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    Bhagat Singh Koshyari: 'जननेता' से 'जनता के राज्यपाल' बने कोश्यारी को दी गई विदाई, शानदार रहा सफर

    By Jagran NewsEdited By: Devshanker Chovdhary
    Updated: Fri, 17 Feb 2023 07:58 PM (IST)

    अपने राजनीतिक जीवन में जननेता से जनता के राज्यपाल तक का सफर तय करने वाले कोश्यारी भले महाराष्ट्र में विरोधी दलों की आंखों की किरकिरी बने रहे हों लेकिन शुक्रवार को उनकी विदाई के समय राजभवन के स्टाफ एवं स्टाफ के स्वजन की पलकें भी भीगी हुई थीं। File Photo

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    'जननेता' से 'जनता के राज्यपाल' बने कोश्यारी को दी गई विदाई।

    राज्य ब्यूरो, मुंबई। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को मुंबई राजभवन से शुक्रवार को भावभीनी विदाई दी गई। अपने राजनीतिक जीवन में जननेता से जनता के राज्यपाल तक का सफर तय करने वाले कोश्यारी भले महाराष्ट्र में विरोधी दलों की आंखों की किरकिरी बने रहे हों, लेकिन शुक्रवार को उनकी विदाई के समय राजभवन के स्टाफ एवं स्टाफ के स्वजन की पलकें भी भीगी हुई थीं।

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    राजभवन के स्टाफ ने गुरुवार को उनके सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किया था। शुक्रवार को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एवं उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राजभवन जाकर उनसे मुलाकात की। इसके बाद नौसेना के गार्ड ऑफ आनर के बाद राजभवन के स्टाफ एवं स्टाफ के स्वजन ने उन्हें विदाई दी।

    मुंबई के विमानतल से उन्हें वही विशेष विमान लेकर उत्तराखंड की ओर रवाना हुआ, जिससे एक बार बैठकर उन्हें उतरना पड़ा था, क्योंकि उद्धव सरकार ने उन्हें विमान देने से इनकार कर दिया था। महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में भगत सिंह कोश्यारी का कार्यकाल अनेक राजनीतिक घटनाक्रमों से परिपूर्ण रहा।

    उन्होंने भले ही अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही त्यागपत्र दिया हो, लेकिन उन्होंने अपने कार्यकाल में तीन-तीन मुख्यमंत्रियों और उप मुख्यमंत्रियों को शपथ दिलाई। पांच सितंबर, 2019 को उनके राज्यपाल पद की शपथ लेने के कुछ महीने बाद महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के परिणाम आ गए और भाजपा से गठबंधन तोड़कर शिवसेना ने कांग्रेस और राकांपा के साथ महाविकास आघाड़ी का गठन कर लिया था।

    हालांकि, उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाने से पहले कोश्यारी ने 23 नवंबर, 2019 को देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री और अजीत पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवा दी थी। यहीं से वह विपक्ष को खटकने लगे थे। इसके कुछ दिनों बाद 28 नवंबर, 2019 को उन्होंने उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवाई।

    महाविकास आघाड़ी सरकार द्वारा राज्यपाल के विवेकाधीन कोटे से भरी जानेवाली विधान परिषद की 12 सीटों के लिए नाम भेजे जाने के बाद से ही उनकी सरकार के साथ खटपट शुरू हो गई थी। उन्होंने इन नामों को मंजूरी नहीं दी। यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। सरकार के साथ अनबन यहां तक पहुंची कि उन्हें दो-तीन बार राज्य सरकार के विमान एवं हेलीकॉप्टर का उपयोग करने की अनुमति भी नहीं दी गई।

    इसके बाद, जून 2022 में शिवसेना में बगावत से उद्धव सरकार गिरने के बाद उन्होंने ही नए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एवं उपमुख्यमंत्री के रूप में देवेंद्र फडणवीस को शपथ दिलवाई। जनता के राज्यपालदेश में कोरोना की पहली लहर खत्म होने के बाद से ही राज्यपाल कोश्यारी ने राजभवन के दरवाजे सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए खोल दिए थे। उस समय राजभवन का दरबार हॉल एवं दूसरा बड़ा सभागार निर्माणाधीन था।

    इसलिए, छोटे सभागार में वह एक-एक दिन में चार-पांच कार्यक्रमों की अनुमति देते रहे और स्वयं भी उनमें शामिल होते रहे। विपक्ष ने उन्हें भले ही छत्रपति शिवाजी महाराज पर दिए बयान के कारण निशाने पर रखा हो, लेकिन शिवाजी महाराज की जन्मस्थली शिवनेरी किले के दर्शन करने वह पैदल चलकर गए थे।