक्षित रखने के लिए पुख्ता इंतजाम होना चाहिए।

3. भण्डारण से पहले गृह को कीटमुक्त करने के लिए मेलाथियान 50% का घोल बनाकर दीवारों तथा फर्श को अच्छी तरह से

साफ कर लेना चाहिए।

4. बता दें कि अधिक नमी, बारिश होने या फिर बादल छाए रहने पर धान का भंडारण नहीं करना चाहिए।

यह आर्टिकल ब्रांड डेस्‍क द्वारा लिखा गया है।

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