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कोई भी यह दावा नहीं करता कि लंदन से लाए गए 'वाघ नख' का इस्तेमाल शिवाजी महाराज ने किया था: मंत्री सुधीर

छत्रपति शिवाजी महाराज के लंदन से लाए जा रहे वाघ नख को लेकर महाराष्ट्र के इतिहासकार ने बड़ा दावा किया है। इतिहासकार का मानना है कि शिवाजी का बाघ के पंजे के आकार का हथियार राज्य के सतारा जिले में ही मौजूद है। मंत्री सुधीर ने सदन को बताया कि वाघ नख को तीन वर्षों की अवधि के लिए लंदन से लाया जाएगा।

By Jagran News Edited By: Versha Singh Thu, 11 Jul 2024 03:51 PM (IST)
कोई भी यह दावा नहीं करता कि लंदन से लाए गए 'वाघ नख' का इस्तेमाल शिवाजी महाराज ने किया था: मंत्री सुधीर
शिवाजी महाराज के 'वाघ नख' को लेकर मचा बवाल (फाइल फोटो)

पीटीआई, मुंबई। महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार ने पिछले साल लंदन के एक संग्रहालय से छत्रपति शिवाजी महाराज के वाघ नख को वापस लाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। वहीं अब महाराष्ट्र के एक इतिहासकार इंद्रजीत सावंत ने दावा किया है कि लंदन से लाया जा रहा शिवाजी का 'वाघ नख' असली नहीं है। जिस दावे का राज्य सरकार ने खंडन किया है।

संग्रहालय के पास नहीं है कोई सबूत- मंत्री

महाराष्ट्र के मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने गुरुवार को विधानसभा में कहा कि किसी ने यह दावा नहीं किया है कि लंदन से राज्य में लाया जा रहा 'वाघ नख' या बाघ के पंजे के आकार का हथियार छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा इस्तेमाल किया गया था।

उन्होंने इस दावे को भी खारिज कर दिया कि सरकार ने लंदन के विक्टोरिया और अल्बर्ट संग्रहालय से इस हथियार को महाराष्ट्र लाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए और कहा कि यात्रा व्यय और समझौते पर हस्ताक्षर करने में 14.08 लाख रुपये खर्च हुए।

उनकी यह टिप्पणी एक इतिहासकार के उस दावे के कुछ दिनों बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि मराठा साम्राज्य के संस्थापक द्वारा बीजापुर सल्तनत के सेनापति अफजल खान को मारने के लिए इस्तेमाल किया गया वाघ नख सतारा में ही था।

वाघ नख तीन साल के लिए लाया जाएगा भारत

मुनगंटीवार ने सदन को बताया कि वाघ नख को तीन वर्षों की अवधि के लिए लंदन से लाया जाएगा तथा 19 जुलाई से राज्य के सतारा स्थित एक संग्रहालय में प्रदर्शन के लिए रखा जाएगा।

उन्होंने बताया कि लंदन स्थित संग्रहालय ने शुरू में हथियार को एक साल के लिए देने पर सहमति जताई थी, लेकिन राज्य सरकार ने इसे राज्य में तीन साल के लिए प्रदर्शन के लिए सौंपने के लिए राजी कर लिया।

सांस्कृतिक मामलों के मंत्री ने सदन को बताया कि वाघ नख को 19 जुलाई को योद्धा राजा के वंशजों की मौजूदगी में सतारा स्थित सरकारी संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज एक आदर्श शासक थे और सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

उन्होंने कहा, कोई भी यह दावा नहीं करता कि लंदन से लाया गया यह वाघ नख शिवाजी महाराज द्वारा इस्तेमाल किया गया था... हमें शिवाजी महाराज के अनुयायियों द्वारा फोटो साक्ष्य दिए गए थे कि लंदन संग्रहालय में जिस बॉक्स में वाघ नख रखा गया था, उसमें उल्लेख किया गया था कि इसका इस्तेमाल अफजल खान को मारने के लिए किया गया था।

हमने भारत और ब्रिटेन के प्रधानमंत्रियों के साथ-साथ संग्रहालय के अधिकारियों से भी बात की। संग्रहालय ने कभी यह उल्लेख नहीं किया कि हथियार शिवाजी महाराज का था और अफजल खान को मारने के लिए इस्तेमाल किया गया था।

सरकार ने खर्च किए 14 लाख रुपये

उन्होंने कहा, 5 नवंबर 2022 को अफजल खान की कब्र के आसपास से अतिक्रमण हटाने की मांग की गई थी। तदनुसार, यह 10 नवंबर को किया गया, जिस दिन शिवाजी महाराज ने वाघ नख (1659 में) का उपयोग करके अफजल खान को मार डाला था।

मुनगंटीवार ने कहा कि सरकार ने वाघ नख को भारत लाने के लिए लंदन की यात्रा और वहां के संग्रहालय के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए 14.08 लाख रुपये खर्च किए।

उन्होंने कहा, हम यहां वाघ नख को प्रदर्शित करने के लिए कोई किराया नहीं दे रहे हैं।

इतिहासकार इंद्रजीत सावंत ने हाल ही में कहा है कि लंदन से महाराष्ट्र लाया जा रहा वाघ नख शिवाजी महाराज का नहीं है, क्योंकि मूल वाघ नख सतारा में मराठा योद्धा राजा के वंशजों के पास है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि वाघ नख को तीन साल के लिए 30 करोड़ रुपये के ऋण समझौते पर राज्य में लाया जा रहा है।

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