भारत के इस राज्य में जिंदा है प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, वेदाध्ययन के लिए प्रतिदिन एक मुट्ठी चावल करते दान
पंडित बद्रीनाथ शरण ने नेत्रहीन होने के बावजूद गांव-गांव जाकर परिवारों को मुट्ठीदान के लिए प्रेरित किया। आज इस मुहिम में 27 गांवों के 980 परिवार जुड़ चुके हैं। पहले तो मुट्ठीदान से इकट्ठा किया गया चावल सिर्फ चार हजारे गांव स्थित वेद विद्यालय में ही जाता था।

ओमप्रकाश तिवारी, मुंबई। प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे ले जाने की ललक आज भी कहीं-कहीं जीवंत है। मणिपुर जैसे पूर्वोत्तर भारत के राज्य में इसी ललक के कारण कई गांवों के लोग वेदाध्ययन के लिए प्रतिदिन एक मुट्ठी चावल दान करते हैं।
मणिपुर की राजधानी इंफाल से करीब 30 किलोमीटर दूर चार हजारे गांव निवासी पंडित बद्रीनाथ शरण इसी गांव में 1978 से संस्कृत विद्यालय चलाते आ रहे हैं। मूलतः नेपाली समाज 88 वर्षीय बद्रीनाथ शरण जी पिछले 40 वर्षों से नेत्रहीन भी हैं। इसके बावजूद करीब एक दशक पहले उन्होंने अपने क्षेत्र में ही एक आवासीय वेद विद्यालय खोलने का बीड़ा उठा लिया। उनकी कल्पना के अनुसार विद्यार्थियों को वहीं रखकर नि:शुल्क वेदाध्ययन करवाना था। समस्या विद्यार्थियों के भोजन और शिक्षकों के वेतन दोनों की थी।
पंडित बद्रीनाथ शरण गुरुजी। फोटो क्रेडिट - माई होम इंडिया
इसका हल बद्रीनाथ शरण ने ‘मुट्ठीदान’ से निकाला। उन्होंने आसपास की ग्रामीण महिलाओं को सहमत किया कि वे रोज कम से कम एक वक्त चावल पकाते समय जब पूरे परिवार के लिए चावल पतीले या कुकर में डाल दें, तो सबके हिस्से के उसी चावल में से पानी डालने से पहले एक मुट्ठी चावल निकालकर एक अलग डिब्बे में रखती जाएं। इस प्रकार महीने भर में इकट्ठा किया गया चावल पूर्णमासी के दिन निकट के किसी मंदिर में वह परिवार स्वयं पहुंचा देता है। मंदिर में कई गांवों से आया हुआ चावल इकट्ठा करके वेद विद्यालय में पहुंचा दिया जाता है, जहां यह विद्यार्थियों के भोजन के काम आता है। चावल की मात्रा अधिक होने पर उसे ही बेचकर सब्जियां इत्यादि भी खरीद ली जाती हैं।
पंडित बद्रीनाथ शरण ने नेत्रहीन होने के बावजूद गांव-गांव जाकर परिवारों को मुट्ठीदान के लिए प्रेरित किया। आज इस मुहिम में 27 गांवों के 980 परिवार जुड़ चुके हैं। पहले तो मुट्ठीदान से इकट्ठा किया गया चावल सिर्फ चार हजारे गांव स्थित वेद विद्यालय में ही जाता था। लेकिन अब यह वहां से करीब 11 किलोमीटर दूर संतोलाबारी में कुछ ही वर्ष पहले शुरू हुए वेद विद्यालय में भी जाता है। अब तो 2011-12 में शुरू हुए चार हजारे गांव के वेद विद्यालय की व्यवस्था पुणे के महर्षि वेदव्यास प्रतिष्ठान ने संभाल ली है। लेकिन संतोलाबारी के वेद विद्यालय के लिए मुट्ठीदान की यह मदद बड़ी उपयोगी साबित हो रही है। चार हजारे गांव के वेद विद्यालय में फिलहाल 28 एवं संतोलाबारी के वेद विद्याल में 22 विद्यार्थी वेदाध्ययन कर रहे हैं।
पंडित बद्रीनाथ शरण मणिपुर के उस नेपाली समाज का हिस्सा हैं, जो करीब 200 वर्ष पहले नेपाल से आकर मणिपुर में बस चुका है। आज मणिपुर में नेपाली हिंदुओं की आबादी करीब 60 हजार है। स्वयं काशी से शिक्षा प्राप्त पंडित बद्रीनाथ शरण मानते हैं कि देश के जिन भागों में धर्मांतरण की गतिविधियां ज्यादा तेज चल रही हों, वहां सनातनी समाज को भी अपनी प्राचीन विद्या एवं परंपराओं को जीवित रखने के लिए आगे आना चाहिए। पंडित बद्रीनाथ शरण के इसी प्रकार के कई सामाजिक योगदानों के लिए उन्हें सामाजिक संस्था ‘माई होम इंडिया’ द्वारा शनिवार को वर्ष 2022 का ‘कर्मयोगी सम्मान’ प्रदान किया जा रहा है।
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