बिहार फॉर्मूला महाराष्ट्र में क्यों नहीं हो सकता लागू? BJP ने बता दी अंदर की बात; CM पर सस्पेंस बरकरार
महाराष्ट्र में नया मुख्यमंत्री कौन होगा? सीएम के नाम को लेकर अभी भी सस्पेंस बरकरार है। महाराष्ट्र में शीर्ष पद कौन लेगा - देवेंद्र फडणवीस या एकनाथ शिंदे? इस पर महायुति गठबंधन के भीतर गहन विचार-विमर्श के बीच भारतीय जनता पार्टी ने संकेत दिया कि राज्य में मुख्यमंत्री पद के लिए बिहार के फार्मूले को दोहराने का कोई सवाल ही नहीं है।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र में हुए चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद अब सबकी नजरें महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री पर हैं। वहीं, महाराष्ट्र में शीर्ष पद कौन लेगा - देवेंद्र फडणवीस या एकनाथ शिंदे - इस पर महायुति गठबंधन के भीतर गहन विचार-विमर्श के बीच, भारतीय जनता पार्टी ने संकेत दिया कि राज्य में मुख्यमंत्री पद के लिए बिहार के फार्मूले को दोहराने का कोई सवाल ही नहीं है।
मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने संवैधानिक बाध्यता के तहत अपने पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस बरकरार है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने बताया, सबसे पहले, नीतीश कुमार को सीएम बनाने की घोषणा चुनाव से पहले की गई थी। महाराष्ट्र में शिवसेना से ऐसी कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई गई थी। दूसरी बात, हमने बिहार में जनता दल (यूनाइटेड) के साथ गठबंधन किया ताकि भाजपा राज्य में अपनी पैठ बना सके, जो नहीं हुआ। इसलिए महाराष्ट्र में भी ऐसा करने का सवाल ही नहीं उठता।
महाराष्ट्र में लागू नहीं होगा बिहार मॉडल
प्रेम शुक्ला ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि बिहार में लागू मॉडल महाराष्ट्र के लिए सही नहीं है। महाराष्ट्र में इस तरह की प्रतिबद्धता की कोई वजह नहीं है, क्योंकि हमारे पास मजबूत संगठनात्मक आधार और नेतृत्व है। सबसे बड़ी बात यह है कि पार्टी ने चुनाव के बाद भी एकनाथ शिंदे को सीएम बनाए रखने की कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई। इसके विपरीत, शीर्ष नेतृत्व ने पूरे चुनाव के दौरान यही कहा कि सीएम पर फैसला चुनावी नतीजों के आधार पर होगा।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के चुनाव समन्वयक रावसाहेब दानवे ने शिवसेना के कुछ नेताओं के इस दावे को खारिज कर दिया कि चुनाव से पहले शिंदे को शीर्ष पद का वादा किया गया था।
उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री चुनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। दो पार्टियों ने पहले ही अपने विधायक दल के नेता नियुक्त कर दिए हैं और भाजपा जल्द ही एक नेता का चयन करेगी।
कुछ भाजपा नेताओं ने कहा कि शिवसेना नेताओं द्वारा शिंदे को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाने की कोशिश केंद्रीय नेतृत्व को रास नहीं आई। यह बात पार्टी को बता दी गई, जिसके बाद मंगलवार सुबह वर्षा निवास में शिवसेना नेताओं द्वारा आयोजित शक्ति प्रदर्शन को रद कर दिया गया।
शिवसेना के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, भाजपा ने शिंदे को बता दिया है कि मुख्यमंत्री का पद पार्टी के पास ही रहेगा।
एकनाथ शिंदे ने दिया इस्तीफा
पिछली सरकार में दो उपमुख्यमंत्री रहे देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के साथ एकनाथ शिंदे ने राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की, जिन्होंने शिवसेना नेता को नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण तक कार्यवाहक पद पर बने रहने को कहा।
स्थिति की गंभीरता इसलिए पैदा हुई क्योंकि निवर्तमान विधानसभा का कार्यकाल मंगलवार (26 नवंबर) को समाप्त हो गया। महायुति गठबंधन ने हाल के चुनावों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया, 288 में से 230 सीटें जीतीं। अकेले भाजपा ने 132 सीटें हासिल कीं, जिससे फडणवीस सीएम पद के लिए सबसे पसंदीदा उम्मीदवार बन गए, उसके बाद शिवसेना के शिंदे गुट ने 57 सीटें और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने 41 सीटें जीतीं।
महाराष्ट्र के सीएम के नाम की घोषणा होगी आज
शिवसेना प्रवक्ता संजय शिरसाट ने संकेत दिया कि मुख्यमंत्री पद के बारे में स्पष्टता मंगलवार रात या बुधवार सुबह तक सामने आ जाएगी, क्योंकि शिंदे, फडणवीस और पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ चर्चा की है।
समाचार एजेंसी पीटीआई ने शिरसाट के हवाले से कहा, तीनों नेता शाम को बैठक करेंगे और उचित निर्णय लेंगे, जिसकी जानकारी बाद में मीडिया को दी जाएगी।
इससे पहले मंगलवार को शिरसाट ने कहा था कि चूंकि विधानसभा चुनाव शिंदे के नेतृत्व में लड़े गए थे, इसलिए लोगों में आम धारणा है कि उन्हें मुख्यमंत्री बने रहना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री पद के संबंध में भाजपा के शीर्ष नेताओं के रुख के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।
रामदास अठावले ने किया देवेंद्र फडणवीस का समर्थन
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने नई दिल्ली में कहा कि भाजपा ने फडणवीस को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया है, हालांकि पार्टी ने इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं की है। नाम न बताने की शर्त पर एक भाजपा नेता ने इस बात पर जोर दिया कि जब तक मंत्रियों के विभागों का बंटवारा अंतिम रूप नहीं ले लेता, पार्टी अपने उम्मीदवार की घोषणा करने में जल्दबाजी नहीं करेगी।
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