नागपुर: 1.95 करोड़ नकद, बैंक में 40 लाख और बेनामी संपत्ति... प्रॉपर्टी धोखाधड़ी मामले में बिल्डर के ठिकानों पर ED की रेड
ईडी ने नागपुर में जमीन और फ्लैट धोखाधड़ी मामले में प्रयाग डेवलपर्स के मालिक के ठिकानों पर छापा मारा। इस ...और पढ़ें


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डिजिटल डेस्क, मुंबई। ईडी ने महाराष्ट्र के नागपुर में जमीन और फ्लैट से जुड़ी धोखाधड़ी के एक मामले में दो ठिकानों पर छापामारी की है। इस कार्रवाई में एजेंसी ने 1.95 करोड़ रुपये की अघोषित नकदी जब्त की। साथ ही बैंक खातों में जमा 40 लाख रुपये से अधिक की रकम को फ्रीज कर दिया।
अधिकारियों के अनुसार, यह तलाशी 26 अक्टूबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मेसर्स प्रयाग डेवलपर्स एंड बिल्डर्स के मालिक शशांक गोविंद प्रसाद पांडेय से जुड़े ठिकानों पर की गई थी।
दस्तावेज, नकदी और बेनामी संपत्तियों की बरामदगी
तलाशी के दौरान जांच अधिकारियों को बड़ी संख्या में अहम दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई। इसके साथ ही अपराध की कमाई से खरीदी गई कई अचल संपत्तियों की भी पहचान की गई है, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये में आंकी गई है।
ईडी ने यह जांच नागपुर शहर के अजनी और राणाप्रतापनगर थानों में भारतीय दंड संहिता की धारा 418 और 420 (धोखाधड़ी) के तहत दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर शुरू की थी।
बुजुर्ग विधवा से ₹9.4 करोड़ की ठगी
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी शशांक पांडेय लंबे समय से लोगों को ठगने का काम कर रहा था। एक मामले में उसने एक बुजुर्ग विधवा महिला की जमीन के डेवलपमेंट का एग्रीमेंट किया था।
इस करार के तहत उसे पीड़िता को 1.75 करोड़ रुपये नकद और 14 आवासीय फ्लैट देने थे। शुरुआत में महिला के नाम पर फ्लैट तय कर दिए गए, लेकिन बाद में आरोपी ने महिला को बिना बताए फर्जी तरीके से दस्तावेज रद कर दिए और वे सभी 14 फ्लैट तीसरे पक्षों को बेच दिए।
फ्लैट बेचकर मिले 8.93 करोड़ रुपये आरोपी ने अपने निजी इस्तेमाल के लिए हड़प लिए। इसके अलावा एग्रीमेंट के तहत दिए जाने वाले 45 लाख रुपये भी महिला को नहीं दिए गए। इस तरह आरोपी ने बुजुर्ग पीड़िता को कुल 9.4 करोड़ रुपये का भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
बैंक में गिरवी रखे फ्लैट्स को धोखे से बेचा
धोखाधड़ी का एक अन्य मामला दिव्या प्रयाग अपार्टमेंट प्रोजेक्ट से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि पांडेय ने 22 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट लोन के एवज में 22 फ्लैट्स डीएचएफएल के पास गिरवी रखे थे, जिसमें से 11 करोड़ रुपये का लोन जारी भी हो चुका था।
आरोपी ने कर्जदाता वित्तीय संस्थान से बिना एनओसी लिए और खरीदारों को गिरवी की बात बताए बिना ही वे फ्लैट सीधे ग्राहकों को बेच दिए।
इतना ही नहीं, उसने होम लोन लेने के लिए बैंक में झूठा हलफनामा जमा किया और फ्लैट्स के पहले से गिरवी होने की बात छिपाई। बाद में इस पर 12.84 करोड़ रुपये का बकाया खड़ा हो गया, जिसके चलते वित्तीय संस्थान ने सरफेसी कानून के तहत नीलामी व जब्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी।
अधिकारियों का कहना है कि तथ्यों को छिपाकर फ्लैट खरीदारों के साथ बड़ा धोखा किया गया। मामले में जांच जारी है और आगे की कड़ियों को खंगाला जा रहा है।
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