मुंबई, राज्य ब्यूरो। Dussehra Rally: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में शिवसेना (Shiv Sena) के दोनों गुटों ने पांच अक्टूबर को होने वाली दशहरा रैली (Dussehra Rally) के लिए कमर कस ली है। पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) गुट व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) गुट इस रैली के जरिए अपने-अपने शक्ति प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं।

शिवसेना में टूट के बाद अस्तित्व पर सवाल

इसी वर्ष जून में शिवसेना में हुई बड़ी टूट के बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास आघाड़ी सरकार को अपनी सत्ता गंवानी पड़ी थी। शिवसेना में इतनी बड़ी बगावत उद्धव ठाकरे के लिए अकल्पनीय थी। उनके दो तिहाई से ज्यादा विधायक एकनाथ शिंदे के साथ जा चुके थे। बाद में एक तिहाई सांसद भी उनका साथ छोड़ चुके हैं। दो दिन पहले ही सर्वोच्च न्यायालय की पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने उद्धव ठाकरे गुट की एक अपील को ठुकराते हुए चुनाव आयोग को चुनाव चिह्न पर फैसले का अधिकार भी दे दिया है। अब उद्धव ठाकरे के सामने अस्तित्व का प्रश्न खड़ा हो गया है। शिवसेना के स्थापनाकाल से होती आ रही शिवाजी पार्क की रैली पर भी इस बार ग्रहण लगते-लगते बचा है। यहां रैली की अनुमति भी उन्हें मुंबई उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद ही मिल सकी है, जबकि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को बीकेसी मैदान में रैली करने की अनुमति पहले ही मिल चुकी थी।

रैली के जरिए शक्ति प्रदर्शन करने की चाह

अब दोनों गुट एक ही दिन मुंबई के अलग-अलग मैदानों में अपनी विशाल रैलियां कर अपना-अपना शक्ति प्रदर्शन करना चाहते हैं। दोनों रैलियों का समय भी एक ही रखा गया है। बीकेसी मैदान व शिवाजी पार्क के बीच दूरी सिर्फ 6.5 किलोमीटर की है। बीकेसी मैदान से ठाकरे के घर की दूरी तो एक किलोमीटर भी नहीं है। इसी मैदान में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की रैली होनी है। उन्होंने अपने ट्वीटर पर रैली का टीजर जारी कर दिया है। मात्र 20 सेकेंड के इस टीजर में शिवसेना संस्थापक स्वर्गीय बाला साहब ठाकरे के स्वरों का इस्तेमाल किया गया है।

शिंदे ने खुद को एकलव्य के रूप में दर्शाने की कोशिश की

बाला साहब ठाकरे कहते सुने जा सकते हैं कि शिवराया (छत्रपति शिवाजी) का भगवा झंडा, शिवसेना का भगवा झंडा, हिंदू धर्म का भगवा झंडा सतत-सर्वत्र फड़कता रहना चाहिए। जय हिंद, जय महाराष्ट्र, वंदे मातरम। इस टीजर में ‘एक नेता, एक पक्ष, एक विचार, एकलव्य, एकनाथ’ के नारे के साथ छत्रपति शिवाजी की अश्वारूढ़ तस्वीर के साथ बाला साहब ठाकरे की तस्वीर, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुरु आनंद दिघे की तस्वीर के साथ स्वयं शिंदे की तस्वीर दिखाई गई है। यानी टीजर में शिंदे ने खुद को एकलव्य के रूप में दर्शाने की कोशिश की है। शिंदे गुट ने लगभग इसी तरह का एक पोस्टर भी जारी किया है। शिंदे गुट की रैली के लिए पूरे महाराष्ट्र से समर्थकों को जुटाने का दायित्व उनके गुट के विधायकों और सांसदों पर होगा।

उद्धव ठाकरे बोले, इस बार की दशहरा रैली अभूतपूर्व होनी चाहिए

दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे ने भी अपने गुट के शिवसैनिकों से आह्वान किया है कि इस बार की दशहरा रैली अभूतपूर्व होनी चाहिए। चूंकि संगठन का बड़ा हिस्सा आज भी उद्धव ठाकरे के साथ नजर आता है। इसलिए उन्होंने अपने पदाधिकारियों, शाखा प्रमुखों व जिला प्रमुखों को बड़ी संख्या में समर्थकों को जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी है। उनकी रैली में बड़ी संख्या में महिलाओं को भी लाने की तैयारी की जा रही है। शिवाजी पार्क के आसपास माहिम, दादर, प्रभादेवी क्षेत्र में बड़े-बड़े स्वागत द्वार लगाने की तैयारियां की जा रही हैं। मुंबई के बाहर से आने वाले शिवसैनिकों के स्वागत की जिम्मेदारी मुंबई के शाखाप्रमुखों को दी गई है। हालांकि शिवसेना के दोनों गुटों की रैलियों के बीच 6.5 किलोमीटर का अंतर है। इसके बावजूद दोनों गुटों के समर्थकों के बीच किसी भी प्रकार का टकराव रोकने के लिए मुंबई का पुलिस प्रशासन भी अपनी तैयारी कर रहा है।

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Edited By: Sachin Kumar Mishra

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