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    शिवाजी महाराज पर टिप्पणी को लेकर कोश्यारी और सुधांशु त्रिवेदी को राहत, Bombay HC ने कहा- ये आपराधिक केस नहीं

    Bombay High Court महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी पर कार्रवाई का अनुरोध करने वाली याचिका को खारिज को आज अदालत ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस पर कोई अपराधिक मामला नहीं बनता।

    By AgencyEdited By: Mahen KhannaUpdated: Mon, 27 Mar 2023 03:29 AM (IST)
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    Bombay High Court बांबे हाई कोर्ट से कोश्यारी और सुधांशु त्रिवेदी को राहत।

    मुंबई, प्रेट्र। Bombay High Court बांबे हाई कोर्ट ने छत्रपति शिवाजी महाराज और अन्य हस्तियों पर बयानों को लेकर महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी पर कार्रवाई का अनुरोध करने वाली याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में उनकी टिप्पणियों पर कोई आपराधिक केस बनता नहीं दिखता।

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    कोर्ट ने कहा- टिप्पणी से वक्ता की समझ का चला पता

    कोर्ट ने यह भी कहा कि बयान इन हस्तियों के संबंध में वक्ता की समझ और विचारों को दर्शाते हैं। इसका उद्देश्य श्रोताओं को समझाना और समाज की बेहतरी के लिए ज्ञान देना है। कोश्यारी को शिवाजी महाराज को पुरातन जमाने का आइकन कहने को लेकर विवाद झेलना पड़ा था। वहीं, त्रिवेदी ने कहा था कि मराठा साम्राज्य के संस्थापक ने मुगल बादशाह औरंगजेब से माफी मांगी थी। न्यायमूर्ति सुनील शुक्रे और न्यायमूर्ति अभय वाघवासे ने 20 मार्च को पनवेल के रहने वाले रामा कतरनवारे द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी।

    पिछले महीने ही कोश्यारी ने दिया इस्तीफा

    कोश्यारी ने अपने कार्यकाल में शिवाजी महाराज, समाज सुधारक महात्मा फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई और मराठी लोगों के बारे में कई विवादित बयान दिए थे। पिछले महीने ही कोश्यारी ने राज्य के राज्यपाल के पद से इस्तीफा दे दिया था।  

    याचिकाकर्ता ने किया था ये दावा

    याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि कोश्यारी और त्रिवेदी द्वारा सार्वजनिक भाषणों में दिए गए बयान इन दिवंगत राजनीतिक हस्तियों के प्रति अपमानजनक हैं, जिन्हें सामान्य रूप से विशेष रूप से एससी/एसटी समुदाय के सदस्यों द्वारा उच्च सम्मान दिया जाता है।

    हालांकि, पीठ ने अपने आदेश में कहा कि संदर्भित बयानों पर गहराई से विचार करने से हमें पता चलेगा कि वे इतिहास के विश्लेषण और इतिहास से सीखे जाने वाले सबक की प्रकृति के हैं। कोर्ट ने कहा कि ये बयान मुख्य रूप से उन आंकड़ों के बारे में वक्ता की धारणा और राय को दर्शाते हैं, जिसका उद्देश्य दर्शकों को सोचने और इस तरह से कार्य करने के लिए राजी करना है जो समाज के लिए अच्छा हो। बयान के पीछे की मंशा समाज की बेहतरी के लिए प्रबुद्धता प्रतीत होती है, जैसा कि स्पीकर ने माना है। इसलिए, इन बयानों को किसी भी महान व्यक्ति के प्रति अपमानजनक नहीं देखा जा सकता है।