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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 23, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

'लोग नहीं, नेता होते हैं जातिवादी', गडकरी बोले- जातिगत भेदभाव को खत्म होना चाहिए

By Agency Edited By: Jeet Kumar
Published: Sun, 23 Mar 2025 06:14 AM (IST)

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को जाति को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की आलोचना करते हुए ...और पढ़ें

गडकरी ने जाति को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की आलोचना की (फाइल फोटो)
गडकरी ने जाति को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की आलोचना की (फाइल फोटो)

HighLights

  1. इस बात की होड़ लगी हुई है कि कौन ज्यादा पिछड़ा- गडकरी
  2. जाति को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की आलोचना की

पीटीआई, अमरावती। केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता नितिन गडकरी ने शनिवार को कहा कि लोग जातिवादी नहीं होते, बल्कि नेता अपने स्वार्थ के लिए जातिवादी होते हैं। वह एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

इस बात की होड़ लगी हुई है कि कौन ज्यादा पिछड़ा- गडकरी

उन्होंने कहा कि इस बात की होड़ लगी हुई है कि कौन ज्यादा पिछड़ा है। सामाजिक असमानता को खत्म करने की आवश्यकता है। जातिगत भेदभाव को खत्म होना चाहिए। इसकी प्रक्रिया ''स्वयं से'' शुरू होनी चाहिए।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को जाति को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की आलोचना की और तर्क दिया कि वास्तविक सामाजिक उत्थान के बजाय चुनावी लाभ के लिए कृत्रिम रूप से विभाजन पैदा किया जाता है।

उन्होंने राजनीति की पुनर्परिभाषा का आह्वान किया

अमरावती में डॉ. पंजाबराव उर्फ ​​भाऊसाहेब देशमुख मेमोरियल अवार्ड समारोह में बोलते हुए उन्होंने राजनीति की पुनर्परिभाषा का आह्वान किया, जिसमें पहचान-आधारित वोट-बैंक रणनीतियों पर विकास को प्राथमिकता दी जाती है। गडकरी ने कहा कि पिछड़ेपन पर चर्चा सामाजिक न्याय से हटकर राजनीतिक वार्ता में सौदेबाजी की चिप बन गई है।

इस पर जोर देते हुए गडकरी ने कहा कि सच्चे नेतृत्व के लिए पोस्टर या विज्ञापनों की जरूरत नहीं होती। राजनीति को आत्म-प्रचार के बजाय समाज सेवा पर आधारित होना चाहिए। नेता चुनावी लाभ के लिए अपने समुदायों को अधिक पिछड़ा साबित करने की होड़ में लगे हैं।

मैं अपनी शर्तों पर राजनीति करूंगा- गडकरी

आगे उन्होंने कहा कि मैंने चुनाव लड़ा और लोगों से साफ कहा कि मैं अपनी शर्तों पर राजनीति करूंगा, चाहे वे मुझे वोट दें या नहीं। मेरा कर्तव्य बिना किसी पक्षपात या समझौते के सभी के विकास के लिए काम करना है। साथ ही उन्होंने चुनावों की बढ़ती लेन-देन वाली प्रकृति पर दुख जताया और प्रचार पर अत्यधिक धन खर्च किए जाने पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि राजनीति को केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। हमें इसके उद्देश्य को फिर से परिभाषित करना चाहिए और अत्यधिक चुनावी खर्च को समाप्त करना चाहिए।

गडकरी ने अपने पुराने दिनों को याद किया

मेलघाट के आदिवासी क्षेत्र में काम करने के अपने अनुभव को याद करते हुए गडकरी ने गंभीर कुपोषण और गरीबी के अपने प्रत्यक्ष अनुभव का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के लोक निर्माण मंत्री के रूप में उन्होंने इस क्षेत्र का दौरा किया और सड़कों, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छ पेयजल और स्कूलों की अनुपस्थिति देखकर चौंक गए थे।

उन्होंने कहा कि मुझे अभी भी वह भयावह सच्चाई याद है - हजारों बच्चे कुपोषण के कारण मर रहे थे, चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं थी और आदिवासी परिवार बुनियादी सेवाओं से कटे हुए थे। यह देखकर दिल टूट गया कि आजादी के दशकों बाद भी ऐसी स्थितियां मौजूद थीं।

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