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    सुप्रीम कोर्ट ने मशहूर कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को लगाई फटकार, पीएम मोदी और RSS का विवादित कार्टून बनाने पर उठाए सवाल

    By Agency Edited By: Sakshi Pandey
    Updated: Mon, 14 Jul 2025 04:07 PM (IST)

    Supreme Court Hearing on Cartoonist Hemant सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर के कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को प्रधानमंत्री मोदी और RSS पर आपत्तिजनक कार्टून बनाने के लिए फटकार लगाई। अदालत ने कार्टून को अपरिपक्व और भड़काऊ बताया। हेमंत के वकील ने कार्टून हटाने और माफी की बात कही लेकिन अदालत ने उनकी उम्र पर सवाल उठाया। हाईकोर्ट ने पहले ही हेमंत की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

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    सुप्रीम कोर्ट ने कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को लगाई फटकार। फाइल फोटो

    एएनआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर के एक कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को जोरदार फटकार लगाई है। हेमंत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का आपत्तिजनक कार्टून बनाने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे अपरिपक्व और भड़काऊ करार दिया है।

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    सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सुधांशु धौलिया और जस्टिस अरविंद कुमार ने मामले पर सुनवाई की। दोनों जजों की बेंच ने हेमंत के कार्टून पर नाराजगी जाहिर की है।

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    एडवोकेट वृंदा ने रखा हेमंत का पक्ष

    सुप्रीम कोर्ट में हेमंत मालवीय का पक्ष रखने वाली एडवोकेट वृंदा ग्रोवर ने दलील दी कि हेमंत ने वो कार्टून डिलीट कर दिया और साथ ही उन्होंने बयान भी दिया कि वो आपत्तिजनक टिप्पणियों का समर्थन नहीं कर रहे थे। वृंदा ने माना कि हेमंत का कार्टून बेकार हो सकता है, जो कई लोगों को पसंद नहीं आया। मगर, इसे अपराध नहीं कहा जा सकता है।

    सुप्रीम कोर्ट ने पूछी हेमंत की उम्र

    वृंदा ने हेमंत मालवीय को अंतरिम सुरक्षा देने की भी मांग की है। वृंदा का कहना है कि पुलिस बार-बार उनका दरवाजा खटखटा रही है। वहीं, जब अदालत ने कार्टूनिस्ट हेमंत की उम्र के बारे में पूछा तो एडवोकेट वृंदा ने बताया कि वो 50 साल के हैं। इस पर जस्टिस सुधांशु ने कहा-

    इसके बावजूद वो परिपक्व नहीं हैं। हम मानते हैं कि यह (कार्टून) भड़काऊ था।

    मंगलवार को होगी सुनावई

    बता दें कि पीएम मोदी और RSS पर आपत्तिजनक कार्टून बनाने के बाद हेमंत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसपर आज सुनवाई चल रही थी। हालांकि, अब अदालत ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को तय की है।

    हाईकोर्ट ने खारिज की थी जमानत

    इससे पहले हेमंत ने 3 जुलाई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। हाईकोर्ट का कहना था कि हेमंत ने 'अभिव्यक्ति की आजादी' का गलत इस्तेमाल किया है। उनके कार्टून पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    कोरोना काल में बनाया था कार्टून

    हेमंत मालवीय का कहना है कि उन्होंने यह कार्टून कोरोना महामारी के दौरान बनाया था। उस समय पूरे देश में डर का माहौल था। मगर, अब कुछ यूजर्स ने उसे फिर से सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू कर दिया है। हेमंत का पुराना कार्टून शेयर करते हुए यूजर्स केंद्र सरकार पर तंज कस रहे हैं कि सरकार वक्फ और पहलगाम जैसे मुद्दों को छिपाने के लिए जातिगत जनगणना लागू कर रही है।

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