मुंबई, राज्य ब्यूरो। Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में दशहरा के दिन मुंबई में शिवसेना (Shiv Sena) के दोनों गुटों की रैलियां तो हो गईं। लेकिन एक-दूसरे पर जवाबी हमले अभी भी जारी हैं। शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में लिखा गया है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) गुट ने बीकेसी मैदान में हुई अपनी रैली में 50 से 100 करोड़ रुपये तक खर्च किए हैं। क्योंकि इस रैली में शिंदे समर्थकों को लाने के लिए दो हजार बसों की व्यवस्था की गई थी। रैली में आए करीब दो लाख लोगों के भोजन की व्यवस्था की गई थी।

शिवसेना के दोनों गुटों में खर्च और आरोपों को लेकर घमासान जारी

सामना के अनुसार, बीकेसी मैदान में हुई यह रैली वास्तव में भाजपा के समर्थन से हुआ एक आयोजन था। यह आयोजन किसी फैशन शो की तरह था। इस पर उसी तरह खर्च किया गया, जैसे कुछ विधायकों को खरीदने के लिए खर्च किया जा रहा हो। सामना के अनुसार, रैली भले शिवसेना के नाम पर आयोजित की गई हो, लेकिन वास्तव में यह भाजपा का ही आयोजन थी, क्योंकि इसके मुखिया (शिंदे) रैली में मोदी-शाह चालीसा पढ़ते नजर आए। लगता है कि इस रैली के भाषण, डायलाग व चरित्र सब कुछ भाजपा ने ही लिखकर दिए थे।

नारायण राणे बोले, उद्धव हिंदुत्व पर न ही बोलें तो अच्छा है

दूसरी ओर, भाजपा नेता व केंद्रीय लघु उद्योग मंत्री नारायण राणे दशहरा रैली में उद्धव ठाकरे द्वारा दिए गए भाषण पर उन्हें घेरते दिखाई दिए। शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि शिवाजी पार्क में बाला साहब ठाकरे बोलते थे, तो उससे हम लोगों को प्रेरणा मिलती थी। सामाजिक काम करने का उत्साह मिलता था। उद्धव ठाकरे ने तो सिर्फ गाली देने का काम किया है। यह रैली नहीं, एक तमाशा था। उद्धव ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह पर जमकर प्रहार किए थे। इस पर उद्धव को घेरते हुए नारायण राणे ने कहा कि वह मोदी और शाह पर बोलने वाले होते कौन हैं? उद्धव सिर्फ बड़े लोगों पर बोलकर बड़ा बनना चाहते हैं। राणे के अनुसार, उद्धव ठाकरे ने हिंदुत्व के साथ गद्दारी की है। वह हिंदुत्व पर न ही बोलें तो अच्छा है। 

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Edited By: Sachin Kumar Mishra

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